अन्नामलाई के नए राजनीतिक आंदोलन से तमिलनाडु की राजनीति में हलचल, विजय की पार्टी ने कहा- 'BJP की पुरानी फिल्म की री-रिलीज'

तमिलनाडु BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने शुक्रवार को नई पार्टी बनाने का ऐलान किया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो मैसेज में अन्नामलाई ने कहा कि आज हम एक आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। हमारी राजनीतिक पार्टी तमिलनाडु में 2031 में अगला विधानसभा चुनाव लड़ेगी

अन्नामलाई के नए राजनीतिक आंदोलन से तमिलनाडु की राजनीति में हलचल, विजय की पार्टी ने कहा- 'BJP की पुरानी फिल्म की री-रिलीज'

बीजेपी छोड़ने के बाद के. अन्नामलाई ने अपना नया राजनीतिक संगठन लॉन्च किया, जिसको 10 घंटे में ही 10 लाख लोगों ने सपोर्ट किया है. अब इसको लेकर तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज ने तंज कसा.

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने भाजपा से अलग होकर अपने नए राजनीतिक आंदोलन ‘इधु नम्मा इयक्कम’ (यह हमारा आंदोलन है) की शुरुआत कर दी है। आंदोलन के लॉन्च होते ही अन्नामलाई ने दावा किया कि महज 10 घंटे के भीतर 10 लाख से अधिक लोगों ने इसमें पंजीकरण कराया है। उनके इस कदम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, वहीं राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।

अन्नामलाई का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि तमिलनाडु के भविष्य को लेकर लोगों की सामूहिक सोच और मिशन का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शुरुआती चरण में इस आंदोलन को मजबूत किया जाएगा, कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा और फिर उचित समय आने पर इसे एक राजनीतिक दल का रूप दिया जाएगा।

2031 विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा

भाजपा से इस्तीफा देने के बाद 5 जून को जारी एक वीडियो संदेश में अन्नामलाई ने अपने नए राजनीतिक सफर का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उनका संगठन आगामी वर्षों में राज्यभर में अपनी जड़ें मजबूत करेगा और वर्ष 2031 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगा।

उन्होंने कहा, “आज हम एक स्वतंत्र आंदोलन की शुरुआत कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य राजनीति में नए विचार, नई कार्यशैली और जनता की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करना है। आने वाले समय में यही आंदोलन तमिलनाडु के राजनीतिक भविष्य को नई दिशा देगा।”

‘We The Leaders’ प्लेटफॉर्म और नई वेबसाइट लॉन्च

अपने आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने के लिए अन्नामलाई ने ‘We The Leaders’ नाम से एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है। इसके माध्यम से युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक रूप से जागरूक नागरिकों को जोड़ने की योजना बनाई गई है।

इसके साथ ही उन्होंने कोयंबटूर में एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर फॉर एथिक्स एंड पॉलिटिक्स स्थापित करने की घोषणा भी की है। इस संस्थान का उद्देश्य राजनीति में नैतिकता, नेतृत्व और जनसेवा की भावना को बढ़ावा देना बताया गया है।

भाजपा नेताओं का भी मिला समर्थन

अन्नामलाई के नए आंदोलन को भाजपा के कुछ नेताओं का भी समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। भाजपा के तमिलनाडु प्रदेश उपाध्यक्ष करु नागराजन ने भी पार्टी से इस्तीफा देकर अन्नामलाई के साथ खड़े होने का फैसला किया है।

पत्रकारों से बातचीत में नागराजन ने कहा कि वे और कई अन्य भाजपा नेता अन्नामलाई की नई राजनीतिक सोच और नेतृत्व क्षमता पर भरोसा करते हैं। उनका मानना है कि तमिलनाडु में वैकल्पिक राजनीति की जरूरत है और अन्नामलाई इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री का तंज, बोले- पुरानी फिल्म की री-रिलीज

हालांकि अन्नामलाई के इस कदम का विरोध भी शुरू हो गया है। तमिलनाडु सरकार में स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज ने उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अन्नामलाई भाजपा की एक पुरानी फिल्म की तरह हैं, जिसे नए नाम के साथ दोबारा रिलीज किया गया है।

अरुणराज ने कहा, “हर री-रिलीज फिल्म सफल नहीं होती। लोग जानते हैं कि अन्नामलाई की राजनीतिक स्थिति क्या है। इसलिए यह दावा करना कि जनता उनके पीछे खड़ी हो जाएगी, जल्दबाजी होगी।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई के नए संगठन को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों सतर्क नजर आ रहे हैं, क्योंकि उनका युवा नेतृत्व और लोकप्रिय छवि भविष्य में कई समीकरण बदल सकती है।

रिजाइन लेटर में जताए मतभेद

अन्नामलाई ने शुक्रवार को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता और सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया था। भाजपा नेतृत्व ने उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया।

अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व और तमिलनाडु की राजनीतिक संस्कृति में बदलाव लाने के उद्देश्य से भाजपा का दामन थामा था। हालांकि पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान पार्टी नेतृत्व के साथ उनके कई मुद्दों पर मतभेद उभरकर सामने आए।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने समय-समय पर अपने विचार और असहमति शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाई, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि उन्हें नया रास्ता चुनना पड़ा।

2020 में भाजपा में शामिल हुए थे

अन्नामलाई का राजनीतिक सफर काफी तेजी से आगे बढ़ा। कर्नाटक कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे अन्नामलाई ने सरकारी सेवा छोड़कर वर्ष 2020 में भाजपा ज्वाइन की थी। राजनीति में प्रवेश के कुछ ही समय बाद उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया और बाद में तमिलनाडु भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया।

सिर्फ 37 वर्ष की उम्र में प्रदेश अध्यक्ष बनने वाले अन्नामलाई ने राज्य में भाजपा के विस्तार के लिए आक्रामक अभियान चलाया। उनकी पदयात्राओं, जनसभाओं और सरकार विरोधी अभियानों ने उन्हें राज्यभर में पहचान दिलाई। भाजपा के कई समर्थकों के बीच वे पार्टी के सबसे लोकप्रिय चेहरों में शामिल हो गए थे।

गठबंधन और नेतृत्व परिवर्तन से बढ़ी नाराजगी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अन्नामलाई की नाराजगी का मुख्य कारण भाजपा के भीतर हुए नेतृत्व परिवर्तन और राज्य में पार्टी की रणनीति रही। उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद उनके समर्थकों में असंतोष बढ़ गया था।

इसके अलावा भाजपा और All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (एआईएडीएमके) के बीच दोबारा बने गठबंधन को लेकर भी वे असहज बताए जा रहे थे। माना जाता है कि वे तमिलनाडु में भाजपा को स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहते थे, जबकि पार्टी नेतृत्व गठबंधन की राजनीति को प्राथमिकता दे रहा था।

तमिलनाडु की राजनीति में नया समीकरण

अन्नामलाई का नया आंदोलन फिलहाल शुरुआती चरण में है, लेकिन इसके जरिए उन्होंने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले वर्षों में तमिलनाडु की राजनीति में एक नया विकल्प उभर सकता है। राज्य में पहले से ही डीएमके, एआईएडीएमके और अभिनेता Vijay की पार्टी के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। ऐसे में अन्नामलाई की नई राजनीतिक पारी भविष्य में चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि उनका यह आंदोलन जनसमर्थन को कितनी मजबूती से राजनीतिक ताकत में बदल पाता है। फिलहाल उनके दावों, भाजपा नेताओं के समर्थन और विरोधियों के हमलों ने तमिलनाडु की राजनीति को नया मुद्दा जरूर दे दिया है।