गैस किल्लत के बीच बड़ा झटका: कमर्शियल सिलेंडर ₹993 महंगा, शादी सीजन में बढ़ेगी महंगाई की मार

मध्य प्रदेश में गैस किल्लत के बीच कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹993 महंगा हो गया है, जिससे कीमतें 3000 रुपए के पार पहुंच गई हैं। भोपाल में ₹3074, इंदौर में ₹3179 और ग्वालियर में ₹3296 में सिलेंडर मिल रहा है, जबकि रीवा में सबसे ज्यादा ₹3323 है।

गैस किल्लत के बीच बड़ा झटका: कमर्शियल सिलेंडर ₹993 महंगा, शादी सीजन में बढ़ेगी महंगाई की मार

कमर्शियल सिलेंडर ₹993 महंगा, कीमतें 3000 के पार

शहरों में नए रेट: भोपाल सबसे सस्ता, रीवा सबसे महंगा

दो महीने में ₹1248 की भारी बढ़ोतरी

50% सप्लाई से होटल-रेस्टोरेंट पर संकट

मध्य प्रदेश में पहले से जारी गैस किल्लत के बीच आम लोगों और व्यापारियों को बड़ा झटका लगा है। कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में एक साथ ₹993 की भारी बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी के बाद प्रदेश के अलग-अलग शहरों में सिलेंडर के दाम 3000 रुपए के पार पहुंच गए हैं। खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसाय पहले से ही गैस की कमी से जूझ रहे हैं और शादी का सीजन भी अपने चरम पर है।

शहरों में नए रेट: हर जगह 3000 पार

नई कीमतों के बाद भोपाल में कमर्शियल सिलेंडर ₹3074 में मिल रहा है, जो प्रदेश में सबसे कम है। वहीं इंदौर में ₹3179, जबलपुर में ₹3290, ग्वालियर में ₹3296 और उज्जैन में ₹3241 कीमत तय हुई है। छोटे शहरों और जिलों में यह दरें और अधिक हैं, जिससे वहां के व्यापारियों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।

रीवा में सबसे महंगा सिलेंडर ₹3323 में मिल रहा है। इसके अलावा सिंगरौली और सतना में ₹3321, कटनी में ₹3320, बालाघाट में ₹3319 और पन्ना में ₹3318 कीमत पहुंच गई है। शहडोल में ₹3317 और अनूपपुर, सीधी, मंडला, उमरिया व डिंडौरी में ₹3315 में सिलेंडर उपलब्ध है। सिवनी में भी कीमत ₹3308 तक पहुंच चुकी है।

दो महीने में ₹1248 की बढ़ोतरी

गौर करने वाली बात यह है कि पिछले दो महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कुल ₹1248 की बढ़ोतरी हो चुकी है। फरवरी तक यही सिलेंडर करीब ₹1800 में मिल जाता था, लेकिन अब इसकी कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। इस तेजी से बढ़ती कीमत ने होटल, रेस्टोरेंट और फूड इंडस्ट्री की लागत को बुरी तरह प्रभावित किया है।

गैस की किल्लत से और बढ़ी परेशानी

कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ गैस की सप्लाई भी बड़ी समस्या बनी हुई है। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि उन्हें जरूरत के मुकाबले केवल 50% गैस ही मिल पा रही है। ऐसे में उन्हें डीजल भट्टी और इंडक्शन जैसे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे लागत और ज्यादा बढ़ रही है।

भोपाल होटल एवं रेस्टोरेंट संघ के अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली के अनुसार, “गैस की कीमतें तो बढ़ ही रही हैं, लेकिन सप्लाई आधी होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। अब मजबूरी में खाने के दाम बढ़ाने पड़ेंगे।”

शादी सीजन में बढ़ेगा खर्च

प्रदेश में जुलाई तक 20 हजार से ज्यादा शादियां होने का अनुमान है। ऐसे में गैस की कीमतों में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर शादी-ब्याह के खर्च को प्रभावित करेगी। कैटरिंग और फूड सर्विस से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे शादी का बजट काफी बढ़ जाएगा।

मध्य प्रदेश टेंट कैटर्स एसोसिएशन के रामबाबू शर्मा के अनुसार, “500 लोगों के खाने का बजट जो पहले करीब 5 लाख रुपए था, अब उसमें 45 से 50 हजार रुपए तक का अतिरिक्त खर्च जुड़ जाएगा।” यानी कुल खर्च में लगभग 10% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

रेस्टोरेंट में खाना होगा महंगा

नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के एमपी हेड अभिषेक बहेती का कहना है कि गैस सिलेंडर की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। पहले छोटे-छोटे इजाफे होते थे, लेकिन अब एक साथ ₹993 की बढ़ोतरी ने पूरे सेक्टर को हिला दिया है।

उनके अनुसार, आने वाले दिनों में रेस्टोरेंट में खाने के दाम 10% से 20% तक बढ़ सकते हैं। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।

छोटे शहरों में ज्यादा मार

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे शहरों और जिलों में स्थिति और गंभीर है। वहां ट्रांसपोर्टेशन लागत और सप्लाई की समस्या के कारण गैस सिलेंडर पहले से ही महंगा मिलता है। अब नई बढ़ोतरी के बाद यह अंतर और बढ़ गया है।

रीवा, सिंगरौली, सतना, कटनी और बालाघाट जैसे जिलों में कीमतें सबसे ज्यादा हैं। इससे वहां के छोटे होटल और ढाबा संचालकों के लिए कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

फूड सेक्टर पर बढ़ता दबाव

गैस की किल्लत और कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने पूरे फूड सेक्टर पर दबाव बना दिया है। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग सर्विस और छोटे फूड स्टॉल सभी इससे प्रभावित हो रहे हैं।

व्यापारियों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस की सप्लाई और कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो इसका असर व्यापक स्तर पर दिखाई देगा। शादी-ब्याह से लेकर रोजमर्रा के खाने तक, हर जगह महंगाई का असर साफ नजर आएगा।

सरकार से राहत की मांग

व्यापारिक संगठनों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि 5-10% तक की बढ़ोतरी तो समझ में आती है, लेकिन लगभग 50% तक की वृद्धि उचित नहीं है।

अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। अगर जल्द राहत नहीं मिली, तो आने वाले दिनों में आम लोगों की जेब पर महंगाई का बोझ और बढ़ सकता है।