बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी ने मांगी माफी: अब कहा- लड़के का जुलूस निकाला तो मैं तैश में आ गया, पार्टी ने अब हमें ट्यूशन दे दी
भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात के बाद लोधी ने कहा कि वह पार्टी के फैसले का पालन करेंगे और भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराएंगे।
भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने आईपीएस अधिकारी से जुड़े विवाद पर मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के सामने खेद व्यक्त किया।
बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी ने मांगी माफी: बेटे के मामले में विवाद के बाद बदला रुख
मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों प्रीतम सिंह लोधी का मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अपने बेटे से जुड़े सड़क हादसे और उसके बाद एक पुलिस अधिकारी को दी गई धमकी के कारण घिरे बीजेपी विधायक ने अब सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। उन्होंने स्वीकार किया कि वह गुस्से में आकर विवादित बयान दे बैठे थे और अब पार्टी के निर्देशों का पालन करेंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 16 अप्रैल को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा क्षेत्र में हुए एक सड़क हादसे से शुरू हुआ। आरोप है कि विधायक के बेटे दिनेश लोधी ने महिंद्रा थार वाहन से पांच लोगों को टक्कर मार दी। एफआईआर के अनुसार, वाहन ने पहले पैदल चल रहे लोगों को टक्कर मारी और फिर एक मोटरसाइकिल को भी चपेट में लिया। घायलों ने चालक के रूप में दिनेश लोधी की पहचान की।
इस घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें करेरा एसडीओपी आयुष जाखड़ की भूमिका अहम रही। इसी दौरान विधायक द्वारा अधिकारी के खिलाफ दिया गया बयान विवाद का कारण बन गया।
पुलिस अधिकारी को दी थी धमकी
घटना के बाद विधायक प्रीतम लोधी ने कथित तौर पर एसडीओपी आयुष जाखड़ को धमकी देते हुए उनके घर को गोबर से भरने जैसी आपत्तिजनक बात कही थी। इस बयान की न सिर्फ विपक्ष बल्कि पुलिस विभाग के भीतर भी कड़ी आलोचना हुई।
मध्य प्रदेश आईपीएस एसोसिएशन ने इस बयान की निंदा करते हुए इसे अनुचित और अस्वीकार्य बताया। इसके बाद मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया और बीजेपी नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा।
पार्टी ने जारी किया नोटिस
विवाद बढ़ने पर भारतीय जनता पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई ने विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी किया। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस मामले को गंभीर बताते हुए तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा।
नोटिस में स्पष्ट किया गया कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह का व्यवहार पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाता है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भोपाल में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात
विवाद के बीच प्रीतम लोधी भोपाल पहुंचे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की। इस बैठक के बाद उनके तेवर पूरी तरह बदले नजर आए।
उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी के नोटिस का जवाब दे दिया है और अब जो भी निर्णय पार्टी लेगी, वह उसे स्वीकार करेंगे।
“मैं तैश में आ गया था” – लोधी
माफी मांगते हुए विधायक ने कहा:
“मेरा बेटा एक दुर्घटना में शामिल था। मैंने प्रशासन की मदद भी की, लेकिन जब उसे जुलूस में ले जाया गया तो मैं तैश में आ गया और कुछ गलत बातें कह दीं। इसके लिए मैं माफी मांगता हूं।”
उन्होंने आगे कहा कि पार्टी ने उन्हें “ट्यूशन” दी है और सिखाया है कि इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए।
“पार्टी सिखाती भी है और सुधारती भी”
लोधी ने पार्टी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि:
पार्टी केवल अनुशासन ही नहीं सिखाती बल्कि मार्गदर्शन भी देती है
सरकारी अधिकारी भी व्यवस्था का हिस्सा हैं और उनका सम्मान होना चाहिए
वह भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराएंगे
उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि न तो वह पार्टी को नुकसान पहुंचाएंगे और न ही किसी अधिकारी को।
राजनीतिक प्रभाव और क्षेत्रीय पकड़
प्रीतम सिंह लोधी ग्वालियर-चंबल क्षेत्र, विशेषकर पिछोर विधानसभा सीट में एक प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। ओबीसी समुदाय में उनकी अच्छी पकड़ बताई जाती है, जो उन्हें क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण बनाती है।
हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब वह विवादों में आए हैं। इससे पहले भी उनके बयानों और व्यवहार को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
बीजेपी के लिए क्यों अहम है मामला?
यह मामला बीजेपी के लिए कई कारणों से संवेदनशील है:
कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सम्मान का मुद्दा
जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और आचरण
विपक्ष को हमला करने का मौका
आगामी चुनावी समीकरणों पर असर
इसी कारण पार्टी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले नोटिस जारी किया और फिर आंतरिक स्तर पर मामले को संभालने की कोशिश की।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
हालांकि इस पूरे मामले पर विपक्ष ने बीजेपी को घेरने की कोशिश की है। विपक्षी दलों का कहना है कि सत्ताधारी दल के नेताओं में अहंकार बढ़ता जा रहा है और कानून का डर खत्म हो रहा है।
आगे क्या?
अब सभी की नजरें बीजेपी के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। संभावित विकल्पों में शामिल हो सकते हैं:
चेतावनी देकर छोड़ना
संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटाना
या अनुशासनात्मक कार्रवाई
हालांकि, विधायक के माफी मांगने और नरम रुख अपनाने के बाद यह माना जा रहा है कि पार्टी इस मामले को ज्यादा आगे नहीं बढ़ाएगी।
प्रीतम सिंह लोधी का यह मामला बताता है कि राजनीति में बयानबाजी कितनी जल्दी विवाद का रूप ले सकती है। एक जनप्रतिनिधि के तौर पर जिम्मेदारी और संयम बेहद जरूरी है।
माफी मांगकर लोधी ने फिलहाल स्थिति को संभालने की कोशिश की है, लेकिन यह घटना उनके राजनीतिक करियर पर एक दाग के रूप में जरूर दर्ज हो गई है। अब देखना यह होगा कि पार्टी का अंतिम फैसला क्या आता है और यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस