राज्यसभा चुनाव में बढ़ा सस्पेंस: तीसरा उम्मीदवार उतार सकती है भाजपा, विधायकों को भोपाल में रोकने की रणनीति
मध्यप्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर भाजपा के भीतर सस्पेंस बरकरार है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने तीसरे उम्मीदवार की संभावना से इनकार किया है, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के एक बयान ने राजनीतिक अटकलों को फिर हवा दे दी है। वहीं, पार्टी की बैठक में विधायकों को सोमवार तक भोपाल में ही रहने के निर्देश दिए गए है।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा फिलहाल सभी विकल्पों पर विचार कर रही है और अंतिम फैसला नामांकन की अंतिम तिथि के आसपास लिया जा सकता है। ऐसे में 8 जून तक तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर सस्पेंस बने रहने की पूरी संभावना है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा की तीन सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून निर्धारित है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार संभावित उम्मीदवारों के तौर पर दो नेताओं के दस्तावेज तैयार कर लिए गए हैं। वहीं शनिवार रात मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में सभी विधायकों को 8 जून तक भोपाल में ही रहने के निर्देश दिए गए हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नामांकन के अंतिम दिन तक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसी संभावना को देखते हुए भाजपा कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं दिखाई दे रही है।
तीसरी सीट पर भाजपा की नजर
सूत्रों के मुताबिक भाजपा पूर्व विधायक जीतू जिराती और विनोद गोटिया में से किसी एक को तीसरी सीट के लिए मैदान में उतार सकती है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। भाजपा पहले ही अपने दो अधिकृत उम्मीदवारों तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल का नामांकन दाखिल करा चुकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तीसरे उम्मीदवार का चुनाव मैदान में उतरना सीधे तौर पर कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के लिए चुनौती बन सकता है। यदि भाजपा तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारती है तो चुनाव दिलचस्प होने के साथ-साथ क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं पर भी सबकी नजर रहेगी।
भाजपा विधायक दल की अहम बैठक
शनिवार रात मुख्यमंत्री निवास में भाजपा विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, दोनों उपमुख्यमंत्री, प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह, संगठन महामंत्री अजय जामवाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बैठक में राज्यसभा चुनाव की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। सभी विधायकों को निर्देश दिए गए कि वे 8 जून तक भोपाल में ही रहें और पार्टी के संपर्क में बने रहें। पार्टी नेतृत्व ने विधायकों से एकजुटता बनाए रखने और चुनावी प्रक्रिया के दौरान अनुशासन का पालन करने की अपील की।
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में संख्या बल महत्वपूर्ण होता है और किसी भी प्रकार की अनुपस्थिति या असावधानी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से पार्टी ने अपने सभी विधायकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
बाबू जंडेल के बयान से गरमाई राजनीति
राज्यसभा चुनाव के बीच कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल के बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। विधायक दल की बैठक के बाद उन्होंने भाजपा को खुली चुनौती देते हुए कहा कि कांग्रेस पूरी तरह तैयार है और ग्वालियर-चंबल संभाग के सभी विधायक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन निश्चित रूप से जीत हासिल करेंगी। बाबू जंडेल ने यह भी कहा कि जो विधायक पार्टी से गद्दारी करेगा, उसे जनता कभी माफ नहीं करेगी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
तीसरी सीट का पूरा गणित
राज्यसभा चुनाव में जीत का गणित बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान में प्रभावी विधायकों की संख्या 228 है। राज्यसभा की तीन सीटों के लिए जीत का आंकड़ा 58 वोट निर्धारित किया गया है।
विधानसभा की स्थिति
प्रभावी विधायक: 228
एक सीट जीतने के लिए आवश्यक वोट: 58
भाजपा विधायक: 164
कांग्रेस विधायक: 64
बीएपी विधायक: 1
विजयपुर विधायक मतदान में भाग नहीं लेंगे
भाजपा के पास क्या है गणित?
