सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश,जेल से बाहर आएंगे कवासी लखमा, लेकिन छत्तीसगढ़ में रहने पर पाबंदी, शराब घोटाले के आरोप में थे बंद
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री कवासी लखमा को अंतरिम जमानत दी है, लेकिन जांच पूरी होने तक उन्हें राज्य से बाहर रहने का आदेश दिया गया है. कोर्ट ने कड़ी शर्तें लगाई हैं, जिनमें पासपोर्ट जमा करना और बिना अनुमति विदेश यात्रा न करना शामिल है.
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से जुड़े मामलों में उनकी अंतरिम जमानत मंजूर की गई है। आज शाम करीब 4 बजे तक पूर्व मंत्री रिहा हो सकते हैं।
Kawasi Lakhma Bail By Supreme Court: छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट में ढाई घंटे चली सुनवाई के बाद उन्हें अंतरिम जमान दे दी गई है. जमानत देने के साथ ही कोर्ट ने कई शर्तें भी लगाई हैं. कवासी लखमा को अभी राज्य से बाहर रहना होगा. कोर्ट में पेशी पर वह छत्तीसगढ़ आ सकते हैं. पासपोर्ट जमा करना होगा. इसके अलावा पता व मोबाइल नंबर पुलिस थाने में दर्ज कराना होगा.
सुशील आनंद शुक्ला ने कही ये बात
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आज एक बार फिर सत्य की जीत हुई है और यह साबित हुआ है कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता है. कवासी लखमा को भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर षड्यंत्रपूर्वक ‘कथित शराब घोटाले’ में फंसाया और एक वरिष्ठ आदिवासी नेता राजनीतिक विद्वेष के कारण महीनों तक जेल की सलाखों के पीछे बंद करके रखा.
लखमा की रिहाई पर भाजपा की तरफ से आया ये रिएक्शन
कवासी लखमा की रिहाई पर भाजपा प्रवक्ता किरण बघेल ने कहा कि कांग्रेस सरकार में सिंडिकेट बनाकर शराब घोटाले को अंजाम दिया गया. एजेंसियां जांच कर रही हैं. अभी सिर्फ जमानत मिली है. इसका मतलब ये नहीं है कि वह बरी हो गए हैं. कोर्ट में मामला चल रहा है, जो भी दोषी हैं उन्हें सजा मिलेगी.
समर्थकों में खुशी की लहर
पूर्व मंत्री कवासी लखमा को जमानत मिलने पर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने खुशी जताई है. इसके अलावा उन्होंने सरकार पर साजिश का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि एक आदिवासी को एक साल जेल में रखा गया, सच्चाई की जीत हुई है. वहीं सुकमा में लखमा की जमानत होने पर जिला मुख्यालय स्थित बस स्टैंड पर समर्थकों ने पटाखे फोड़े हैं.
राज्य सरकार और ईडी की ओर से कवासी लखमा की जमानत का विरोध किया गया. राज्य सरकार ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और इसमें मंत्रियों, राजनीतिक पदाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है. इस घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है.
15 जनवरी 2025 को ईडी और 2 अप्रैल 2025 को ईओडब्ल्यू ने लखमा को गिरफ्तार किया था. इस मामले में कई चार्जशीट फाइल की जा चुकी हैं और जांच पूरी हो चुकी है. इस केस में 1193 गवाह बनाए गए हैं. कुल 52 आरोपी हैं, जिनमें से 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. पहले ही 19 लोगों को जमानत मिल चुकी है.
हर महीने दो करोड़ रुपये कमीशन का आरोप
यह कथित घोटाला भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ, जब कवासी लखमा राज्य के आबकारी मंत्री थे। आरोप है कि शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में ढील दी गई और इसके बदले सिंडिकेट से लखमा को हर महीने करीब दो करोड़ रुपये का कमीशन मिलता था।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस