राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड निस्तारण: 2 लाख 36 हजार से अधिक मामलों का हुआ समाधान, पीड़ितों को मिली लाखों की राहत
उरई में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायपालिका और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से कुल 2,36,828 मामलों का निस्तारण किया गया। जनपद न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में दीवानी, फौजदारी, वैवाहिक, मोटर दुर्घटना, बैंक ऋण और राजस्व मामलों का समाधान आपसी समझौते के आधार पर किया गया। लोक अदालत में पीड़ितों को लाखों रुपये की क्षतिपूर्ति और राहत राशि भी दिलाई गई
राष्ट्रीय लोक अदालत में 2.36 लाख मामलों का रिकॉर्ड निस्तारण
जनपद न्यायाधीश के नेतृत्व में सफल हुआ आयोजन
स्वास्थ्य शिविर और ओडीओपी प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
उरई। जनपद जालौन में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने न्यायिक इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज करते हुए कुल 2,36,828 मामलों का सफल निस्तारण किया। जनपद की सभी तहसीलों एवं दीवानी न्यायालयों में आयोजित इस विशेष अभियान के दौरान न्यायालयों, राजस्व न्यायालयों और विभिन्न विभागों ने मिलकर लंबित मामलों को आपसी सहमति और सुलह-समझौते के आधार पर निपटाया। इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह के नेतृत्व में न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न विभागों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय लोक अदालत को जनहितकारी और जागरूकता आधारित स्वरूप देने के लिए इस बार कई नई पहलें भी की गईं। न्यायालय परिसर में आमजन के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाया गया, वहीं “एक जिला एक उत्पाद” योजना के तहत स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों द्वारा तैयार हस्तनिर्मित वस्तुओं का प्रदर्शन भी आकर्षण का केंद्र रहा। इन पहलों का उद्देश्य न्याय के साथ सामाजिक जागरूकता और पुनर्वास की भावना को भी मजबूत करना था।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शाम्भवी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जनपद न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह की अदालत में 22 मुकदमों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में पक्षकारों को कुल 1 करोड़ 26 लाख 85 हजार 153 रुपये की धनराशि दिलाई गई। यह राशि विभिन्न विवादों के समाधान और मुआवजे के रूप में प्रदान की गई, जिससे कई परिवारों को बड़ी राहत मिली।
कुटुंब न्यायालयों में भी बड़ी संख्या में वैवाहिक और भरण-पोषण संबंधी मामलों का समाधान हुआ। प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह गौतम ने 15 मामलों का निस्तारण किया, जिनमें भरण-पोषण से जुड़े विवाद प्रमुख रहे। इसके अलावा उन्होंने चार वैवाहिक मामलों को प्री-लिटिगेशन स्तर पर ही सुलझा दिया। अपर कुटुंब न्यायाधीश प्रवीण कुमार पाण्डेय ने 34 मामलों का निस्तारण किया और दो वैवाहिक विवादों को आपसी सहमति से समाप्त कराया।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में भी लोक अदालत का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। पीठासीन अधिकारी अनिल कुमार वशिष्ठ ने 78 मामलों का निस्तारण करते हुए पीड़ित याचियों को विपक्षी बीमा कंपनियों से 29 लाख 20 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाई। इससे दुर्घटना पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता प्राप्त हुई और लंबे समय से लंबित विवादों का समाधान संभव हो सका।
स्थायी लोक अदालत (पीयूएस) के अध्यक्ष राजवर्धन गुप्ता ने भी एक महत्वपूर्ण मामले में पक्षकारों के बीच समझौता कराकर उन्हें लंबे विवाद से राहत दिलाई। न्यायालयों में सुलह और समझौते की यह प्रक्रिया लोक अदालत की मूल भावना को दर्शाती है।
विशेष न्यायालयों में भी बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण किया गया। अपर जिला जज प्रथम सतीश चंद्र द्विवेदी ने दो मामलों का निस्तारण किया। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट सुरेश कुमार गुप्ता ने छह मामलों को सुलझाया, जबकि विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र चन्द्रमोहन चतुर्वेदी ने दो मामलों का समाधान किया। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट मुन्ना प्रसाद ने विशेष प्रयास करते हुए विद्युत अधिनियम से जुड़े 228 मामलों का निस्तारण किया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट राजीव सिंह ने भी दो मामलों में निर्णय दिया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे द्वारा सबसे अधिक 2951 आपराधिक मामलों का निस्तारण किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न सिविल एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालतों में दीवानी और फौजदारी मामलों का बड़े पैमाने पर निपटारा हुआ। सिविल जज प्रतिभा ने दीवानी और फौजदारी मिलाकर 54 मामलों का समाधान किया, जबकि अपर सिविल जज मनाली चन्द्रा ने 102 मामलों का निस्तारण कराया। रजत सिंह यादव ने भी 83 मामलों में पक्षकारों के बीच समझौता कराया।
उरई, कोंच, कालपी, जालौन और माधौगढ़ स्थित न्यायालयों में भी न्यायिक अधिकारियों ने सैकड़ों मामलों का निपटारा किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट शिंजनी यादव ने 450 मामलों का निस्तारण किया, जबकि कालपी के सिविल जज अभिषेक चौधरी ने 511 फौजदारी मामलों का समाधान कराया। जालौन के न्यायिक अधिकारी जावेद खां और निकिता सिंह ने भी बड़ी संख्या में दीवानी एवं आपराधिक मामलों को सुलझाया। ग्राम न्यायालय माधौगढ़ में न्यायाधिकारी विनय कुमार चाहर ने 68 मामलों का निस्तारण किया।
विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम सैयद अली मेहदी आबिदी ने कुल 115 मामलों का निस्तारण करते हुए विभिन्न न्यायालयों के माध्यम से 2 लाख 74 हजार 350 रुपये शासकीय कोष में जमा कराए। इसके साथ ही विभिन्न बैंकों और श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े 378 ऋण मामलों में भी समझौता कराया गया, जिससे बकायेदारों और वित्तीय संस्थानों दोनों को राहत मिली।
राष्ट्रीय लोक अदालत में जिला प्रशासन की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। जिला मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट, सभी उप जिलाधिकारी, नगर मजिस्ट्रेट तथा तहसीलदार न्यायालयों ने राजस्व संहिता और फौजदारी के 2562 मामलों का निस्तारण किया। वहीं विभिन्न विभागों द्वारा प्री-लिटिगेशन प्रकृति के 2 लाख 27 हजार 905 मामलों का समाधान किया गया।
इस प्रकार न्यायपालिका और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से कुल 2 लाख 36 हजार 828 मामलों का निस्तारण कर राष्ट्रीय लोक अदालत को ऐतिहासिक सफलता मिली। लोक अदालत ने न केवल लंबित मामलों का बोझ कम किया बल्कि आमजन को त्वरित, सुलभ और सस्ता न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस