हिमांगी सखी बनीं भारत की पहली किन्नर शंकराचार्य, महाशिवरात्रि पर भोपाल में पट्टाभिषेक,पुष्कर पीठ की संभालेंगी बागडोर, 200 किन्नरों की घर वापसी और 10 महामंडलेश्वरों की घोषणा

महाशिवरात्रि पर भोपाल में आयोजित किन्नर धर्म सम्मेलन में हिमांगी सखी को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य घोषित किया गया। वह राजस्थान स्थित पुष्कर पीठ की बागडोर संभालेंगी। इस ऐतिहासिक आयोजन में 60 किन्नरों की 'घर वापसी' का दावा भी किया गया, जिन्होंने शुद्धिकरण के बाद पुनः हिंदू धर्म अपनाया। सम्मेलन में किन्नर समुदाय के धार्मिक नेतृत्व को सुदृढ़ करने हेतु नई नियुक्तियां भी की गईं।

हिमांगी सखी बनीं भारत की पहली किन्नर शंकराचार्य, महाशिवरात्रि पर भोपाल में पट्टाभिषेक,पुष्कर पीठ की संभालेंगी बागडोर, 200 किन्नरों की घर वापसी और 10 महामंडलेश्वरों की घोषणा

महाशिवरात्रि पर भोपाल में हिमांगी सखी देश की पहली किन्नर शंकराचार्य घोषित हुईं. उन्होंने पुष्कर पीठ की कमान संभाली. इस ऐतिहासिक सम्मेलन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 60 किन्नरों की सनातन धर्म में घर वापसी भी हुई. यह घटना किन्नर अखाड़े और सनातन परंपरा में एक नया अध्याय जोड़ती है, जहां जगद्गुरु और महामंडलेश्वर भी घोषित किए गए.

Shankaracharya Himangi Sakhi - एमपी में महाशिवरात्रि पर भव्य किन्नर सम्मेलन आयोजित किया गया है। प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम में देश की पहली किन्नर शंकराचार्य हिमांगी सखी का पट्टाभिषेक किया गया। पट्टाभिषेक में बड़ा निर्णय लेते हुए पहली किन्नर शंकराचार्य पीठ के रूप में राजस्थान के पुष्कर पीठ की घोषणा की गई।​ किन्नर धर्म सम्मेलन में 4 जगद्गुरु और 5 महामंडलेश्वर बनाने की घोषणा भी की गई।​ यहां 60 धर्मांतरित किन्नरों की घर वापसी भी हुई।

भोपाल में रविवार को देशभर के किन्नर, संत महात्माओं का जमावड़ा लगा। यहां किन्नर धर्म सम्मेलन में कई अहम मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया। कार्यक्रम में किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास विशेष रूप से उपस्थित थे।

कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देश की पहली किन्नर शंकराचार्य हिमांगी सखी Himangi Sakhi का पट्टाभिषेक किया गया। सम्मेलन में शंकराचार्य पीठ के लिए राजस्थान के पुष्कर पीठ का चयन किया गया। किन्नर परंपरा के अंतर्गत यहां 4 जगद्गुरुओं और 5 महामंडलेश्वरों की घोषणा की गई।

सम्मेलन में बताया गया कि कुछ मुस्लिम किन्नर पुनः हिंदू बन गए हैं। पूर्ण शुद्धिकरण प्रक्रिया के साथ इनकी ‘घर वापसी’ कराई गई। बताया गया कि करीब 60 किन्नरों ने धर्म परिवर्तन कर दोबारा सनातनी संस्कारों को स्वीकार किया।

किन्नर धर्म सम्मेलन में भोपाल की काजल ठाकुर और संजना, राजस्थान की तनीषा, महाराष्ट्र की संचिता को जगद्गुरु

घोषित किया गया। सरिता भार्गव, मंजू, पलपल, रानी ठाकुर और सागर को कार्यक्रम में महामंडलेश्वर घोषित किया गया।

जगद्गुरु और महामंडलेश्वर की घोषणाएं

सम्मेलन के दौरान किन्नर संत परंपरा को औपचारिक स्वरूप देने की दिशा में कुछ अन्य धार्मिक पदों की भी घोषणा की गई। इस अवसर पर काजल, तनीषा, संजना, संचिता को जगद्गुरु घोषित किया गया। इसके साथ ही सरिता, मंजू, पलपल, रानी और सागर को महामंडलेश्वर घोषित किया गया। 

धार्मिक हलकों में उठा विवाद 

इस नियुक्ति को लेकर संत समाज के एक वर्ग ने आपत्ति भी जताई है। साधु-संत सन्यासी समिति के कार्यकारी अध्यक्ष स्वामी अनिलानंद ने कहा कि किन्नरों की सनातन धर्म में वापसी स्वागतयोग्य है, लेकिन अलग से किन्नर शंकराचार्य की परंपरा बनाना धर्मशास्त्रीय रूप से स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना है कि परंपरा के अनुसार केवल चार शंकराचार्य ही मान्य हैं। उन्होंने इस कदम को धार्मिक परंपरा के विपरीत बताते हुए आयोजकों पर आपत्ति जताई और मामले में वैधानिक कार्रवाई की मांग भी की है।

आध्यात्मिक नेतृत्व की नई परिभाषा पर बहस

इस घटनाक्रम ने धार्मिक परंपरा, सामाजिक समावेशन और आध्यात्मिक नेतृत्व की नई परिभाषा को लेकर बहस को जन्म दिया है। एक ओर इसे किन्नर समुदाय की धार्मिक भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर परंपरा बनाम परिवर्तन का सवाल भी सामने आ गया है। पुष्कर पीठ से जुड़कर हिमांगी सखी का यह नया अध्याय आने वाले समय में व्यापक धार्मिक और सामाजिक विमर्श को प्रभावित कर सकता है।