तीसरे उम्मीदवार से भाजपा ने बदला चुनावी गणित, कांग्रेस में बढ़ी बेचैनी,महेश केवट की एंट्री से गरमाई सियासत, तीसरी सीट पर घमासान तय

भाजपा ने मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को उम्मीदवार घोषित किया है, जिससे अब निर्विरोध निर्वाचन के बजाय चुनाव होगा।

तीसरे उम्मीदवार से भाजपा ने बदला चुनावी गणित, कांग्रेस में बढ़ी बेचैनी,महेश केवट की एंट्री से गरमाई सियासत, तीसरी सीट पर घमासान तय

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना है. भाजपा ने दो सीटों के लिए पहले ही तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल के नाम की घोषणा कर दी थी. इन दोनों ने नामांकन भी कर दिया है. अब तीसरे सीट के लिए बीजेपी ने महेश केवट को भी उतार दिया है. अब यहां राज्यसभा की तीसरी सीट पर BJP के महेश केवट और कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन के बीच मुकाबला होगा.

भोपाल/नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब बेहद रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए बुंदेलखंड क्षेत्र के वरिष्ठ नेता महेश केवट को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। भाजपा के इस फैसले के बाद राज्यसभा चुनाव में मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब तीसरी सीट के लिए भाजपा के महेश केवट और कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन आमने-सामने होंगे। 18 जून को होने वाले मतदान में चार उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

भाजपा ने इससे पहले राज्यसभा की दो सीटों के लिए तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल के नाम घोषित कर दिए थे। दोनों उम्मीदवार अपना नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं। तीसरी सीट के लिए महेश केवट को मैदान में उतारकर भाजपा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह राज्यसभा की तीनों सीटों पर जीत दर्ज करने की रणनीति पर काम कर रही है।

महेश केवट वर्तमान में मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं और लंबे समय से संगठनात्मक राजनीति से जुड़े हुए हैं। भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर प्रदेश के मछुआरा और केवट समाज को बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। महेश केवट का राजनीतिक और सामाजिक जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है। वर्ष 1984 से संघ के कार्यकर्ता रहे महेश केवट ओरछा शाखा में मुख्य शिक्षक की भूमिका भी निभा चुके हैं।

छात्र जीवन के दौरान उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में ब्लॉक संयोजक के रूप में कार्य किया। वर्ष 1995 से वे भाजपा की सक्रिय राजनीति में जुड़े और विभिन्न जिम्मेदारियां संभालते रहे। वर्ष 2000 में वे पार्षद निर्वाचित हुए और बाद में नगर परिषद ओरछा के उपाध्यक्ष भी बने। भाजपा संगठन में जिला मंत्री, जिला उपाध्यक्ष और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहकर उन्होंने संगठन को मजबूत करने का काम किया।

महेश केवट चुनावी प्रबंधन और संगठनात्मक क्षमता के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने हरियाणा विधानसभा चुनाव, शहडोल लोकसभा उपचुनाव, चित्रकूट, मुंगावली और पृथ्वीपुर विधानसभा उपचुनावों में पार्टी की ओर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। भाजपा नेतृत्व को उम्मीद है कि उनका अनुभव और सामाजिक आधार पार्टी को राजनीतिक लाभ दिलाने में मदद करेगा।

राज्यसभा चुनाव के गणित पर नजर डालें तो कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने की है। मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के पास 62 विधायक हैं, जबकि राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता होती है। कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है। सैद्धांतिक रूप से कांग्रेस के पास अपनी उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या है, लेकिन भाजपा द्वारा तीसरा उम्मीदवार उतारे जाने के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं।

भाजपा को तीसरी सीट जीतने के लिए अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। इसी कारण राजनीतिक विश्लेषकों की नजर संभावित क्रॉस वोटिंग पर टिकी हुई है। यदि कांग्रेस के कुछ विधायक पार्टी लाइन से हटकर मतदान करते हैं या मतदान के दौरान कोई रणनीतिक चूक होती है, तो भाजपा को लाभ मिल सकता है। यही वजह है कि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने के प्रयासों में जुट गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कांग्रेस को कई बार विधायकों के दल-बदल और अंदरूनी असंतोष का सामना करना पड़ा है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि राज्यसभा की यह सीट उसके हाथ से निकले। दूसरी ओर भाजपा इस चुनाव को संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने के अवसर के रूप में देख रही है।

राज्यसभा चुनाव के इस मुकाबले ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। चुनाव परिणाम केवल राज्यसभा की सीटों का फैसला नहीं करेंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि विधानसभा में विभिन्न दलों की राजनीतिक पकड़ और आंतरिक एकजुटता कितनी मजबूत है।

इधर भाजपा ने कर्नाटक में भी राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए डॉ. एम. नागराज को उम्मीदवार बनाया है। डॉ. नागराज लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में भाजपा की बिल्डिंग कमेटी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यह समिति राज्य के विभिन्न जिलों में पार्टी कार्यालयों के निर्माण और विस्तार का कार्य देखती है।

इसके अलावा भाजपा ने कर्नाटक विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए लिंगराज पाटील और रघु कौटिल्य को भी उम्मीदवार घोषित किया है। भाजपा की इन घोषणाओं को संगठन विस्तार और सामाजिक संतुलन की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

मध्य प्रदेश में अब सभी की निगाहें 18 जून को होने वाले मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हैं। महेश केवट के मैदान में उतरने से राज्यसभा की तीसरी सीट का मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अपनी एकजुटता बनाए रख पाती है या भाजपा राजनीतिक गणित के सहारे तीसरी सीट पर भी जीत दर्ज करने में सफल होती है।