भाजपा को दो सीटें जीतने के लिए कुल 116 वोटों की आवश्यकता होगी। उसके पास 164 विधायक हैं।
दो सीटों के लिए आवश्यक वोट: 116
भाजपा के कुल वोट: 164
बचने वाले वोट: 48
तीसरी सीट जीतने के लिए 58 वोट चाहिए होंगे। ऐसे में भाजपा के पास उपलब्ध 48 वोटों के अलावा कम से कम 10 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता पड़ेगी।
यानी भाजपा को तीसरी सीट जीतने के लिए विपक्षी खेमे से समर्थन या फिर कम से कम 10 विधायकों की क्रॉस वोटिंग की जरूरत होगी।
कांग्रेस की स्थिति मजबूत बताई जा रही
कांग्रेस के पास वर्तमान में 64 विधायक हैं, हालांकि बीना विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति को लेकर अभी भी चर्चा बनी हुई है। प्रभावी रूप से कांग्रेस के पास 63 वोट माने जा रहे हैं।
यदि भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) का एक विधायक कांग्रेस का समर्थन करता है तो कांग्रेस के वोटों की संख्या 64 हो जाएगी।
कांग्रेस के प्रभावी वोट: 63
बीएपी समर्थन मिलने पर: 64
जीत के लिए जरूरी वोट: 58
अतिरिक्त वोट: 6
इस आधार पर कांग्रेस का दावा है कि उसकी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की जीत लगभग तय है।
क्रॉस वोटिंग पर टिकी निगाहें
राज्यसभा चुनाव में मतदान गोपनीय न होकर पार्टी व्हिप और अधिकृत एजेंटों की निगरानी में होता है। इसके बावजूद कई बार राजनीतिक परिस्थितियों में क्रॉस वोटिंग देखने को मिलती है।
भाजपा यदि तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो उसकी पूरी रणनीति विपक्षी खेमे में सेंध लगाने और अतिरिक्त वोट जुटाने पर आधारित होगी। वहीं कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए लगातार बैठकें कर रही है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि चुनाव के अंतिम क्षण तक दोनों दल अपने-अपने विधायकों पर नजर बनाए रखेंगे।
पटवारी का दावा- मीनाक्षी नटराजन "5 लाख परसेंट" जीतेंगी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा की रणनीति को लेकर कहा कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग की संभावना नहीं है।
बैठक के बाद उन्होंने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन "5 लाख परसेंट" राज्यसभा जाएंगी। उन्होंने दावा किया कि सभी विधायक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं और भाजपा केवल भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।
वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी कहा कि भाजपा द्वारा तीसरे उम्मीदवार की चर्चा केवल राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं और पार्टी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करेंगे।
नामांकन के अंतिम दिन पर सबकी नजर
अब राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भाजपा तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारती है या नहीं, इस पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर बनी हुई है।
यदि भाजपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो मध्य प्रदेश का राज्यसभा चुनाव केवल औपचारिक प्रक्रिया न रहकर प्रतिष्ठा की लड़ाई बन सकता है। ऐसे में आने वाले 24 घंटे प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं।
.सीएम के बयान ने अटकलें तेज
हालांकि इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का एक बयान ने फिर सियासी अटकलें तेज कर दी। शनिवार को इंदौर में औद्योगिक निवेश से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे मुख्यमंत्री से जब पत्रकारों ने तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर सवाल किया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि तीसरी सीट आएगी नहीं तो कहां जाएगी। मुख्यमंत्री के इस जवाब के बाद राजनीतिक गलियारों में नई अटकलें शुरू हो गई हैं। हालांकि भाजपा संगठन की ओर से अब तक तीसरे उम्मीदवार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल भाजपा सार्वजनिक रूप से दो सीटों पर ही फोकस करने की बात कह रही है, लेकिन मुख्यमंत्री के बयान और पार्टी की हालिया गतिविधियों ने तीसरी सीट को लेकर सस्पेंस बनाए रखा है। अब सबकी नजरें नामांकन की अंतिम तिथि और भाजपा के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस