एसडीएम रिंकू सिंह राही की पहल से प्रौढ़ शिक्षा की ओर बढ़ा छानी गांव, बुजुर्गों और बच्चों के लिए बनी नई उम्मीद
उरई के छानी खास गांव में एसडीएम रिंकू सिंह राही की प्रेरणा से प्रौढ़ शिक्षा अभियान को नई गति मिली है। गांव के युवा वॉलंटियर आदेश कुमार निःशुल्क रूप से बुजुर्गों और बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य अशिक्षित बुजुर्गों को पढ़ना-लिखना सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और बच्चों को बेहतर शिक्षा से जोड़ना है।
युवा वॉलंटियर आदेश कुमार बुजुर्गों और बच्चों को दे रहे निःशुल्क शिक्षा, गांव में बढ़ी साक्षरता और जागरूकता
उरई। शिक्षा किसी भी समाज के विकास की सबसे महत्वपूर्ण नींव होती है। जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित होता है, तभी वह अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझ पाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उपजिलाधिकारी (एसडीएम) रिंकू सिंह राही द्वारा शुरू की गई पहल अब धरातल पर सकारात्मक परिणाम देने लगी है। इसी कड़ी में जालौन जनपद के छानी खास ग्राम पंचायत में एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां गांव के शिक्षित युवा समाज सेवा की भावना के साथ आगे आकर शिक्षा का अलख जगा रहे हैं।

छानी खास गांव में युवा वॉलंटियर आदेश कुमार द्वारा बुजुर्गों और बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को साक्षर बनाना है, जो किसी कारणवश शिक्षा से वंचित रह गए थे। विशेष रूप से बुजुर्गों को पढ़ना-लिखना सिखाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि वे अपने हस्ताक्षर स्वयं कर सकें और दैनिक जीवन में आत्मनिर्भर बन सकें।
एसडीएम रिंकू सिंह राही की प्रेरणा से शुरू हुए इस अभियान का प्रभाव अब ग्रामीण जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। गांव के कई बुजुर्ग, जो पहले अंगूठा लगाकर अपने कार्यों को पूरा करते थे, अब लिखना-पढ़ना सीखने के लिए उत्साह के साथ शिक्षा केंद्र पहुंच रहे हैं। शिक्षा प्राप्त करने की उनकी लगन यह साबित कर रही है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
बच्चों को भी मिल रही बेहतर शिक्षा
प्रौढ़ शिक्षा के साथ-साथ गांव के छोटे बच्चों को भी शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आदेश कुमार नियमित रूप से समय निकालकर बच्चों को पढ़ाते हैं और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को यदि सही मार्गदर्शन और शैक्षणिक वातावरण मिले तो वे भी बड़े शहरों के विद्यार्थियों की तरह सफलता हासिल कर सकते हैं।
गांव में चल रही इस निःशुल्क पाठशाला में बच्चों को बुनियादी विषयों की शिक्षा देने के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों की भी जानकारी दी जा रही है। इससे बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ रही है और विद्यालयों में उनकी उपस्थिति भी बेहतर हो रही है।
अभिभावकों में बढ़ी जागरूकता
इस पहल का एक महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव अभिभावकों पर भी पड़ा है। पहले जहां कुछ परिवार बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता नहीं देते थे, वहीं अब वे शिक्षा के महत्व को समझने लगे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि जब उन्होंने अपने बुजुर्गों को पढ़ते-लिखते देखा तो उन्हें भी शिक्षा का महत्व समझ में आया।
अभिभावक अब अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने और उनकी पढ़ाई पर ध्यान देने लगे हैं। इससे गांव में शिक्षा का वातावरण विकसित हो रहा है और समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
युवाओं ने निभाई सामाजिक जिम्मेदारी
ग्रामीणों का मानना है कि यह बदलाव एसडीएम रिंकू सिंह राही की सकारात्मक सोच और शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिणाम है। उनकी प्रेरणा से गांव के शिक्षित युवाओं ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझा और शिक्षा अभियान से जुड़कर दूसरों के जीवन में बदलाव लाने का प्रयास शुरू किया।
आदेश कुमार जैसे युवा स्वयंसेवक इस बात का उदाहरण बन रहे हैं कि यदि शिक्षित युवा समाज के विकास में योगदान देने का संकल्प लें तो बड़े बदलाव संभव हैं। बिना किसी आर्थिक लाभ के केवल समाज सेवा की भावना से किया जा रहा उनका यह कार्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
बुजुर्गों में दिख रहा आत्मविश्वास
प्रौढ़ शिक्षा अभियान से जुड़े बुजुर्गों के चेहरे पर अब नया आत्मविश्वास दिखाई देता है। जो लोग पहले अपने नाम तक नहीं लिख पाते थे, वे अब धीरे-धीरे अक्षरों को पहचानना और हस्ताक्षर करना सीख रहे हैं। इससे उनमें आत्मसम्मान की भावना विकसित हो रही है।
बुजुर्गों का कहना है कि पढ़ना-लिखना सीखने के बाद वे सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं और अन्य आवश्यक कार्यों को अधिक आसानी से समझ पा रहे हैं। इससे उनकी निर्भरता भी कम हो रही है और वे खुद को अधिक सक्षम महसूस कर रहे हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल
छानी खास गांव में शुरू हुई यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल बनकर उभरी है। यह अभियान केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता, आत्मनिर्भरता और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा दे रहा है।
स्थानीय लोगों ने आदेश कुमार के इस नि:स्वार्थ योगदान की जमकर सराहना की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि हर गांव में ऐसे शिक्षित युवा आगे आएं तो ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर काफी बेहतर हो सकता है। इससे न केवल साक्षरता बढ़ेगी, बल्कि समाज के समग्र विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
बदलाव की कहानी लिख रहा छानी खास
आज छानी खास ग्राम पंचायत में शिक्षा की यह छोटी-सी शुरुआत बड़े बदलाव का रूप लेती दिखाई दे रही है। बुजुर्गों को साक्षर बनाने, बच्चों को बेहतर शिक्षा से जोड़ने और समाज में जागरूकता फैलाने का यह प्रयास भविष्य में और भी सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है।
एसडीएम रिंकू सिंह राही की पहल और आदेश कुमार जैसे युवा स्वयंसेवकों के समर्पण ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर कार्य करें तो शिक्षा का प्रकाश गांव-गांव तक पहुंचाया जा सकता है। छानी खास की यह कहानी न केवल जालौन बल्कि अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है, जहां शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की नई इबारत लिखी जा रही है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस