शंकराचार्य से माफी मांगेगा प्रयागराज प्रशासन,दो शर्तों पर माघी पूर्णिमा स्नान संभव :शिष्य ने कहा- लखनऊ के 2 बड़े अधिकारी संगम स्नान कराएंगे

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद में प्रयागराज प्रशासन अब माफी मांगने को तैयार दिख रहा है। माघ मेला छोड़कर वाराणसी जाने के बाद हालात बदले। संगम स्नान और प्रोटोकॉल को लेकर दो शर्तों पर बातचीत आगे बढ़ रही है।

शंकराचार्य से माफी मांगेगा प्रयागराज प्रशासन,दो शर्तों पर माघी पूर्णिमा स्नान संभव :शिष्य ने कहा- लखनऊ के 2 बड़े अधिकारी संगम स्नान कराएंगे

अब शासन-प्रशासन शंकारचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मनाने में लग गया है. सूत्रों के मुताबिक, प्रयागराज जिाल प्रशासन शंकराचार्य से माफी मांगने को तैयार हो गया है.

माघ मेले में इस बार बड़ा धार्मिक‑प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से प्रयागराज प्रशासन अब माफी मांगने को तैयार है. यह जानकारी शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने दी है. उनके मुताबिक, स्थिति वहां से बिगड़ी जब शंकराचार्य ने अचानक माघ मेला छोड़कर वाराणसी लौटने का फैसला कर लिया. ऐसी संभावना प्रशासन ने बिल्कुल नहीं जताई थी.

योगीराज सरकार ने बताया, 'शासन के कुछ अधिकारी वाराणसी आएंगे। शंकराचार्य को लेकर प्रयागराज ले जाएंगे। उन्हें माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान कराएंगे।'

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में कंप्यूटर बाबा मौनी अमावस्या से उनके साथ हैं। मौनी अमावस्या पर ही प्रशासन और शंकराचार्य के शिष्यों के बीच टकराव हुआ था। शंकराचार्य के साथ वाराणसी में बैठक कर आगे की रणनीति तय कर ली गई है।

अचानक माफी मांगने को क्यों तैयार हुआ प्रशासन

प्रयागराज के अफसरों को भरोसा था कि शंकराचार्य माघ पूर्णिमा (1 फरवरी) के स्नान तक मेले में रहेंगे. उनका मानना था कि तब तक वे शंकराचार्य को मना लेंगे. लेकिन 28 जनवरी को शंकराचार्य का अचानक वाराणसी लौट जाना प्रशासन के लिए बड़ा झटका साबित हुआ.

शंकराचार्य के वाराणसी पहुंचने के बाद लखनऊ के दो वरिष्ठ अधिकारी उनसे संपर्क में आए और आग्रह किया कि उन्हें पूर्णिमा के दिन ससम्मान प्रयागराज लाकर स्नान करवाया जाएगा. लेकिन शंकराचार्य ने इसके लिए दो स्पष्ट शर्तें रखीं-

जिम्मेदार अधिकारी लिखित में माफी मांगें.

चारों शंकराचार्यों के लिए माघ मेला, कुंभ और महाकुंभ में प्रोटोकॉल तय कर घोषित किया जाएं.

शंकराचार्य की प्रेस कांफ्रेंस आज

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आज सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं, जिसमें यह साफ हो सकता है कि वे काशी में स्नान कर अपना विरोध जारी रखेंगे या प्रशासन के अनुरोध पर प्रयाग लौटकर संगम स्नान करेंगे.

शंकराचार्य का कहना है कि उनकी स्नान की योजना फिलहाल काशी में ही है. हालांकि प्रशासन लगातार उनसे अनुरोध कर रहा है कि वे प्रयाग लौटकर स्नान करें, लेकिन शर्तें पूरी होने पर ही यह संभव है.

हालिया विवाद की जड़ क्या है?

शंकराचार्य पक्ष का कहना है कि 27 जनवरी को प्रशासन ने उनसे संपर्क किया था. शंकराचार्य ने बताया कि उन्होंने माफी मांगने की बात कही थी, लेकिन पहले प्रशासन ने माफी से इनकार किया, फिर उनके अनुरोध पर लिखित खेद भी व्यक्त नहीं किया गया. इससे आहत होकर शंकराचार्य ने माघ मेला क्षेत्र छोड़ने का निर्णय लिया. 

अब बदल रहा है प्रशासन का रुख

वाराणसी लौटने के बाद स्थिति उलट गई और अब प्रयागराज प्रशासन शंकराचार्य से माफी मांगने को तैयार है, ताकि विवाद खत्म हो और माघ पूर्णिमा पर उनकी पारंपरिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके.

अधिकारियों ने कहा- माफी नहीं, हम खेद प्रकट करेंगे

योगीराज ने बताया- मेला प्रशासन की ओर से यह स्वीकार किया गया कि उनसे गलती हुई है। उन्होंने इसके पीछे भीड़ कंट्रोल करने का हवाला दिया। इन स्थितियों में शंकराचार्य स्नान नहीं कर सके।

अधिकारियों ने कहा- हमें इसका खेद हैं। तब महंत श्रीधरानंद ने कहा- शंकराचार्य चाहते हैं कि आप माफी मांगें। इसे लेकर अधिकारियों ने कहा कि हम सार्वजनिक माफी नहीं मांग सकते। मगर हम खेद जता सकते हैं।

अधिकारियों ने कहा- आप जब चाहे स्नान कर लें, हम पूरी व्यवस्थाएं करेंगे। अब इस मामले पर विराम लगना चाहिए।

योगीराज ने कहा- जब अधिकारियों से यही बातें लिखकर देने के लिए कहीं गईं, तो उन्होंने कहा कि ये नहीं हो सकेगा। अब आपके सामने हैं, सारी बातें कह रहे हैं, खेद जता रहे हैं। इसके बाद महंत अड़ गए कि बिना लिखित सहमति के शंकराचार्य क्यों आपको माफ करेंगे।

शिष्य कहते हैं- हमारी तरफ से महंत ने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन संगम नोज पर जो कुछ हुआ, वो सिर्फ माफी मांगने योग्य ही है, लेकिन प्रशासन खेद शब्द तक सीमित रखना चाहता था। इसलिए देर रात तक सहमति नहीं बन सकी।