प्रयागराज से भोपाल तक सियासी हलचल : उमंग सिंघार के बयान से गरमाई राजनीति, मोहन यादव पर जमीन और भ्रष्टाचार के आरोप,कहा- देखते हैं पीएम मोदी कब कार्रवाई करते हैं

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उमंग सिंघार ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार “न खाऊंगा, न खाने दूंगा” जैसे नारे देती है तो फिर कथित भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं होती।

प्रयागराज से भोपाल तक सियासी हलचल : उमंग सिंघार के बयान से गरमाई राजनीति, मोहन यादव पर जमीन और भ्रष्टाचार के आरोप,कहा- देखते हैं पीएम मोदी कब कार्रवाई करते हैं

अखिलेश यादव को लेकर बयान पर सियासी घमासान, उमंग सिंघार के आरोपों से गरमाई राजनीति
प्रयागराज में कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar के बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav पर तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav से इतना लगाव है तो उन्हें उत्तर प्रदेश ही बुला लें। इस बयान के बाद सियासी हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
उमंग सिंघार गुरुवार को प्रयागराज में कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे पेपर लीक मुद्दे पर देशव्यापी अभियान के तहत आयोजित प्रेस वार्ता में शामिल हुए थे। इसी दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार और जमीन से जुड़े मामलों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनकी जांच आवश्यक है।
पीएम मोदी पर भी साधा निशाना
प्रेस वार्ता के दौरान उमंग सिंघार ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार “न खाऊंगा, न खाने दूंगा” जैसे नारे देते रहे हैं, लेकिन अब सवाल यह उठता है कि वे अपने “प्रिय मुख्यमंत्री” के खिलाफ कार्रवाई कब करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो केंद्र सरकार को इस पर गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
सिंघार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के गृह क्षेत्र उज्जैन में आम लोगों के लिए जमीन और मकान बनाना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर निर्माण सामग्री की कीमतें असामान्य रूप से बढ़ी हुई हैं और स्थानीय स्तर पर कथित रूप से कुछ प्रभावशाली लोगों का दबदबा है।
जमीन खरीद और संपत्ति वृद्धि के आरोप
उमंग सिंघार ने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में मुख्यमंत्री और उनके परिवार की संपत्ति में तेजी से वृद्धि हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम जनता की आर्थिक स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ, तो फिर यह संपत्ति वृद्धि कैसे हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला गंभीर जांच का विषय है।
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि पार्टी इस पूरे मामले को आगामी विधानसभा सत्र में तथ्यों और दस्तावेजों के साथ मजबूती से उठाएगी। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे कई दस्तावेज हैं जो कथित अनियमितताओं की ओर इशारा करते हैं।
168 एकड़ जमीन को लेकर विवाद
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़े कथित जमीन विवाद को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार ने उज्जैन क्षेत्र में करीब 168 एकड़ जमीन खरीदी है। पार्टी ने दावा किया कि ये जमीनें उन क्षेत्रों में ली गईं, जहां बाद में सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और सड़क निर्माण योजनाओं की घोषणा हुई।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि इन जमीन सौदों में हितों का टकराव (कन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) की स्थिति बनती है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
सिंहस्थ मेला क्षेत्र में भूमि विवाद का आरोप
उमंग सिंघार ने यह भी दावा किया कि उज्जैन के सिंहस्थ मेला क्षेत्र में भूमि आवंटन से जुड़े मामलों में अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन कथित रूप से एक रुपये के नाममात्र मूल्य पर एक ट्रस्ट को दी गई, जो मुख्यमंत्री से जुड़े एक सलाहकार से संबंधित बताया जा रहा है।
हालांकि इन सभी आरोपों को लेकर कांग्रेस ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए जांच की मांग की है, वहीं भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
भाजपा और सरकार का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस के सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। पार्टी का कहना है कि यह राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित अभियान है और इसका उद्देश्य केवल सरकार की छवि खराब करना है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी स्पष्ट किया गया है कि Mohan Yadav के पद संभालने के बाद उनके परिवार ने कोई नई कृषि भूमि नहीं खरीदी है। सरकार का दावा है कि जिन जमीनों का उल्लेख किया जा रहा है, वे या तो पहले से परिवार के स्वामित्व में थीं या फिर मास्टर प्लान लागू होने से पहले खरीदी गई थीं।
सियासी बयानबाजी तेज
इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रहा है।
उमंग सिंघार के बयान “अगर अखिलेश यादव को मोहन यादव से इतना प्यार है तो उन्हें यूपी बुला लें” ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा बढ़ा दी है। कई नेताओं ने इसे तीखा राजनीतिक कटाक्ष बताया है, जबकि कुछ ने इसे अनावश्यक बयानबाजी करार दिया है।
आगे क्या?
आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे पर और अधिक बहस होने की संभावना है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह दस्तावेजों के आधार पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाएगी, जबकि भाजपा ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह इन आरोपों का कड़ा जवाब देगी।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है, लेकिन जैसे-जैसे विधानसभा सत्र नजदीक आएगा, इस मुद्दे पर और तेज बहस देखने को मिल सकती है।