US टैरिफ में कमी और FTA से भारत बनेगा ग्लोबल टेक्सटाइल हब: चम्पालाल बोथरा

अमेरिका द्वारा भारतीय टेक्सटाइल एवं गारमेंट उत्पादों पर टैरिफ में की गई ऐतिहासिक कटौती और भारत के प्रस्तावित व आगामी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) देश के टेक्सटाइल-गारमेंट उद्योग के लिए बड़ा अवसर हैं। इससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी व यूरोपीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे, MSME की लागत घटेगी, रोजगार बढ़ेगा और भारत ‘चीन+1’ रणनीति के तहत वैश्विक टेक्सटाइल सप्लाई चेन में एक मजबूत ग्लोबल हब के रूप में उभरेगा।

US टैरिफ में कमी और FTA से भारत बनेगा ग्लोबल टेक्सटाइल हब: चम्पालाल बोथरा

FTA और ‘चीन+1’ रणनीति से भारत बनेगा वैश्विक सोर्सिंग का भरोसेमंद केंद्र

अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्त्र होंगे अधिक प्रतिस्पर्धी—CAIT

सूरत,अमेरिका द्वारा भारतीय टेक्सटाइल एवं गारमेंट उत्पादों पर आयात शुल्क (टैरिफ) में की गई ऐतिहासिक कटौती और भारत द्वारा किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को उद्योग के लिए एक रणनीतिक उपलब्धि बताते हुए, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की टेक्सटाइल एंड गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन श्री चम्पालाल बोथरा ने कहा कि इन निर्णयों से भारत वैश्विक टेक्सटाइल-गारमेंट सप्लाई चेन में एक ग्लोबल हब के रूप में उभरेगा।

श्री बोथरा ने कहा कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा टेक्सटाइल-गारमेंट निर्यात बाजार है, जहाँ भारत के कुल निर्यात का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा जाता है। पहले भारतीय वस्त्रों पर अमेरिका में प्रभावी टैरिफ 45–50 प्रतिशत तक पहुँच गया था, जो अब घटकर लगभग 18 प्रतिशत रह गया है। इससे भारतीय उत्पादों की कीमतें अमेरिकी बाजार में कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी होंगी और वियतनाम, बांग्लादेश तथा अन्य एशियाई देशों की तुलना में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार में अपनाई जा रही “चीन+1” रणनीति के तहत अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब सुरक्षित, स्थिर और भरोसेमंद सोर्सिंग विकल्प खोज रहे हैं। टैरिफ में कमी के बाद भारत बड़े अमेरिकी रिटेल ब्रांड्स और वैश्विक खरीदारों के लिए न केवल सुरक्षित बल्कि आर्थिक रूप से सबसे उपयुक्त विकल्प बनकर उभरा है।

श्री बोथरा ने बताया कि टेक्सटाइल-गारमेंट उद्योग कृषि के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है। कच्चे माल, रसायन, डाई और प्रोसेसिंग इनपुट्स की लागत में कमी से लाखों MSME इकाइयों की उत्पादन लागत घटेगी, लाभप्रदता बढ़ेगी और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

उन्होंने कहा कि टैरिफ में यह राहत भारत को केवल पारंपरिक वस्त्रों तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि वैल्यू-ऐडेड और टेक्निकल टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में भी निर्यात के नए अवसर खोलेगी। स्पोर्ट्सवियर, मेडिकल टेक्सटाइल और सुरक्षात्मक परिधानों के अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियां अब बड़ी हिस्सेदारी हासिल कर सकेंगी। साथ ही, भारतीय निर्माताओं को अपने स्वदेशी ब्रांड्स को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का अवसर मिलेगा, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ की साख और मजबूत होगी।

श्री बोथरा ने कहा कि यार्न, फैब्रिक और तैयार परिधान तक की एकीकृत सप्लाई-चेन विकसित होने से डिलीवरी समय घटेगा, गुणवत्ता सुधरेगी और बड़े निर्यात ऑर्डर्स को समय पर पूरा करना आसान होगा।

दीर्घकालिक दृष्टि से उन्होंने कहा कि यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूरोपीय संघ (EU) के साथ प्रस्तावित एवं आगामी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भारतीय टेक्सटाइल-गारमेंट उद्योग को ड्यूटी-फ्री या न्यूनतम टैरिफ पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच प्रदान करेंगे। इससे भारत का निर्यात आधार अमेरिका तक सीमित न रहकर यूरोप जैसे उच्च-मूल्य वाले बाजारों तक व्यापक रूप से फैलेगा।

अंत में श्री बोथरा ने कहा,
“यह समय भारतीय टेक्सटाइल-गारमेंट उद्योग के लिए केवल राहत का नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की दिशा में निर्णायक छलांग लगाने का है। टैरिफ में कमी, स्थिर नीतियाँ और FTA के संयुक्त प्रभाव से भारत आने वाले वर्षों में चीन और वियतनाम जैसे देशों को कड़ी टक्कर देते हुए एक ग्लोबल टेक्सटाइल हब के रूप में स्थापित होगा।