721 साल बाद शुक्रवार को धार भोजशाला में महाआरती, हाईकोर्ट फैसले के बाद ऐतिहासिक आयोजन; सुरक्षा छावनी में बदला शहर

हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से मिले 365 दिन निर्बाध पूजा-अर्चना के अधिकार के बाद पहले शुक्रवार को भोजशाला में मां वाग्देवी की महाआरती और विशेष पूजन की तैयारी है।

721 साल बाद शुक्रवार को धार भोजशाला में महाआरती, हाईकोर्ट फैसले के बाद ऐतिहासिक आयोजन; सुरक्षा छावनी में बदला शहर

इंदौर हाईकोर्ट के फैसले के बाद धार भोजशाला में सात शताब्दी बाद होगी वाग्देवी महाआरती. भोज उत्सव समिति का दावा 721 साल बाद हो रही यह आरती.

धार में हाई अलर्ट, शहरभर में निकला फ्लैग मार्च

धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के फैसले के बाद पहला शुक्रवार विशेष महत्व का माना जा रहा है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए हैं। शुक्रवार को संभावित धार्मिक आयोजन और भीड़ को देखते हुए पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च निकालकर शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने का संदेश दिया।

फ्लैग मार्च में कलेक्टर राजीव रंजन मीना, पुलिस अधिकारियों सहित प्रशासनिक अमला शामिल रहा। यह मार्च पुलिस कंट्रोल रूम से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरा। इस दौरान सुरक्षा बलों की बड़ी मौजूदगी देखने को मिली और पूरे शहर में सतर्कता बढ़ा दी गई।

भोज उत्सव समिति ने किया महाआरती का ऐलान

भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने भोजशाला परिसर में हिंदू समाज की ओर से महाआरती और धार्मिक आयोजन की घोषणा की थी। समिति का कहना है कि लगभग 721 वर्षों बाद ऐसा शुक्रवार आया है, जिसे धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ऐतिहासिक माना जा रहा है।

समिति ने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा अवसर है। आयोजकों ने मातृशक्ति, युवाओं और आम नागरिकों से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस अवसर का साक्षी बनने की अपील की है।

2003 की व्यवस्था और विवाद का इतिहास

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वर्ष 2003 के आदेश के अनुसार भोजशाला परिसर में मंगलवार और बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदू समाज को पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाती रही है, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करता रहा है।

विवाद उस समय अधिक बढ़ता था जब बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ जाते थे। ऐसे अवसरों पर प्रशासन को विशेष व्यवस्था करनी पड़ती थी। अब हाईकोर्ट के निर्णय के बाद पहली बार शुक्रवार को होने वाले आयोजन को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदला परिदृश्य

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला विवाद पर अपने फैसले में परिसर को वाग्देवी मंदिर से जुड़ी संरचना माना था। न्यायालय ने अपने निर्णय में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट, पुरातात्विक साक्ष्यों और ऐतिहासिक दस्तावेजों को महत्वपूर्ण आधार माना।

रिपोर्ट में परिसर के स्तंभों, हिंदू प्रतीकों और संस्कृत अभिलेखों का उल्लेख किया गया था। कोर्ट ने यह भी माना कि परिसर में हिंदू पक्ष की पूजा परंपरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी। वर्तमान में भोजशाला परिसर एएसआई के संरक्षण में है।

प्रशासन की एडवाइजरी: जुलूस की अनुमति नहीं

संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सोशल मीडिया के माध्यम से एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार के जुलूस या बिना अनुमति कार्यक्रम की स्वीकृति नहीं दी गई है।

कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का पूर्ण पालन सुनिश्चित कराया जाएगा और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता होगी। उन्होंने लोगों से संयम और शांति बनाए रखने की अपील भी की।

1500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात, ड्रोन से निगरानी

शुक्रवार के आयोजन को देखते हुए धार शहर को लगभग सुरक्षा छावनी में बदल दिया गया है। पूरे शहर और भोजशाला परिसर में 1500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी निगरानी और विशेष कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल लगाया गया है, जबकि सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जा रही है।

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ, आपत्तिजनक या अफवाह फैलाने वाले संदेशों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शांति और सौहार्द बनाए रखने पर जोर

स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। प्रशासन का कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

भोजशाला को लेकर होने वाला यह आयोजन ऐतिहासिक और संवेदनशील दोनों माना जा रहा है। ऐसे में प्रशासन, आयोजकों और आम नागरिकों की भूमिका शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण होगी।

ऐतिहासिक आयोजन पर पूरे प्रदेश की नजर

हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में होने वाला यह पहला बड़ा सामूहिक आयोजन होने के कारण पूरे प्रदेश की नजर धार पर टिकी हुई है। धार्मिक महत्व, ऐतिहासिक संदर्भ और सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुक्रवार का दिन प्रशासन और नागरिकों दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।

स्थिति को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है ताकि आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।