उमा भारती का बड़ा ऐलान, 2029 में लड़ूंगी लोकसभा चुनाव,पार्टी कहेगी तो बुंदेलखंड से ही लड़ेंगी,राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चर्चा तेज

मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान किया है। राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है

उमा भारती का बड़ा ऐलान, 2029 में  लड़ूंगी लोकसभा चुनाव,पार्टी कहेगी तो बुंदेलखंड से ही लड़ेंगी,राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चर्चा तेज

उमा भारती ने कहा कि अगर पार्टी चाहेगी तो वह आगामी चुनाव बुंदेलखंड से ही लड़ेंगी। उन्होंने दावा किया बिहार में फिर से भाजपा सरकार बनाने जा रही है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की फायरब्रांड नेता और मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उमा भारती (UMA BHARTI) ने कहा है कि यदि पार्टी अनुमति देती है तो वे 'अगला लोकसभा चुनाव झांसी लोकसभा सीट' से लड़ेंगी। उमा ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर भी अपनी इच्छा जाहिर कर दी है।

उत्तर प्रदेश के 'ललितपुर दौरे' के समय मीडिया से बातचीत में भी उमा भारती ने कहा, “अगर पार्टी कहेगी तो मैं चुनाव जरूर लड़ूंगी, लेकिन मैं सिर्फ झांसी से ही चुनाव लड़ूंगी।” उमा ने कहा कि उनका बुंदेलखंड क्षेत्र से उनका गहरा जुड़ाव है, और वे चाहेंगी कि आने वाले लोकसभा चुनाव में बुंदेलखंड की जनता एक बार फिर उन्हें लोकसभा तक पहुंचाएं।

उमा भारती का यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे '2029 लोकसभा चुनाव की शुरुआती गहमागहमी' के रूप में देख रहे हैं।

चुनाव लड़ने के लिए कहा 'हां'

यह पूछे जाने पर कि क्या वह अगला चुनाव लड़ेंगी, मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, 'हां... मैं चुनाव तब लड़ूंगी जब मुझे लगेगा कि मैं तैयार हूं... मेरे पास लोगों की शक्ति है...' उन्होंने आगे कहा, '65 साल की उम्र में, पीएम मोदी ने अपना लोकसभा चुनाव लड़ा। मैं अगले साल 65 साल की हो जाऊंगी। अगर मैं अभी कोशिश करती हूं, तो मुझे कुछ बाधाएं आएंगी...'

झांसी से सांसद बनी थीं उमा

इस बयान से एक बार फिर बुंदेलखंड की राजनीति में हलचल मच गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व उनके बयान को किस रूप में देखता है।

2014 के लोकसभा चुनाव में उमा भारती झांसी से ही सांसद चुनी गई थी। झांसी के लोकसभा चुनाव में कुल 17 बार में से 9 बार कांग्रेस का कब्जा रहा। 6 बार भाजपा जीत सकी। एक बार लोकदल को जीत मिली थी।