PM मोदी ने 24 घंटे में दूसरी बार की अपील,पेट्रोल-डीजल बचाएं, सोने की खरीद टालें और अपनाएं ‘वोकल फॉर लोकल
प्रधानमंत्री मोदी की सोने न खरीदने की अपील के बाद ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल सोने के आयात शुल्क में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है, जिससे बाजार का डर दूर हुआ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे के भीतर दो बार देशवासियों से सोने की खरीद न करने की अपील की. पहले तेलंगाना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने गोल्ड की खरीद न करने पर जोर दिया और अब गुजरात में भी जनसभा के दौरान यही संदेश दोहराया.
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से 24 घंटे के भीतर दूसरी बार विशेष अपील करते हुए ऊर्जा बचत, विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम करने और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। गुजरात के वडोदरा में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह देश के संसाधनों पर बोझ कम करने में सहयोग करे। उन्होंने पेट्रोल-डीजल का कम उपयोग करने, सोने की गैरजरूरी खरीद से बचने, कार पूलिंग अपनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की सलाह दी।
पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण इसकी कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में यदि नागरिक ईंधन की खपत कम करेंगे तो इससे देश की विदेशी मुद्रा की बचत होगी। उन्होंने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और सार्वजनिक परिवहन या कार पूलिंग का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यदि हर नागरिक थोड़ी-थोड़ी बचत करने का संकल्प ले, तो उसका बड़ा प्रभाव दिखाई देगा। पीएम ने इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को भी समय की जरूरत बताते हुए कहा कि इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
‘वर्क फ्रॉम होम’ और वर्चुअल मीटिंग पर जोर
प्रधानमंत्री ने डिजिटल टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग का जिक्र करते हुए कहा कि अब तकनीक ने काम करने के तरीके को आसान बना दिया है। उन्होंने सरकारी और निजी कार्यालयों से आग्रह किया कि जहां संभव हो, वहां वर्चुअल मीटिंग और ‘वर्क फ्रॉम होम’ को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान देश ने डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया था और अब फिर से उसी अनुभव का लाभ उठाने की आवश्यकता है। इससे ईंधन की खपत कम होगी, ट्रैफिक दबाव घटेगा और समय की भी बचत होगी।
प्रधानमंत्री ने कहा, “डिजिटल टेक्नोलॉजी हमारे लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। हमें इसका ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाना चाहिए।”
सोने की खरीद टालने की सलाह
प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से अपील की कि फिलहाल गैरजरूरी सोने की खरीद से बचें। उन्होंने कहा कि भारत हर साल बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा का भारी खर्च होता है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह जरूरी है कि लोग जरूरत पड़ने पर ही सोने की खरीद करें।
उन्होंने कहा कि जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक लोग अपनी खरीदारी की प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करें और देशहित को ध्यान में रखते हुए फैसले लें। पीएम ने कहा कि छोटी-छोटी सावधानियां भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
‘वोकल फॉर लोकल’ को जन आंदोलन बनाने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थानीय उत्पादों को अपनाना बेहद जरूरी है। लोगों से विदेशी वस्तुओं के बजाय भारत में बने सामान खरीदने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि इससे देश के छोटे व्यापारियों, कारीगरों और उद्यमियों को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा, “अपने गांव, अपने शहर और अपने देश के उद्यमियों को सशक्त बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है। अगर हम स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देंगे तो देश की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी।”
वैश्विक संकटों का भारत पर असर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दुनिया लगातार अस्थिर परिस्थितियों से गुजर रही है। पहले कोरोना महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया और अब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों ने नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं।
उन्होंने कहा कि इन हालातों का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। सप्लाई चेन प्रभावित होने से कई वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं और आयात पर खर्च भी बढ़ता जा रहा है।
पीएम ने कहा कि कोविड महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी और पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष इस दशक के बड़े संकटों में से एक बनता जा रहा है। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि जिस तरह देशवासियों ने कोरोना काल में एकजुट होकर चुनौतियों का सामना किया था, उसी तरह मौजूदा संकट से भी देश मजबूती से बाहर निकलेगा।
देश के संसाधनों पर बोझ कम करने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी देश किसी बड़े संकट या युद्ध जैसी स्थिति से गुजरा है, तब नागरिकों ने जिम्मेदारी निभाते हुए सरकार का सहयोग किया है। उन्होंने कहा कि आज फिर उसी सामूहिक भावना की जरूरत है।
उन्होंने नागरिकों से विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम करने और रोजमर्रा की जिंदगी में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की अपील की। पीएम ने कहा कि अनावश्यक खर्च और विदेशी वस्तुओं के उपयोग में कमी लाकर देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है।
“हर छोटा प्रयास मायने रखता है”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि देशहित में किया गया हर छोटा प्रयास महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, उसी तरह हर नागरिक का छोटा योगदान भी बड़े बदलाव का कारण बन सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर देश के 140 करोड़ लोग जिम्मेदारी के साथ संसाधनों का उपयोग करें, तो भारत वैश्विक चुनौतियों का सामना और अधिक मजबूती से कर सकेगा। पीएम ने नागरिकों से संयम, सहयोग और आत्मनिर्भरता की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस