मोहन कैबिनेट के अहम फैसले,MP में 'समाज कल्याण बोर्ड' खत्म होगा! नर्मदा घाटी के विस्थापितों की 'फ्री रजिस्ट्री

मोहन कैबिनेट बैठक में आदिवासी परिवारों और किसानों के हित में बड़े फैसले लिए गए हैं। सरदार सरोवर से प्रभावित परिवारों की रजिस्ट्री मुफ्त होगी और दो नई सिंचाई परियोजनाओं से हजारों किसानों को लाभ मिलेगा।

मोहन कैबिनेट के अहम फैसले,MP में 'समाज कल्याण बोर्ड' खत्म होगा! नर्मदा घाटी के विस्थापितों की 'फ्री रजिस्ट्री

कैबिनेट की बैठक में मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग कर कर्मचारियों का संविलयन महिला बाल विकास विभाग में करने का प्रस्ताव रखा गया था। इस पर चर्चा के स्वीकृति प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य मंत्रि-परिषद की बैठक में आदिवासी कल्याण, किसानों और सुशासन से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट ने सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित 25,602 आदिवासी परिवारों को बड़ी राहत देते हुए उनके पट्टों की रजिस्ट्री पूरी तरह नि:शुल्क कराने का निर्णय लिया है। इस फैसले से प्रदेश सरकार पर करीब 600 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा, जिसे सरकार स्वयं वहन करेगी। इस निर्णय से धार, बड़वानी और अलीराजपुर जिलों के आदिवासी परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। खास बात यह है कि इससे आठ विधानसभा क्षेत्रों के लोग लाभान्वित होंगे। 

किसानों को राहत: दो बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी 

कैबिनेट बैठक में किसानों के हित में दो महत्वपूर्ण उदवहन सिंचाई परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी गई। बाणसागर परियोजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश अभी केवल 60 से 65 प्रतिशत जल उपयोग कर पा रहा है, जबकि 250 एमसीएम पानी का उपयोग बाकी है। इसी उपयोग को बढ़ाने के लिए इन परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जाएगा। पहली परियोजना धनवाही सूक्ष्म सिंचाई परियोजना है, जिसकी लागत 53.73 करोड़ रुपये है। इससे 3,500 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई होगी और 2,810 किसानों को लाभ मिलेगा। दूसरी परियोजना बरही सूक्ष्म उदवहन सिंचाई परियोजना है, जो कटनी जिले की बरही और विजयराघवगढ़ तहसील में लागू होगी। इस परियोजना पर 566.92 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिससे 20 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और 11,500 किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। दोनों ही परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण नहीं होगा और लिफ्ट प्रेशर पाइप के जरिए पानी पहुंचाया जाएगा।

राज्य समाज कल्याण मंडल भंग

कैबिनेट ने विभिन्न विभागों की योजनाओं और व्यवस्थाओं को अगले चार वर्षों तक निरंतर जारी रखने का भी निर्णय लिया है। इसके अलावा राज्य समाज कल्याण मंडल को भंग कर उसके कर्मचारियों को संविलियन करने का फैसला लिया गया है। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को सरल बनाना और प्रदेश में सुशासन को मजबूत करना है।

भावान्तर योजना में किसानों को बड़ी राहत

मंत्री कश्यप के अनुसार, अब तक 7 लाख 10 हजार से अधिक किसानों को 1500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का वितरण किया जा चुका है. इसके अलावा राज्य सरकार ने अलग से जानकारी दी कि पिछले चक्र में 7 लाख किसानों को कुल 15 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है और यह राशि किसानों तक दो महीने के भीतर पहुंचाई गई.

महाकाल लोक की तर्ज पर ‘पशुपतिनाथ लोक' का लोकार्पण

बैठक में बताया गया कि महाकाल लोक की तर्ज पर पशुपतिनाथ लोक का लोकार्पण भी किया गया है. वहीं 30 जनवरी को आयोजित पुष्प महोत्सव में 40 हजार किसानों ने हिस्सा लिया और यह आयोजन लगभग 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सक्रिय कृषि कार्यों से जुड़ा हुआ था.

मालवा, महाकौशल, ग्वालियर-चंबल क्षेत्रों पर विशेष जोर

सरकार का कहना है कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों विशेषकर मालवा, महाकौशल और ग्वालियर-चंबल में विकास के प्रयास लगातार जारी हैं. कैबिनेट ने सरदार सरोवर परियोजना के कारण पिछले 25 वर्षों से रजिस्ट्री से वंचित आदिवासी परिवारों के लिए बड़ा फैसला लिया है.