सुपाड़ी कारोबारी के यहां जिला खाद्य अधिकारी का छापा, जांच के लिए सुपाड़ी का लिया नमूना

उरई में जिला खाद्य अधिकारी डॉ. जतिन कुमार के नेतृत्व में खाद्य विभाग की टीम ने एक सुपाड़ी कारोबारी के यहां छापेमारी की। जांच के दौरान मजदूरों द्वारा सुपाड़ी को लाल रंग से तैयार करते हुए पाया गया। टीम ने सुपाड़ी के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं।

सुपाड़ी कारोबारी के यहां जिला खाद्य अधिकारी का छापा, जांच के लिए सुपाड़ी का लिया नमूना

सुपाड़ी कारोबारी के यहां जिला खाद्य अधिकारी का छापा, जांच के लिए लिया नमूना

उरई में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, रंगीन सुपाड़ी बनाते पकड़े गए मजदूर

गुटखा सप्लाई से जुड़े नेटवर्क पर खाद्य विभाग की नजर, सुपाड़ी फैक्ट्री पर छापेमारी

उरई। शहर में मिलावटी और रंगीन सुपाड़ी के कारोबार पर खाद्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सुपाड़ी कारोबारी के प्रतिष्ठान पर छापेमारी की। जिला खाद्य अधिकारी डॉ. जतिन कुमार के नेतृत्व में पहुंची टीम ने मौके पर सुपाड़ी को रंगीन करने का काम होते हुए पाया। टीम ने जांच के लिए सुपाड़ी के नमूने भरकर प्रयोगशाला भेज दिए हैं। विभाग का कहना है कि यदि नमूने जांच में फेल पाए गए तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

खाद्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद शहर में अवैध रूप से चल रहे सुपाड़ी और गुटखा कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि जिस आलीशान इमारत में यह कारोबार संचालित हो रहा था, वहां लंबे समय से सुपाड़ी को रंगीन बनाने का काम किया जा रहा था। विभाग को लगातार इसकी शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।

रंगीन सुपाड़ी बनाने का चल रहा था काम

छापेमारी के दौरान खाद्य विभाग की टीम ने देखा कि मजदूर बड़ी मात्रा में सुपाड़ी को लाल रंग में परिवर्तित करने का काम कर रहे थे। मौके पर कई प्रकार के रासायनिक पदार्थ और रंग भी मिले, जिनका उपयोग सुपाड़ी को आकर्षक बनाने के लिए किया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह तैयार की गई सुपाड़ी को बाद में गुटखा निर्माताओं को सप्लाई किया जाता है।

सूत्रों के अनुसार, कारोबारी द्वारा सुपाड़ी को अधिक चमकदार और लाल दिखाने के लिए ऐसे रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिनकी गुणवत्ता और सुरक्षा संदिग्ध है। यही वजह है कि खाद्य विभाग ने तत्काल नमूने भरकर उन्हें परीक्षण के लिए भेजा।

गुटखा उद्योग से जुड़ा है पूरा नेटवर्क

जानकारों का कहना है कि सुपाड़ी को रंगीन और सुगंधित बनाकर बड़े पैमाने पर गुटखा कंपनियों तक पहुंचाया जाता है। इससे तैयार होने वाले गुटखे का सेवन लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है। चिकित्सकों के अनुसार, लंबे समय तक गुटखा और मिलावटी सुपाड़ी का सेवन करने से मुंह का कैंसर, दांतों की बीमारी, गले के संक्रमण और कई अन्य गंभीर रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।

शहर में लंबे समय से यह चर्चा थी कि सुपाड़ी के धंधे की आड़ में कई कारोबारी मिलावटी सामग्री का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन कार्रवाई नहीं होने से यह कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा था। अब खाद्य विभाग की इस छापेमारी के बाद लोगों को उम्मीद है कि ऐसे कारोबारियों पर लगाम लगाई जा सकेगी।

मालिक नहीं मिला, कर्मचारी करते रहे काम

छापेमारी के दौरान प्रतिष्ठान का मालिक मौके पर मौजूद नहीं मिला। हालांकि वहां कई मजदूर काम करते हुए पाए गए। टीम ने कर्मचारियों से पूछताछ की और कारोबार से जुड़े दस्तावेज भी खंगाले। जांच के दौरान प्रतिष्ठान का पंजीयन दस्तावेज प्रस्तुत किया गया, लेकिन खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया कि केवल पंजीयन होना पर्याप्त नहीं है। खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन करना भी अनिवार्य है।

अधिकारियों ने बताया कि यदि जांच में यह साबित होता है कि सुपाड़ी में मिलावट या प्रतिबंधित रंगों का उपयोग किया गया है, तो कारोबारी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई

जिला खाद्य अधिकारी डॉ. जतिन कुमार ने बताया कि टीम ने मौके से सुपाड़ी के नमूने लिए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि नमूना मानकों पर खरा नहीं उतरा तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ जुर्माना, लाइसेंस निरस्तीकरण और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि सुपाड़ी की गुणवत्ता की भी जांच होगी। यदि गुणवत्ता खराब पाई गई तो भी दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे। विभाग लगातार ऐसे कारोबारियों पर नजर बनाए हुए है और आगे भी अभियान जारी रहेगा।

स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है मिलावटी कारोबार

विशेषज्ञों के अनुसार, सुपाड़ी को कृत्रिम रंगों और रसायनों से तैयार करना बेहद खतरनाक हो सकता है। कई बार कारोबारी सस्ते और औद्योगिक रंगों का उपयोग करते हैं, जो मानव शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं। ऐसे पदार्थ धीरे-धीरे शरीर में गंभीर बीमारियों को जन्म देते हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि युवाओं में गुटखा और सुपाड़ी सेवन की बढ़ती आदत चिंता का विषय है। बाजार में बिकने वाली कई सुपाड़ियों की गुणवत्ता संदिग्ध होती है, जिनकी नियमित जांच जरूरी है।

शहर में पहले भी उठ चुके हैं सवाल

उरई में इससे पहले भी सुपाड़ी और गुटखा कारोबार को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ कारोबारी लंबे समय से नियमों को ताक पर रखकर कारोबार कर रहे हैं, लेकिन उन पर सख्त कार्रवाई नहीं हो रही थी।

खाद्य विभाग की इस कार्रवाई को प्रशासन की बड़ी पहल माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

अभियान रहेगा जारी

खाद्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में शहर और जिले के अन्य क्षेत्रों में भी जांच अभियान चलाया जाएगा। संदिग्ध खाद्य पदार्थों, मिलावटी सामान और अवैध कारोबार करने वालों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं मिलावटी खाद्य सामग्री या संदिग्ध कारोबार की जानकारी मिले तो तत्काल प्रशासन को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।