मोहन सरकार के मंत्रियों की होगी ‘अग्नि परीक्षा-परफॉर्मेंस पर दो दिन मंथन, सीएम यादव और भाजपा संगठन करेंगे वन-टू-वन समीक्षा

डॉ. मोहन यादव और भाजपा संगठन के वरिष्ठ नेता आज से दो दिन तक मंत्रियों के कामकाज और राजनीतिक गतिविधियों की समीक्षा करेंगे। बैठक में 2023 में हारी सीटों, संगठन समन्वय और सरकार की योजनाओं पर फीडबैक लिया जाएगा।

मोहन सरकार के मंत्रियों की होगी ‘अग्नि परीक्षा-परफॉर्मेंस पर दो दिन मंथन, सीएम  यादव और भाजपा संगठन करेंगे वन-टू-वन समीक्षा

मध्यप्रदेश की सीएम डॉ. मोहन यादव और भाजपा संगठन के वरिष्ठ नेता आज से दो दिन तक मंत्रियों के कामकाज और राजनीतिक गतिविधियों की समीक्षा करेंगे।

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भाजपा संगठन और मोहन सरकार अब मंत्रियों की कार्यशैली, राजनीतिक सक्रियता और विभागीय प्रदर्शन की गहन समीक्षा करने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में रविवार से शुरू हो रही दो दिवसीय बैठक को सरकार और संगठन दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इस बैठक में मंत्रियों की वन-टू-वन समीक्षा होगी और उनके कामकाज का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा।

बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी शामिल रहेंगे। सूत्रों के मुताबिक यह पहली बार होगा जब मुख्यमंत्री और संगठन के शीर्ष नेता मंत्रियों से अलग-अलग बैठकर राजनीतिक और प्रशासनिक विषयों पर इतनी विस्तृत चर्चा करेंगे।

11 प्रमुख बिंदुओं पर होगी समीक्षा

जानकारी के अनुसार, मंत्रियों से करीब 11 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर फीडबैक लिया जाएगा। इसमें उनके गृह जिलों और प्रभार वाले जिलों की राजनीतिक स्थिति, संगठन के साथ समन्वय, योजनाओं की जमीनी प्रगति और विभागीय कार्यों की समीक्षा प्रमुख रूप से शामिल रहेगी। खासतौर पर उन विधानसभा सीटों पर चर्चा होगी जहां भाजपा को 2023 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी अब इन सीटों पर रणनीतिक तैयारी में जुट गई है।

बैठक में यह भी जाना जाएगा कि मंत्री अपने जिलों में संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ कितना तालमेल बनाकर काम कर रहे हैं। भाजपा नेतृत्व को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ मंत्री जिला स्तर के नेताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहे हैं। ऐसे मामलों में संगठन सीधे मंत्रियों से जवाब मांगेगा।

नगरीय निकाय चुनावों पर फोकस

अगले वर्ष होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए भाजपा अभी से तैयारी में जुट गई है। संगठन यह जानना चाहता है कि स्थानीय स्तर पर मंत्रियों की सक्रियता कैसी है और वे संगठन को कितना मजबूत कर पा रहे हैं। बैठक में स्थानीय नेताओं और मंत्रियों के बीच तालमेल की स्थिति पर भी विशेष चर्चा होगी।

इसके अलावा मंत्रियों से पूछा जाएगा कि उन्होंने अपने विभागों में अधिकारियों की कार्यप्रणाली सुधारने के लिए क्या कदम उठाए हैं। विभिन्न समितियों के गठन, गैर-सरकारी नियुक्तियों और निगम-मंडलों में समन्वय जैसे विषय भी समीक्षा के दायरे में रहेंगे।

संकल्प पत्र और योजनाओं पर रिपोर्ट

भाजपा सरकार अपने चुनावी संकल्प पत्र को लेकर भी गंभीर दिखाई दे रही है। बैठक में मंत्रियों से पूछा जाएगा कि संकल्प पत्र में किए गए वादों में से अब तक कितने बिंदुओं पर काम हुआ है और कितने लंबित हैं। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी मांगी जाएगी।

मंत्रियों को यह बताना होगा कि उनके विभाग से जुड़ी परियोजनाओं में कितनी प्रगति हुई है और यदि काम अपेक्षा के अनुसार नहीं हुआ तो इसके पीछे क्या कारण रहे। साथ ही समस्याओं के समाधान और आगामी रोडमैप पर भी चर्चा होगी।

विवादों में रहे मंत्रियों से भी पूछे जाएंगे सवाल

सूत्रों के मुताबिक हाल के समय में विवादों में आए कुछ मंत्रियों से भी संगठन उनका पक्ष जान सकता है। भाजपा नेतृत्व यह समझना चाहता है कि विवादों में मंत्रियों की वास्तविक भूमिका क्या रही और किन परिस्थितियों में उनके नाम सामने आए। माना जा रहा है कि संगठन फैसले लेने से पहले संबंधित मंत्रियों का पक्ष भी सुनेगा।

मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़ी जा रही समीक्षा

राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हाल ही में निगम-मंडलों में नियुक्तियों के बाद अब सबकी निगाहें मंत्रिमंडल विस्तार पर टिक गई हैं। ऐसे में मंत्रियों की यह परफॉर्मेंस समीक्षा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बताया जा रहा है कि बैठक के बाद सभी मंत्रियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को दिल्ली भेजी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में मंत्रिमंडल में बदलाव, नए चेहरों की एंट्री और कुछ मंत्रियों की छुट्टी जैसे फैसले लिए जा सकते हैं।

सरकार और संगठन के समन्वय की बड़ी कवायद

भाजपा इस पूरी कवायद को सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम मान रही है। पार्टी चाहती है कि सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचे और संगठन के कार्यकर्ता भी सरकार के साथ मजबूती से जुड़े रहें।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक केवल समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले चुनावों और संगठनात्मक रणनीति की दिशा भी तय करेगी। ऐसे में अगले दो दिन मोहन सरकार और भाजपा संगठन दोनों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।