अक्षय तृतीया 2026: आसमान छूती कीमतों के बावजूद ₹20,000 करोड़ का कारोबार, घटती मात्रा के बीच बदल रहा खरीदारी का ट्रेंड और निवेश का तरीका
अक्षय तृतीया 2026 पर सोना-चांदी की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के बावजूद देशभर में करीब ₹20,000 करोड़ के व्यापार का अनुमान है, जो पिछले साल से अधिक है। बढ़ती कीमतों के चलते उपभोक्ताओं की खरीदारी का तरीका बदल रहा है—अब लोग हल्के आभूषण, छोटे गोल्ड कॉइन और वैकल्पिक निवेश विकल्पों जैसे डिजिटल गोल्ड, SGB और ETF की ओर बढ़ रहे हैं।
अक्षय तृतीया 2026: रिकॉर्ड कीमतों के बीच मजबूत मांग — ₹20,000 करोड़ के व्यापार का अनुमान, खरीद के तरीके में बदलाव
कभी न घटने वाली समृद्धि” का प्रतीक मानी जाने वाली अक्षय तृतीया भारत में आज भी गहरी आस्था और आर्थिक महत्व के साथ मनाई जाती है। सोना-चांदी की कीमतों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी के बावजूद आज अक्षय तृतीया के दिन देश भर में लगभग ₹20,000 करोड़ के व्यापार का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के लगभग ₹16,000 करोड़ के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। यह जानकारी कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) ने दी। अकेले दिल्ली में यह व्यापार लगभग 6 हज़ार करोड़ रुपए का होगा।
चांदनी चौक से सांसद एवं कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल* ने कहा कि अक्षय तृतीया पारंपरिक रूप से सोना खरीदने के लिए देश के सबसे शुभ अवसरों में से एक रही है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया निवेश स्थायी समृद्धि लेकर आता है। उन्होंने कहा, “हालांकि सोना अभी भी खरीद का केंद्र बना हुआ है, लेकिन तेज़ी से बढ़ती कीमतों के चलते खरीद के स्वरूप में स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है।”
इस वर्ष सोने की कीमतें पिछले वर्ष के लगभग ₹1,00,000 प्रति 10 ग्राम से बढ़कर लगभग ₹1.58 लाख तक पहुँच गई हैं, जबकि चांदी ₹85,000 प्रति किलो से बढ़कर ₹2.55 लाख प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गई है। कीमतों में इस तीव्र वृद्धि ने उपभोक्ता व्यवहार में बड़ा बदलाव ला दिया है। ऊंची कीमतों के बावजूद मांग कमजोर नहीं हुई है, बल्कि खरीदारी अब अधिक सोच-समझकर और मूल्य-आधारित हो रही है।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. सी. भरतिया ने कहा कि देशभर के ज्वैलर्स ने बदलते रुझानों के अनुसार अपनी रणनीतियों में बदलाव किया है। “हल्के वजन के आभूषण, रोज़मर्रा में पहने जाने वाले डिज़ाइन, तथा चांदी और हीरे के उत्पादों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही मेकिंग चार्ज में छूट और छोटे गोल्ड कॉइन जैसे आकर्षक ऑफर्स से ग्राहकों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने आगे कहा कि जहां एक ओर कुल व्यापार का मूल्य बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर वास्तविक मात्रा में गिरावट एक अलग ही तस्वीर पेश कर रही है।
कैट के सहयोगी संगठन ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा* द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, ₹16,000 करोड़ के अनुमानित सोने के व्यापार का अर्थ वर्तमान कीमतों पर लगभग 10,000 किलो (10 टन) सोने की बिक्री है। यदि इसे देशभर के अनुमानित 2 से 4 लाख ज्वैलर्स में बांटा जाए, तो प्रति ज्वैलर औसतन केवल 25 से 50 ग्राम सोने की बिक्री होती है, जो मात्रा में स्पष्ट गिरावट को दर्शाता है।
इसी प्रकार ₹4,000 करोड़ के चांदी के व्यापार का अर्थ लगभग 1,56,800 किलो (करीब 157 टन) चांदी की बिक्री है, जिससे प्रति ज्वैलर औसतन केवल 400 से 800 ग्राम चांदी की बिक्री होती है।
अरोड़ा ने कहा, “ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि कीमतों में वृद्धि के कारण व्यापार का मूल्य तो बढ़ रहा है, लेकिन वास्तविक खपत घट रही है। यही वजह है कि इस वर्ष बाजार में हल्के आभूषण और छोटे सिक्कों की मांग अधिक है।”
उन्होंने यह भी कहा कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण ज्वैलर्स के लिए स्टॉक प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसके बावजूद त्योहार की सकारात्मक भावना के चलते बाजारों में अच्छी ग्राहकी देखी जा रही है। उपभोक्ता अब पारंपरिक आस्था के साथ-साथ आर्थिक समझदारी को ध्यान में रखते हुए सीमित और विवेकपूर्ण निवेश कर रहे हैं।
इसके साथ ही डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) जैसे वैकल्पिक निवेश विकल्पों की ओर भी लोगों का रुझान बढ़ रहा है, जो अधिक तरलता, सुरक्षा और लचीलापन प्रदान करते हैं।
कैट और एआईजेजीएफ ने सभी ज्वैलर्स से अपील की है कि वे अनिवार्य हॉलमार्किंग (HUID) का सख्ती से पालन करें, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो और उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत हो। ग्राहकों को भी खरीदारी के दौरान शुद्धता और प्रमाणिकता के प्रति सजग रहने की सलाह दी गई है।
अक्षय तृतीया 2026 परंपरा और आधुनिक वित्तीय सोच के अनूठे संगम का प्रतीक बनकर उभर रही है—जहां आस्था मांग को प्रेरित करती है, वहीं समझदारी यह तय करती है कि खरीदारी कैसे की जाए।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस