ऊर्जा मंत्री के सामने फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: "बिजली विभाग चोर है" के नारों से गूंजी जनचौपाल, टूटे खंभों और तारों को लेकर हंगामा

शिवपुरी जिले के खोड़ गांव में आयोजित जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों ने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के सामने बिजली विभाग के खिलाफ "बिजली विभाग चोर है" के नारे लगाए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में टूटे बिजली खंभों और तारों की शिकायतों पर विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है। साथ ही कुछ कर्मचारियों पर मरम्मत के नाम पर पैसे मांगने के आरोप भी लगाए गए।

ऊर्जा मंत्री के सामने फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: "बिजली विभाग चोर है" के नारों से गूंजी जनचौपाल, टूटे खंभों और तारों को लेकर हंगामा

टूटे खंभों और तारों से परेशान ग्रामीणों ने किया विरोध

जनचौपाल में बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी

ग्रामीणों ने लगाए कर्मचारियों पर पैसे मांगने के आरोप

बारिश में हादसे की आशंका, खेतों में पड़े हैं बिजली के तार

शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, ग्रामीणों में नाराजगी

ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों को दिए तत्काल समाधान के निर्देश

वीरा गांव की बिजली समस्या बनी जनचौपाल का बड़ा मुद्दा

ग्रामीण बोले- खंभा और तार ठीक कराने के लिए मांगे गए पैसे

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में आयोजित एक जनचौपाल के दौरान उस समय माहौल गर्मा गया, जब ग्रामीणों ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के सामने ही बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। लंबे समय से गांव में टूटे बिजली के खंभों और तारों की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने "बिजली विभाग चोर है" के नारे लगाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। ग्रामीणों का आरोप था कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया, बल्कि कुछ कर्मचारियों द्वारा काम कराने के बदले पैसे मांगे जाते हैं।

यह घटना रविवार को शिवपुरी जिले के खोड़ गांव स्थित धाय महादेव मंदिर परिसर में आयोजित जनचौपाल के दौरान हुई। जनचौपाल में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ग्रामीणों की समस्याएं सुन रहे थे। कार्यक्रम में कलेक्टर अर्पित वर्मा, शिवपुरी विधायक देवेन्द्र जैन, भाजपा जिला अध्यक्ष जसवंत जाटव सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

जनचौपाल में अचानक शुरू हुई नारेबाजी

कार्यक्रम शांतिपूर्वक चल रहा था और मंत्री ग्रामीणों की शिकायतें सुन रहे थे। इसी बीच पिछोर तहसील के वीरा गांव से आए कुछ ग्रामीणों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते कई ग्रामीण उनके समर्थन में खड़े हो गए और पूरे परिसर में "बिजली विभाग चोर है" के नारे गूंजने लगे।

अचानक हुई इस नारेबाजी से कुछ देर के लिए कार्यक्रम का माहौल बदल गया। मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को शांत कर उनकी समस्याएं विस्तार से सुनीं।

टूटे खंभों और तारों से खतरे में ग्रामीण

ग्रामीणों ने मंत्री को बताया कि उनके गांव में कई स्थानों पर बिजली के खंभे टूटे हुए हैं और बिजली के तार खेतों में पड़े हुए हैं। यह स्थिति पिछले कई महीनों से बनी हुई है। किसानों का कहना है कि खेतों में गिरे बिजली के तार किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।

बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और ऐसे में खुले या टूटे हुए बिजली तारों से करंट फैलने का खतरा और बढ़ जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के लोग लगातार भय के माहौल में रह रहे हैं। खेतों में काम करने वाले किसानों और पशुओं के लिए भी यह गंभीर खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों ने कहा कि कई बार स्थानीय अधिकारियों और बिजली विभाग को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

पहले भी उठाया गया था मुद्दा

ग्रामीणों ने बताया कि यह समस्या कोई नई नहीं है। एक दिन पहले आयोजित जनचौपाल में भी उन्होंने टूटे खंभों और तारों का मुद्दा उठाया था। उस समय अधिकारियों ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया था।

हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन के अलावा कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से जब ऊर्जा मंत्री स्वयं जनचौपाल में पहुंचे तो लोगों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने खुले तौर पर विरोध दर्ज कराया।

ग्रामीणों का कहना था कि यदि समय रहते बिजली व्यवस्था की मरम्मत नहीं की गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी विभाग की होगी।

कर्मचारियों पर पैसे मांगने के आरोप

जनचौपाल में ग्रामीण सुखेन्द्र राय ने बिजली विभाग के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि उनके खेत से गुजरने वाली बिजली लाइन का खंभा और तार लंबे समय से टूटे पड़े हैं।

सुखेन्द्र राय ने कहा कि उन्होंने कई बार विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि समस्या के समाधान के लिए उनसे तीन हजार रुपये की मांग की गई।

उन्होंने यह भी बताया कि फरवरी महीने में जब बिजली का तार टूट गया था, तब उसे जोड़ने के लिए उनके पिता से 1,500 रुपये लिए गए थे। ग्रामीण के इस आरोप ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को भी असहज कर दिया।

ग्रामीणों ने मांग की कि यदि किसी कर्मचारी ने अवैध रूप से पैसे मांगे हैं तो उसके खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।

मंत्री ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के बाद ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद बिजली विभाग के अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और टूटे हुए खंभों एवं तारों की मरम्मत जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सीधे उन्हें उपलब्ध कराई जाए।

सूत्रों के अनुसार मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी द्वारा पैसे मांगने की शिकायत सही पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जनचौपाल का उद्देश्य और जमीनी हकीकत

राज्य सरकार द्वारा आयोजित जनचौपालों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को सीधे सुनना और उनका त्वरित समाधान करना है। लेकिन वीरा गांव के ग्रामीणों का विरोध यह दर्शाता है कि कई क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं।

बिजली जैसी आवश्यक सेवा में लापरवाही और शिकायतों पर समय पर कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था की खराब स्थिति किसानों और आम नागरिकों दोनों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।

समाधान की उम्मीद

ऊर्जा मंत्री के हस्तक्षेप के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान होगा। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर कार्रवाई देखना चाहते हैं।

अब देखना होगा कि विभाग मंत्री के निर्देशों का कितना पालन करता है और वीरा गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल जनचौपाल में गूंजे "बिजली विभाग चोर है" के नारों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।