करुणा, सेवा और साधना के एक युग का अवसान पद्मश्री परम पूज्य आचार्य श्री चंदना जी ‘ताई माँ’ का महाप्रयाण

पद्मश्री आचार्य श्री चंदना जी ‘ताई माँ’ का 22 अप्रैल 2026 को पुणे में शांतिपूर्वक महाप्रयाण हो गया, जिससे जैन समाज और समस्त मानवता को अपूरणीय क्षति हुई है। वे करुणा, सेवा और साधना की प्रतीक थीं तथा Veerayatan की संस्थापिका के रूप में उन्होंने शिक्षा, चिकित्सा, नारी सशक्तिकरण और जीव दया के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।

करुणा, सेवा और साधना के एक युग का अवसान पद्मश्री परम पूज्य आचार्य श्री चंदना जी ‘ताई माँ’ का महाप्रयाण

पुणे में शांतिपूर्वक हुआ निर्वाण, मानवता ने खोया महान संत

24 अप्रैल को पुणे में अंतिम दर्शन और वैकुंठ श्मशान में होगा अंतिम संस्कार

Veerayatan की संस्थापिका ने सेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य

शिक्षा, चिकित्सा, नारी सशक्तिकरण और जीव दया में दिया अतुलनीय योगदान

सूरत। मानवता, करुणा और निस्वार्थ सेवा की सजीव प्रतिमूर्ति, Acharya Chandana Ji (स्नेहपूर्वक “पूज्य ताई माँ”) का 22 अप्रैल 2026 को प्रातः लगभग 10:50 बजे पुणे में शांतिपूर्वक निर्वाण हो गया। उनके महाप्रयाण से जैन समाज ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता ने एक युगद्रष्टा संत, करुणामयी मार्गदर्शक और सेवा की अखंड ज्योति को खो दिया है। उनके जाने से सेवा, साधना और त्याग का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया।

अंतिम दर्शन एवं संस्कार
पूज्य ताई माँ के अंतिम दर्शन हेतु पार्थिव शरीर को वर्धमान प्रतिष्ठान, सेनापति बापट रोड, पुणे में शुक्रवार, 24 अप्रैल को प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक रखा जाएगा। तत्पश्चात सायं 5:00 बजे वैकुंठ श्मशान, पुणे में अंतिम संस्कार संपन्न होगा।

सेवा और करुणा की अमिट विरासत
Veerayatan की संस्थापिका आचार्य चंदना जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन मानव सेवा, शिक्षा, नारी सशक्तिकरण, चिकित्सा सेवा और जीव दया को समर्पित किया। उनके मार्गदर्शन में वीरायतन ने शिक्षा, स्वास्थ्य (चिकित्सा), आपदा राहत और दिव्यांगजन सेवा के क्षेत्र में देश-विदेश में असाधारण कार्य किए। ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा शिविर, अस्पताल सेवाएं और स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों के माध्यम से उन्होंने असंख्य लोगों के जीवन में नई आशा जगाई। विशेष रूप से अबोल पशु-पक्षियों की रक्षा और करुणा के प्रसार में उनका योगदान अतुलनीय रहा। उनका व्यक्तित्व सादगी, तप, त्याग और समर्पण का अनुपम संगम था।

मानवता का जीवंत उदाहरण – सूरत की घटना
सूरत के शिव शक्ति मार्केट में लगी भीषण आग के समय भी पूज्य ताई माँ की करुणा और संवेदनशीलता स्पष्ट रूप से सामने आई थी। उन्होंने तत्काल एक पत्र भेजकर प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की थी और संदेश दिया था कि “मानवता से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया था कि यदि किसी भी बच्चे को शिक्षा की आवश्यकता हो, किसी को चिकित्सा सहायता चाहिए या किसी परिवार को किसी भी प्रकार की सेवा की जरूरत हो, तो वीरायतन सदैव उनके साथ खड़ा रहेगा। उनका यह संदेश उनके जीवन दर्शन—सेवा, सहयोग और करुणा—का सच्चा प्रतिबिंब है।

सूरत से भावपूर्ण श्रद्धांजलि
वीरायतन परिवार से जुड़े सूरत के वरिष्ठ समाजसेवी चम्पालाल बोथरा (सूरत ) एवं प्रतिभा बोथरा (बीकानेर) ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि “पूज्य ताई माँ का महाप्रयाण वीरायतन परिवार, सम्पूर्ण मानव जाति और जीव दया के क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। ऐसी विरल आत्माएं युगों में एक बार अवतरित होती हैं। आज हमने एक ऐसी दिव्य चेतना को खो दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उनका आदर्श, उनका स्नेह और उनकी प्रेरणा सदैव हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी।”

समाज के विभिन्न वर्गों ने भी उनके निधन पर गहन शोक व्यक्त करते हुए इसे करुणा और सेवा के एक युग का अंत बताया है।