बैगर प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के सीएमएचओ ने कर दिया ट्रांसफर, लिपिक को मोहरा बनाकर कराया सस्पेंड-सीएमएचओ को कलेक्टर ने दिया नोटिस

छतरपुर में स्वास्थ्य विभाग के तबादला प्रकरण ने विवाद खड़ा कर दिया है। आरोप है कि सीएमएचओ डॉ. आर.पी. गुप्ता ने प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बिना कर्मचारियों की तबादला सूची जारी कर दी। मामला सामने आने के बाद लिपिक बबिता खरे को निलंबित कर दिया गया, जबकि बताया जा रहा है कि सूची जारी होने के समय वह शासकीय कार्य से भोपाल में थीं। कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमएचओ को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा है। कर्मचारियों के बीच कार्रवाई को लेकर नाराजगी है और विभागीय स्तर पर सीएमएचओ के खिलाफ भी कार्रवाई की चर्चाएं तेज हैं। वहीं कुछ सूत्रों ने तबादलों में पैसों के लेन-देन के आरोप भी लगाए हैं, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बैगर प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के सीएमएचओ ने कर दिया ट्रांसफर,  लिपिक को मोहरा बनाकर कराया सस्पेंड-सीएमएचओ को कलेक्टर ने दिया नोटिस

बिना अनुमोदन जारी हुई तबादला सूची पर उठे सवाल

लिपिक बबिता खरे निलंबित, जिम्मेदारी तय करने पर विवाद

सूची जारी होने के समय भोपाल में थीं लिपिक, कार्रवाई पर सवाल

कलेक्टर ने CMHO डॉ. आर.पी. गुप्ता से 24 घंटे में मांगा जवाब

स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों के बीच बढ़ी नाराजगी

CMHO पर निलंबन या मुख्यालय अटैचमेंट की चर्चाएं तेज

छतरपुर। अजब स्वास्थ्य विभाग के गजब कारनामे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से जारी हुई तबादला सूची ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। आरोप है कि सीएमएचओ डॉ. आर. पी. गुप्ता ने प्रभारी मंत्री का अनुमोदन लिए बिना ही जल्दबाजी में कर्मचारियों की तबादला सूची जारी कर दी। मामला खुलते ही प्रशासन ने पहले लिपिक बबिता खरे को 17 जून की रात निलंबित कर दिया। अब सूत्रों का दावा है कि इस मामले में सीएमएचओ डॉ. गुप्ता के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी है।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि जिस दिन तबादला सूची पर दस्तखत कर उसे चस्पा किया गया, उस दिन लिपिक बबिता खरे शासकीय कार्य से भोपाल में मौजूद थीं। इसके बावजूद सूची जारी करने की पूरी जिम्मेदारी महिला लिपिक के सिर मढ़ दी गई। विभाग में चर्चा है कि नियमों को ताक पर रखकर की गई इस कार्रवाई में सीएमएचओ की भूमिका संदिग्ध है। क्लेक्टर पार्थ ने डा गुप्ता क़ो नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाव माँगा है

नियमानुसार प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बिना कोई भी तबादला सूची जारी नहीं की जा सकती। लेकिन इस बार फाइल सीधे सीएमएचओ स्तर से ही जारी कर दी गई। आपत्ति लगने के बाद पहले लिपिक को निलंबित किया गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब लिपिक भोपाल में थी तो सूची किसके आदेश पर बनी और किसने जारी की।

सूत्र बताते हैं कि क्लेक्टर स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। सीएमएचओ डॉ. गुप्ता की कार्यप्रणाली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बिना सूची जारी करने को घोर अनुशासनहीनता माना जा रहा है। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि डॉ. गुप्ता के खिलाफ निलंबन या मुख्यालय अटैचमेंट जैसी कार्रवाई हो सकती है।

फिलहाल सीएमएचओ कार्यालय की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं निलंबन आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। इस पूरे प्रकरण को लेकर जिले में सियासी और प्रशासनिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। अब सबकी नजर शासन के अगले कदम पर है कि वह सिर्फ लिपिक पर कार्रवाई कर मामले को दबाता है या सीएमएचओ पर भी गाज गिरती है।

ट्रांसफर मे पैसे का चला खेल

ट्रांसफर के इस खेल मे पैसे की बड़ी भूमिका रही है

सूत्र बताते है की सीएमएचओ नियमित कर्मचारियों से दो लाख रु प्रति व्यक्ति से प्रभारी मंत्री के नाम से लिए गए है वही संविदा कर्मचारियों से ट्रांसफर के लिए एक लाख रु कलेक्टर के नाम से लिए गए है।