नर्मदा संगम पर दर्दनाक हादसा: बेटियों को बचाने में पुलिस आरक्षक की मौत, क्षेत्र में शोक की लहर

मंडला के देवगांव संगम में एक हृदयविदारक हादसा हुआ. मोहगांव थाने में पदस्थ पुलिस आरक्षक अपनी बेटियों को डूबने से बचाते हुए खुद अपनी जान गंवा बैठे. बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन आरक्षक गहरे पानी में समा गए. विभाग ने शोक जताते हुए आर्थिक सहायता की घोषणा की है.

नर्मदा संगम पर दर्दनाक हादसा: बेटियों को बचाने में पुलिस आरक्षक की मौत, क्षेत्र में शोक की लहर

नर्मदा संगम पर दर्दनाक हादसा: बेटियों को बचाने में पुलिस आरक्षक की मौत

मंडला के देवगांव संगम में हृदयविदारक घटना

परिवार संग स्नान के दौरान हुआ हादसा

मध्य प्रदेश के मंडला जिले से एक बेहद हृदयविदारक और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। देवगांव स्थित नर्मदा और बुडनेर नदी के पवित्र संगम पर सोमवार को एक ऐसा हादसा हुआ, जिसमें एक पिता ने अपने बच्चों की जान बचाने के लिए खुद की जिंदगी कुर्बान कर दी। मोहगांव थाने में पदस्थ पुलिस आरक्षक शिवलाल परस्ते ने अपने तीनों बच्चों को डूबने से बचा लिया, लेकिन इस संघर्ष में वे खुद गहरे पानी में समा गए और उनकी मौत हो गई।

यह घटना न केवल एक दुखद हादसा है, बल्कि एक पिता के साहस, कर्तव्य और प्रेम की मिसाल भी बन गई है। आरक्षक शिवलाल परस्ते पिछले 11 महीनों से मोहगांव थाने में अपनी सेवाएं दे रहे थे। छुट्टी के दौरान वे अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए देवगांव संगम पहुंचे थे, जहां यह हादसा हो गया।

कैसे हुआ हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शिवलाल अपने परिवार के साथ संगम पर स्नान कर रहे थे। इसी दौरान अचानक उनका बेटा गहरे पानी की ओर चला गया और डूबने लगा। बेटे को संकट में देख उनकी दो बेटियां उसे बचाने के लिए पानी में उतरीं, लेकिन वे भी संतुलन खो बैठीं और डूबने लगीं।

अपने बच्चों को इस स्थिति में देखकर शिवलाल परस्ते ने बिना एक पल गंवाए गहरे पानी में छलांग लगा दी। उन्होंने पूरी ताकत लगाकर अपने तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस दौरान वहां मौजूद अन्य लोगों ने भी मदद की। हालांकि बच्चों को बचाने की इस कोशिश में शिवलाल खुद गहरे पानी में फंस गए और बाहर नहीं निकल पाए।

बचाव कार्य और प्रशासन की कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। गोताखोरों को बुलाया गया और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद शिवलाल परस्ते का शव पानी से बाहर निकाला गया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया।

एडिशनल एसपी शिवकुमार वर्मा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि आरक्षक ने बहादुरी दिखाते हुए अपने बच्चों की जान बचाई, लेकिन दुर्भाग्यवश खुद को नहीं बचा सके। उन्होंने यह भी बताया कि हादसे में एक बच्ची की हालत कुछ समय के लिए गंभीर हो गई थी, लेकिन अब उसका इलाज जारी है और वह खतरे से बाहर है।

परिवार में मचा कोहराम

इस हादसे के बाद शिवलाल परस्ते के परिवार में कोहराम मच गया है। बच्चों की जान तो बच गई, लेकिन उन्होंने अपने पिता को हमेशा के लिए खो दिया। पत्नी और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है।

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने बताया कि शिवलाल एक जिम्मेदार और मिलनसार व्यक्ति थे। वे अपने परिवार से बेहद प्रेम करते थे और हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते थे। उनकी अचानक मौत से हर कोई स्तब्ध है।

विभाग ने जताया शोक

पुलिस विभाग ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने शिवलाल परस्ते की बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा को सलाम किया है। विभाग की ओर से उनके परिवार को तत्काल राहत के रूप में 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।

अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि परिवार को हर संभव सहायता दी जाएगी और आगे भी सरकारी योजनाओं के तहत मदद पहुंचाई जाएगी। साथ ही, उनके साहस को सम्मानित करने की बात भी कही जा रही है।

एक बहादुर पिता की कहानी

शिवलाल परस्ते की यह कहानी हर किसी को भावुक कर रही है। एक पिता के रूप में उन्होंने अपने बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। यह घटना दिखाती है कि माता-पिता अपने बच्चों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

उनका यह बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक सच्चे हीरो की कहानी है, जिसने अपने परिवार के लिए सबसे बड़ा त्याग किया।

सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना के बाद संगम और नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे पवित्र स्थलों पर अक्सर बड़ी संख्या में लोग स्नान करने आते हैं, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होते।

गहरे पानी वाले क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड, लाइफगार्ड और सुरक्षा उपकरणों की कमी अक्सर ऐसे हादसों को जन्म देती है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

मंडला के देवगांव संगम पर हुआ यह हादसा हर किसी को झकझोर देने वाला है। आरक्षक शिवलाल परस्ते ने अपने बच्चों की जान बचाकर एक मिसाल पेश की है, लेकिन उनकी असमय मौत ने पूरे समाज को दुखी कर दिया है।

उनकी बहादुरी और बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा। यह घटना एक चेतावनी भी है कि प्राकृतिक स्थलों पर जाते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रयास करने होंगे।