SDOP पूजा पांडे को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत: 2 साल के बच्चे के आधार पर राहत, सिवनी हवाला लूटकांड में थीं मुख्य आरोपी

मध्यप्रदेश के चर्चित सिवनी के 3 करोड़ हवाला डकैती कांड में मुख्य आरोपी और निलंबित SDOP पूजा पाण्डेय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने महिला होने और छोटे बच्चे के साथ जेल में रहने के आधार पर उन्हें नियमित जमानत दे दी...

SDOP पूजा पांडे को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत: 2 साल के बच्चे के आधार पर राहत, सिवनी हवाला लूटकांड में थीं मुख्य आरोपी

सिवनी जिले में हुए हवाला कांड में गिरफ्तार एसडीओपी पूजा पांडे को जमानत मिल गई है। बच्चे का हवाला देने पर पूजा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है।

सिवनी। मध्य प्रदेश के चर्चित सिवनी हवाला लूटकांड में निलंबित एसडीओपी पूजा पांडे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हवाला राशि की कथित हेराफेरी और पुलिस भ्रष्टाचार से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत प्रदान कर दी। जमानत की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने रखा गया कि पूजा पांडे के साथ उनका दो वर्षीय बच्चा भी है। इसी मानवीय आधार को देखते हुए अदालत ने उन्हें राहत दी।

यह मामला अक्टूबर 2025 में सामने आया था और उस समय पूरे प्रदेश में इसने व्यापक चर्चा पैदा की थी। आरोप था कि हवाला कारोबार से जुड़ी करीब 3 करोड़ रुपए की राशि जब्त की गई थी, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल 1.45 करोड़ रुपए ही दर्शाए गए। शेष राशि के कथित गबन और पुलिस टीम की संलिप्तता के आरोपों ने पूरे घटनाक्रम को बड़े पुलिस घोटाले का रूप दे दिया था।

कैसे सामने आया था हवाला कांड

घटना की शुरुआत उस समय हुई जब सिवनी पुलिस को सूचना मिली कि कटनी से नागपुर की ओर जा रही एक क्रेटा कार में बड़ी मात्रा में हवाला की नकदी ले जाई जा रही है। सूचना के आधार पर तत्कालीन एसडीओपी पूजा पांडे और उनकी टीम ने नागपुर रोड स्थित खैरीटेक क्षेत्र के पास वाहन को रोका और तलाशी ली।

पुलिस कार्रवाई में कार से करीब 3 करोड़ रुपए नकद मिलने की बात सामने आई। शुरुआती स्तर पर इसे बड़ी सफलता माना गया, लेकिन कुछ ही समय बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया। आरोप लगे कि पूरी राशि सरकारी रिकॉर्ड में जमा नहीं की गई और जब्त रकम का हिस्सा पुलिस कर्मियों के बीच बांट लिया गया।

बताया गया कि हवाला कारोबारियों को कथित रूप से धमकाकर मौके से भगा दिया गया और बाद में दर्ज दस्तावेजों में वास्तविक राशि से कम रकम दिखाई गई। 9 अक्टूबर 2025 को दर्ज एफआईआर में केवल 1.45 करोड़ रुपए की जब्ती दर्ज होने के बाद पूरे मामले पर सवाल उठने लगे।

पुलिस विभाग में मचा था हड़कंप

मामले के उजागर होते ही पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई थी। आरोप सीधे पुलिस अधिकारियों और जवानों पर लगे थे, इसलिए प्रकरण ने गंभीर रूप ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई और जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया।

जांच की जिम्मेदारी आईजी जबलपुर प्रमोद वर्मा द्वारा गठित एसआईटी को सौंपी गई। जांच टीम ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की परतें खोलने का प्रयास किया।

एसआईटी जांच में जुटाए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूत

एसआईटी जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सामने आए। जांच एजेंसी ने मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग लेनदेन और अन्य डिजिटल प्रमाण जुटाए।

सूत्रों के अनुसार, कई पुलिस कर्मियों की गतिविधियां और लोकेशन रिकॉर्ड जांच के दौरान महत्वपूर्ण साबित हुए। पूछताछ में भी कई नए नाम सामने आए, जिसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और कई स्तरों पर कार्रवाई शुरू हुई।

जांच एजेंसियों का दावा था कि यह पूरी कार्रवाई सुनियोजित तरीके से की गई थी और रकम के वितरण को लेकर भी कई संकेत मिले थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग में व्यापक प्रशासनिक कार्रवाई की गई और कई अधिकारियों को निलंबित किया गया।

मुख्य आरोपी के रूप में सामने आईं पूजा पांडे

जांच के दौरान तत्कालीन एसडीओपी पूजा पांडे को मुख्य आरोपी माना गया। उनके अलावा कई पुलिस अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के दायरे में आए।

गिरफ्तार किए गए लोगों में बंडोल थाना प्रभारी अर्पित भैरम, प्रधान आरक्षक माखन इनवाती, आरक्षक नीरज राजपूत, जगदीश यादव, योगेंद्र चौरसिया, केदार बघेल, सुभाष सदाफल, रविंद्र उईके, रितेश वर्मा, राजेश जंघेला समेत अन्य शामिल रहे।

इसके अलावा डीएसपी बालाघाट पंकज मिश्रा, आरक्षक प्रमोद सोनी, पंजू गिरी गोस्वामी और वीरेंद्र दीक्षित को भी गिरफ्तार किया गया था।

इन गिरफ्तारियों के बाद मामला केवल आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े होने लगे।

हाईकोर्ट से कुछ आरोपियों को मिली राहत

मामले में अप्रैल 2026 में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डीएसपी पंकज मिश्रा और आरक्षक प्रमोद सोनी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और आपराधिक कार्रवाई को निरस्त कर दिया।

अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रस्तुत सामग्री के आधार पर उनके खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य नहीं पाए गए। इसके बाद दोनों को बड़ी राहत मिली और उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई समाप्त कर दी गई।

इस फैसले ने मामले की जांच और आरोपों की दिशा को लेकर भी नई चर्चा शुरू कर दी थी।

दो साल के बच्चे का आधार बना जमानत का कारण

अब इस मामले में मुख्य आरोपी पूजा पांडे को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुनवाई के दौरान उनकी ओर से यह पक्ष रखा गया कि उनके साथ दो वर्ष का बच्चा भी है और मातृत्व से जुड़ी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

इसी आधार पर सर्वोच्च अदालत ने उन्हें जमानत प्रदान की। हालांकि, मामले की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी तथा जमानत का अर्थ आरोपों से पूर्ण मुक्ति नहीं माना जाएगा।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अदालतें कई मामलों में महिला आरोपियों और छोटे बच्चों की परिस्थितियों को मानवीय आधार पर विचार में लेती रही हैं। इसी सिद्धांत के तहत यह राहत दी गई मानी जा रही है।

पूरे प्रदेश में बना था चर्चा का विषय

सिवनी हवाला प्रकरण मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में गिना गया। वजह यह थी कि इसमें आरोप सीधे कानून लागू करने वाली एजेंसी पर लगे थे। बड़ी नकद राशि, हवाला नेटवर्क, पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी और एसआईटी जांच ने इसे हाई-प्रोफाइल मामला बना दिया।

मामले के सामने आने के बाद विपक्ष ने भी कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए थे। वहीं विभागीय स्तर पर भी कई समीक्षा बैठकों और जांच प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया गया।

अब पूजा पांडे को मिली जमानत के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आने वाले समय में अदालत की आगे की कार्यवाही और जांच से जुड़े निष्कर्ष इस बहुचर्चित प्रकरण की दिशा तय करेंगे।