सज्जन वर्मा बोले- भाजपा ने मंदिरों को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाया, कहा- नरेंद्र मोदी को धर्म का ज्ञान नहीं, ये असली ‘मोनी बाबा’ हैं

भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने मंदिरों को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर भी निशाना साधा और राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग की।

सज्जन वर्मा बोले- भाजपा ने मंदिरों को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाया, कहा- नरेंद्र मोदी को धर्म का ज्ञान नहीं, ये असली ‘मोनी बाबा’ हैं

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भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए मंदिरों के प्रबंधन, राम मंदिर ट्रस्ट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कई विवादित बयान दिए हैं। बुधवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने पुजारियों के साथ मिलकर मंदिरों को भ्रष्टाचार का केंद्र बना दिया है। उन्होंने राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे को भी उठाया तथा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

प्रेस वार्ता के दौरान सज्जन वर्मा ने कहा कि भाजपा धर्म और आस्था के नाम पर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि मंदिरों का उपयोग जनकल्याण और आध्यात्मिक चेतना के लिए होना चाहिए, लेकिन भाजपा शासन में कई मंदिर भ्रष्टाचार और आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों से घिर गए हैं। वर्मा ने कहा कि “भाजपा ने पुजारियों के साथ मिलकर हर मंदिर को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है।”

उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम लेते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। वर्मा ने कहा कि “जिस दिन चंपत राय का जन्म हुआ होगा, उस दिन किसी ज्योतिषी ने उनकी कुंडली देखकर कहा होगा कि यह व्यक्ति जीवन में कोई बड़ा चमत्कार करेगा। करोड़ों और अरबों रुपए की राशि लेकर वे ‘चंपत’ हो गए।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

सज्जन वर्मा ने राम मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के समय देश के चारों शंकराचार्यों को आमंत्रित नहीं किया गया था, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष रूप से बुलाया गया था। वर्मा ने आरोप लगाया कि धार्मिक परंपराओं और सनातन व्यवस्था की उपेक्षा की गई।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें धर्म का वास्तविक ज्ञान नहीं है। वर्मा ने कहा कि “नरेंद्र मोदी को धर्म का थोड़ा भी ज्ञान नहीं है। धर्म को केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि देश और मध्य प्रदेश में कई बड़े घोटाले चर्चा का विषय बने हुए हैं, लेकिन प्रधानमंत्री इन मामलों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते।

कांग्रेस नेता ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का उल्लेख करते हुए कहा कि वे कम बोलते थे, लेकिन गंभीरता से काम करते थे। वर्मा ने कहा कि “इनसे अच्छे तो मनमोहन सिंह थे। नरेंद्र मोदी असली ‘मोनी बाबा’ हैं और चोरों के सरताज बने बैठे हैं।” उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कथावाचक ऋचा गोस्वामी भी मौजूद थीं। उन्होंने राम मंदिर से जुड़े कथित दान घोटाले के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार होती तो वह भी राम मंदिर का निर्माण कराती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कभी भी राम मंदिर निर्माण के खिलाफ नहीं रही है।

ऋचा गोस्वामी ने दावा किया कि वर्ष 2024 में राम मंदिर का निर्माण पूरा हुआ और वर्ष 2026 में मंदिर के दान से जुड़े करीब 5 हजार करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं की बातें सामने आने लगीं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके। उन्होंने यह भी मांग की कि देश के सभी मंदिरों में राजनीतिक हस्तक्षेप समाप्त किया जाए और धार्मिक संस्थाओं को स्वतंत्र रूप से संचालित होने दिया जाए।

राम मंदिर से जुड़े कथित धन के दुरुपयोग का मुद्दा सबसे पहले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने उठाया था। उन्होंने 7 जून को आरोप लगाया था कि राम मंदिर से 5 करोड़ से लेकर साढ़े 7 करोड़ रुपए तक की राशि में गड़बड़ी हुई है। पांडेय ने दावा किया था कि मंदिर ट्रस्ट और संबंधित संस्थाओं के वित्तीय लेनदेन की जांच होनी चाहिए।

इसके बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। अखिलेश ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि आवश्यक हो तो न्यायालय को भी इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए।

हालांकि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि अब तक किसी भी प्रकार की चोरी, गबन या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के सभी वित्तीय लेनदेन निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार संचालित किए जाते हैं तथा लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।

विवाद बढ़ने के बाद भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने 9 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी। इसके अगले दिन प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने राम मंदिर ट्रस्ट से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली थी। इसके बाद मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक महत्व हासिल कर लिया।

उधर, राम मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 मई को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस टीम ने छह दिनों तक अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े विभिन्न दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की। एसआईटी में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत (IAS), आईजी लखनऊ रेंज किरण शिवकुमार और विशेष सचिव (वित्त) नीलरतन कुमार को शामिल किया गया है।

फिलहाल इस पूरे विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस जहां मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रही है, वहीं राम मंदिर ट्रस्ट और भाजपा नेताओं का कहना है कि लगाए जा रहे आरोपों के समर्थन में अभी तक कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आए हैं। जांच एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद ही इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।