मुख्यमंत्री मोहन यादव का बयान सिर्फ जीतू पटवारी पर व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि पूरे किसान समाज के सम्मान, लोकतांत्रिक मूल्यों और मध्यप्रदेश की राजनीतिक मर्यादाओं पर सीधा प्रहार है — मुकेश नायक

मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के जीतू पटवारी पर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी केवल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर नहीं, बल्कि किसान समाज, लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रदेश की राजनीतिक मर्यादाओं पर हमला है। नायक ने कहा कि जीतू पटवारी किसान परिवार से आते हैं और किसानों के सम्मान को किसी कीमत से नहीं आंका जा सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री से बयान पर सार्वजनिक माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेदों का जवाब तर्क और संवाद से दिया जाना चाहिए, न कि व्यक्तिगत अपमान से।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का बयान सिर्फ जीतू पटवारी पर व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि पूरे किसान समाज के सम्मान, लोकतांत्रिक मूल्यों और मध्यप्रदेश की राजनीतिक मर्यादाओं पर सीधा प्रहार है — मुकेश नायक

मुख्यमंत्री का बयान किसान, लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक मर्यादाओं का अपमान : मुकेश नायक

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष  जीतू पटवारी के संबंध में सार्वजनिक मंच से की गई अमर्यादित टिप्पणी न केवल एक विपक्षी नेता का अपमान है, बल्कि यह किसानों, लोकतांत्रिक मूल्यों और मध्य प्रदेश की स्वस्थ राजनीतिक परंपराओं का भी अपमान है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष  मुकेश नायक ने कहा कि श्री जीतू पटवारी एक किसान परिवार से आते हैं। वे उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसे देश "अन्नदाता" कहकर सम्मान देता है। भारतीय संस्कृति में किसान का मूल्य कौड़ी, पैसे या धन से नहीं आंका जाता। जिस किसान के परिश्रम से देश का पेट भरता है, उसके पुत्र के लिए इस प्रकार की भाषा का प्रयोग वास्तव में किसान समाज के सम्मान पर सीधा आघात है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसकी कीमत लगाकर नहीं किया जाता। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं की भाषा से ऐसा प्रतीत होने लगा है मानो राजनीति में व्यक्तियों का मूल्य भी अब कौड़ियों और पैसों में तय किया जाएगा। सत्ता और संसाधनों के अहंकार ने भाजपा नेतृत्व को यह भ्रम दे दिया है कि लोकतंत्र में भी इंसानों की कीमत लगाई जा सकती है। कांग्रेस इस सोच का स्पष्ट और दृढ़ विरोध करती है।

 मुकेश नायक ने कहा कि चुनावी हार-जीत किसी भी नेता की योग्यता, संघर्ष और जनस्वीकार्यता का अंतिम पैमाना नहीं हो सकती। यदि यही कसौटी मानी जाए तो भाजपा को भी अपने अनेक वरिष्ठ नेताओं के राजनीतिक योगदान पर प्रश्न उठाने पड़ेंगे। क्या पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी चुनाव नहीं हारे? क्या लालकृष्ण आडवाणी चुनाव नहीं हारे? भारतीय राजनीति में अनेक ऐसे उदाहरण हैं जहाँ नेताओं ने चुनावी पराजय का सामना किया, लेकिन बाद में जनता के बीच और अधिक सम्मान तथा स्वीकार्यता प्राप्त की।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा के अनेक मुख्यमंत्री रहे हैं। सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी, बाबूलाल गौर जैसे वरिष्ठ नेताओं ने वर्षों तक सार्वजनिक जीवन में राजनीति की, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए इस प्रकार की अवमाननापूर्ण भाषा का प्रयोग नहीं किया। राजनीतिक मतभेद और वैचारिक संघर्ष लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और अवमानना कभी भी मध्य प्रदेश की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा नहीं रहे।

 जीतू पटवारी विधायक रहे हैं, प्रदेश सरकार में मंत्री रहे हैं, युवक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं और वर्तमान में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में प्रदेशभर में संघर्ष कर रहे हैं। किसानों, युवाओं, बेरोजगारों, महिलाओं और वंचित वर्गों की आवाज बनकर वे लगातार भाजपा सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। संभवतः इन्हीं सवालों का उत्तर न होने के कारण मुख्यमंत्री व्यक्तिगत टिप्पणियों का सहारा ले रहे हैं।

 नायक ने कहा कि मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि प्रदेश की जनता ने उन्हें विपक्षी नेताओं को अपमानित करने के लिए चुना है या किसानों की समस्याएँ दूर करने, युवाओं को रोजगार देने, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रदेश के विकास के लिए चुना है।

उन्होंने मुख्यमंत्री को आगाह करते हुए कहा कि राजनीति में हार और जीत दोनों स्थायी नहीं होतीं। मुख्यमंत्री जी बार-बार चुनावी जीत और हार का उल्लेख कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह भी स्मरण रखना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता अंतिम निर्णायक होती है। निकट भविष्य में उन्हें भी हार का स्वाद चखना पड़ सकता है। इसलिए सत्ता के अहंकार में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को भूलना किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए उचित नहीं है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस मानती है कि लोकतंत्र में असहमति का उत्तर तर्क और संवाद से दिया जाता है, अपमान और अवमानना से नहीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह बयान नैतिक और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से अनुचित है। यदि उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों, सार्वजनिक जीवन की गरिमा और किसान समाज के प्रति सम्मान शेष है, तो उन्हें अपने इस अमर्यादित वक्तव्य के लिए प्रदेश की जनता, किसान समाज तथा श्री जीतू पटवारी से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए।

सत्ता का अहंकार क्षणिक होता है, लेकिन जनता का सम्मान और लोकतांत्रिक मर्यादाएँ स्थायी होती हैं। मुख्यमंत्री को अपने शब्दों पर पुनर्विचार करते हुए सार्वजनिक जीवन की गरिमा के अनुरूप आचरण करना चाहिए।