भाजपा नेता को रोकना पुलिस को पड़ा भारी: महू नाका विवाद के बाद दो पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज, टीआई लाइन अटैच, सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने किया था चक्काजाम

भाजपा नेता वीरेंद्र शेंडगे ने अपनी सफाई में कहा कि चौराहे पर सुबह से वाहनों को चैकिंग के नाम से रोका जाता है। यहां वाहनों की भीड़ लगी रहती है। कई लोगों को दफ्तर और संस्थानों में जाने में देर हो जाती है। ऐसे में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। शेंडगे ने बताया कि लोग उनके पास कई बार अनावश्यक जांच की शिकायत कर चुके हैं।

भाजपा नेता को रोकना पुलिस को पड़ा भारी: महू नाका विवाद के बाद दो पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज, टीआई लाइन अटैच, सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने किया था चक्काजाम

भाजपा नेता से विवाद के बाद पुलिस पर कार्रवाई: दो पुलिसकर्मी निलंबित, टीआई लाइन अटैच, महू नाका पर लगा जाम

इंदौर के महू नाका चौराहे पर शुक्रवार को ट्रैफिक पुलिस की वाहन चेकिंग के दौरान भाजपा नेता वीरेंद्र शेंडगे और पुलिसकर्मियों के बीच हुए विवाद ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी। मामूली चालान विवाद कुछ ही देर में इतना बढ़ गया कि सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए, चक्का-जाम कर दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ट्रैफिक सुबेदार लक्ष्मी और आरक्षक शेखर को निलंबित कर दिया, जबकि टीआई राधा यादव को लाइन अटैच कर दिया गया।

घटना शुक्रवार सुबह की बताई जा रही है। महू नाका चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस रोजाना की तरह हेलमेट और दस्तावेज जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान भाजपा नेता वीरेंद्र शेंडगे अपने वाहन से वहां से गुजर रहे थे। पुलिस ने उन्हें भी अन्य वाहन चालकों की तरह रोक लिया। बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों ने हेलमेट नहीं पहनने पर चालान बनाने की बात कही। इस पर शेंडगे ने स्वयं को भाजपा नेता बताते हुए वाहन छोड़ने को कहा, लेकिन पुलिसकर्मियों ने नियमों का हवाला देते हुए चालान बनाने की बात दोहराई।

इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बहस कुछ ही मिनटों में तीखी नोकझोंक में बदल गई। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। वहीं पुलिसकर्मियों का कहना था कि वे केवल यातायात नियमों का पालन करवा रहे थे और सभी के साथ समान कार्रवाई की जा रही थी।

विवाद बढ़ने के बाद वीरेंद्र शेंडगे ने अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को फोन कर घटना की जानकारी दी। थोड़ी ही देर में महू नाका चौराहे पर भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो गई। देखते ही देखते करीब 200 से अधिक कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस आम जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ अनावश्यक सख्ती कर रही है।

स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने चौराहे पर वाहनों की आवाजाही रोक दी। महू नाका शहर का प्रमुख ट्रैफिक पॉइंट माना जाता है और यहां से कई महत्वपूर्ण मार्ग जुड़े हुए हैं। चक्का-जाम के कारण पांच अलग-अलग मार्गों पर लंबी वाहन कतारें लग गईं। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, स्कूल बसें और आम लोग काफी देर तक जाम में फंसे रहे। सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रदर्शन और जाम की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। इस दौरान भाजपा विधायक मालिनी गौड़ के प्रतिनिधि प्रणय चित्तौड़ा भी घटनास्थल पहुंचे और पुलिस अधिकारियों के साथ चर्चा की। काफी देर तक चली बातचीत और आश्वासन के बाद कार्यकर्ता शांत हुए और चक्का-जाम समाप्त किया गया। इसके बाद यातायात व्यवस्था धीरे-धीरे सामान्य हो सकी।

घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। प्रारंभिक जांच के बाद ट्रैफिक सुबेदार लक्ष्मी और आरक्षक शेखर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। साथ ही संबंधित थाना प्रभारी टीआई राधा यादव को लाइन अटैच कर दिया गया। पुलिस विभाग का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं भाजपा नेता वीरेंद्र शेंडगे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि महू नाका चौराहे पर रोजाना वाहन जांच के नाम पर लोगों को लंबे समय तक रोका जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई वाहन चालक घंटों चालान बनने का इंतजार करते रहते हैं, जिससे उन्हें दफ्तर, स्कूल और अन्य जरूरी कार्यों में देरी होती है। उन्होंने कहा कि आम लोग भी लगातार अनावश्यक जांच और परेशान किए जाने की शिकायत करते हैं। शेंडगे का कहना था कि उन्होंने केवल जनता की समस्या उठाई थी, लेकिन पुलिस ने उनके साथ गलत व्यवहार किया।

इस घटना के बाद शहर में पुलिस की कार्यशैली और वीआईपी संस्कृति को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग पुलिस की कार्रवाई को सही बता रहे हैं और कह रहे हैं कि कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए, चाहे वह आम नागरिक हो या राजनीतिक दल का नेता। वहीं दूसरी ओर भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि पुलिस को जनता और जनप्रतिनिधियों से सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने सवाल उठाया कि यदि पुलिस नियमों का पालन करा रही थी तो कार्रवाई पुलिसकर्मियों पर क्यों हुई। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि ट्रैफिक जांच के दौरान पुलिस को व्यवहार में संयम रखना चाहिए ताकि ऐसी स्थितियां पैदा न हों।

राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना की चर्चा तेज है। विपक्षी दलों ने इसे प्रशासन पर राजनीतिक दबाव का उदाहरण बताया है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी कानून का सम्मान करती है, लेकिन किसी भी कार्यकर्ता या नागरिक के साथ अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

फिलहाल पुलिस विभाग पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटा है। प्रशासन की कोशिश है कि मामले को जल्द शांत किया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। महू नाका चौराहे पर शनिवार को अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे और किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।