साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट बैठक: 77 साल बाद ‘सेवा तीर्थ’ शिफ्ट होगा PMO, यहीं से लिए गए मोदी सरकार के 5 ऐतिहासिक फैसले
देश की सत्ता का प्रतीक रहा साउथ ब्लॉक अब इतिहास के एक नए मोड़ पर खड़ा है। 77 वर्षों तक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का संचालन यहीं से होता रहा, लेकिन अब इसे ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित किया जा रहा है। इस बदलाव से पहले साउथ ब्लॉक में अंतिम कैबिनेट बैठक आयोजित की गई, जिसने इस ऐतिहासिक भवन के एक लंबे प्रशासनिक अध्याय का समापन कर दिया।
इतिहास से ‘सेवा तीर्थ’ तक: साउथ ब्लॉक में अंतिम कैबिनेट, 77 साल बाद बदलेगा PMO का पता
साउथ ब्लॉक केवल एक इमारत नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की नीतियों और निर्णायक क्षणों का साक्षी रहा है। मोदी सरकार के दौरान भी कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले यहीं से लिए गए, जिन्होंने राष्ट्रीय राजनीति और शासन व्यवस्था को नई दिशा दी। अब PMO के ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होने के साथ ही प्रशासन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 फरवरी को नए प्रधानमंत्री ऑफिस ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होंगे। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, मोदी दोपहर करीब 1:30 बजे ‘सेवा तीर्थ’ बिल्डिंग कॉम्पलेक्स के नाम का अनावरण करेंगे। फिर शाम करीब 6 बजे सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 और 2 का उद्घाटन करेंगे।
इसके बाद PM एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगे। कर्तव्य भवन-1 और 2 में केंद्र सरकार के मंत्रालयों के नए ऑफिस होंगे। वर्तमान में PMO और मंत्रालयों के ऑफिस नई दिल्ली स्थित सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग के नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में है।
इन दोनों इमारतों को करीब 95 सालों से देश की सत्ता का केंद्र माना जाता रहा है। शुक्रवार को यहां सरकार के कामकाज का आखिरी दिन होगा। सेवा तीर्थ जाने से पहले PM मोदी यहां केंद्रीय कैबिनेट की विशेष बैठक करेंगे।
कैबिनेट की यह बैठक शुक्रवार शाम 4 बजे तय है। यह ब्रिटिश काल के सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग में आखिरी बैठक होगी। इसे 1900 के शुरुआती दशक में ब्रिटिश आर्किटेक्ट हर्बर्ट बेकर ने ब्रिटिश शासन की जरूरतों के मुताबिक डिजाइन किया था।
1189 करोड़ रुपये की लागत से बना 'सेवा तीर्थ'
अब पीएमओ सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत बने नए परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित होगा. 1,189 करोड़ रुपये की लागत से बने इस परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के लिए अलग-अलग भवन तैयार किए गए हैं.
'युगे युगीन भारत संग्रहालय' कहलाएंगे नॉर्थ-साउथ ब्लॉक
यह पूरा परिसर 2,26,203 वर्ग फुट में फैला है और इसका निर्माण लार्सन एंड टुब्रो ने किया है. कैबिनेट सचिवालय पहले ही सितंबर में ‘सेवा तीर्थ-2’ में शिफ्ट हो चुका है, जबकि ‘सेवा तीर्थ-3’ में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय होगा. पीएमओ के शिफ्ट होने के बाद साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ नाम से एक सार्वजनिक संग्रहालय में बदलने की योजना है.
साउथ ब्लॉक का गौरवशाली इतिहास और ऐतिहासिक कैबिनेट बैठकें
साउथ ब्लॉक में स्वतंत्र भारत की पहली कैबिनेट बैठक पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुई थी। 1931 में निर्मित यह इमारत ब्रिटिश शासन की संरचनात्मक भव्यता के साथ-साथ भारत के आधुनिक प्रशासन का प्रतीक रही है। 1947 में प्रधानमंत्री सचिवालय की स्थापना से शुरू हुई यह यात्रा लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में बड़े बदलावों से गुज़री, जब इसे विधिक मान्यता मिली। इंदिरा गांधी के समय में इसकी शक्ति और दायरा बढ़ा और 1977 में इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री कार्यालय अर्थात् पीएमओ कर दिया गया।
सेवा तीर्थ में एकीकृत होगा शासन का सर्वोच्च ढांचा
सेवा तीर्थ केवल पीएमओ का नया पता नहीं है, बल्कि यह शासन की शीर्ष इकाइयों को एक ही परिसर में लाने का अभिनव प्रयास है। सेवा तीर्थ एक में प्रधानमंत्री कार्यालय, सेवा तीर्थ दो में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ तीन में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय तथा एनएसए का कार्यालय होगा। यह व्यवस्था भारत के रणनीतिक ढांचे को अधिक संगठित और प्रभावी बनाएगी। पुराने ढांचे में संवेदनशील मामलों के लिए विभिन्न स्थानों पर समन्वय कठिन होता था, अब यह चुनौती काफी हद तक हल हो जाएगी। यहाँ भारत के ‘जेम्स बॉन्ड’ कहे जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी बैठकर महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे।
सेवा तीर्थ नाम के पीछे छिपा संदेश और भविष्य की दिशा
पहले इस परिसर को कार्यपालिका केंद्र कहा जाता था, लेकिन इसे ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया है ताकि शासन के केंद्र में सत्ता नहीं बल्कि सेवा की भावना को स्थान मिले। यह नाम परिवर्तन उत्तरदायित्व-आधारित शासन की ओर बढ़ते भारत की सोच का प्रतिबिंब है। साथ ही यह बदलाव औपनिवेशिक ढांचे से आधुनिक, भारतीय प्रशासनिक पहचान की ओर स्वाभाविक परिवर्तन को भी दर्शाता है।
साउथ ब्लॉक का अगला अध्याय—युग युगीन भारत संग्रहालय
पीएमओ के पूरी तरह खाली होने के बाद ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युग युगीन भारत संग्रहालय’ में बदल दिया जाएगा। यह कदम उस युग के अंत का प्रतीक होगा जब ब्रिटिश काल की इमारतें भारत की सत्ता का केंद्र थीं। नया संग्रहालय इस इतिहास को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों के सामने रखेगा, जिससे सत्ता के इस परिवर्तन को सांस्कृतिक महत्व भी मिल सके।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस