नरेला की वोटर लिस्ट में हजारों फर्जी नाम:दिग्विजय सिंह ने चुनाव आयोग को सौंपे सबूत, आयोग से जांच और कार्रवाई की मांग

दिग्विजय सिंह ने चुनाव आयोग से पूरे मामले की जांच कर फर्जी नामों को हटाने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आयोग ने शिकायत और दस्तावेज स्वीकार करते हुए मामले की जांच का आश्वासन दिया है।

नरेला की वोटर लिस्ट में हजारों फर्जी नाम:दिग्विजय सिंह ने चुनाव आयोग को सौंपे सबूत, आयोग से जांच और कार्रवाई की मांग

एक ही पते पर 40 से 70 तक मतदाताओं के नाम दर्ज होने का आरोप, मकान मालिकों के शपथपत्र भी सौंपे

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता सूची को लेकर विवाद शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह शुक्रवार को मध्यप्रदेश निर्वाचन कार्यालय पहुंचे और भोपाल की नरेला विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंपे।

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद Digvijaya Singh ने भोपाल के नरेला विधानसभा क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर फर्जी मतदाताओं के नाम शामिल किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने प्रमाण सहित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्य प्रदेश को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है। इसके तहत बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर 100 प्रतिशत भौतिक सत्यापन किया जाना होता है, ताकि मृत अथवा प्रवासी व्यक्तियों के नाम हटाए जा सकें और नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकें। लेकिन नरेला विधानसभा क्षेत्र में इस प्रक्रिया की मंशा के विपरीत बड़ी संख्या में फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े जाने के प्रमाण सामने आए हैं।

उन्होंने बताया कि नरेला विधानसभा के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी मनोज शुक्ला ने मतदाता सूची की जमीनी स्तर पर जांच की। जांच में पाया गया कि 21 फरवरी 2026 को जारी अंतिम मतदाता सूची में कई ऐसे मतदाताओं के नाम दर्ज हैं, जो संबंधित पते पर निवास ही नहीं करते।

इस संबंध में रतन कॉलोनी, करोंद के कई मकान मालिकों ने भी आपत्ति दर्ज कराई है। इनमें पोखनलाल साहू (मकान नंबर 2), कमलेंद्र कुमार गुप्ता (मकान नंबर 10) और हमीर सिंह यादव (मकान नंबर 21) शामिल हैं।

मकान मालिकों ने शपथपूर्वक बताया कि उनके घरों में रहने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है, लेकिन मतदाता सूची में उसी पते पर दर्ज मतदाताओं की संख्या कई गुना अधिक है। पोखनलाल साहू के घर में केवल 6 लोग रहते हैं, जबकि सूची में उनके पते पर करीब 65 मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। इसी तरह हमीर सिंह यादव के घर में 4–5 लोग रहते हैं, लेकिन उनके पते पर लगभग 45 मतदाताओं के नाम दर्ज हैं।

एक अन्य मामले में कमलेंद्र कुमार गुप्ता के घर में 8 सदस्य रहते हैं, जबकि पहली सूची में उनके पते पर 70 नाम दर्ज पाए गए। एसआईआर प्रक्रिया के बाद भी 40 से 45 नाम उसी पते पर बने हुए हैं।

मकान मालिकों का कहना है कि वे इन नामित व्यक्तियों को पहचानते तक नहीं हैं और वे कभी उनके मकान में निवास नहीं करते। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में यदि कोई आपराधिक या अन्य घटना घटती है तो अनावश्यक रूप से उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

दिग्विजय सिंह ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मांग की है कि मकान मालिकों द्वारा प्रस्तुत शपथपत्रों के आधार पर इन फर्जी मतदाताओं के नाम तत्काल मतदाता सूची से हटाए जाएं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्य प्रदेश ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि प्रस्तुत शिकायत और प्रमाणों की विधिवत जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

एक घर में 37 मतदाताओं के नाम

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल भोपाल की नरेला विधानसभा क्षेत्र में आने वाले रतन कालोनी, करोंद के मोहन लाल साहू को भी लेकर पहुंचे. मोहन लाल साहू ने बताया कि “मेरे मकान में 65 फर्जी मतदाताओं के नाम जुड़े हुए थे. शिकायत के बाद नाम हटे, लेकिन अभी भी 37 नाम और जुड़े हुए हैं.” रतन कॉलोनी के वार्ड नंबर 50 के अनिल सिंह यादव ने बताया कि “उनके घर में 45 नाम जुड़े हुए हैं. जबकि मेरे घर में 4 सदस्य ही हैं. शिकायत की है कि बाकी नाम काटे जाएं.”

रतन कॉलोनी में रहने वाले कमलेन्द्र कुमार गुप्ता ने बताया कि “वह 2007 से रह रहे हैं. एसआईआर से पहले मेरे घर से 70 फर्जी नाम जुड़े हुए थे, एसआईआर के दौरान यह सभी फर्जी नाम हटाए जाने के लिए कहा गया था. एसआईआर के बाद हमारे 8 सदस्यों के बाद भी 42 नाम और जुड़े हुए हैं. इन्हें हम जानते ही नहीं हैं. इनमें कई विभिन्न जातियों के लोग शामिल हैं. मैं भी सरकारी विभाग में 43 साल इंजीनियर रहा हूं. एआरओ रहा हूं, आरओ रहा हूं. जब तब मेरी सहमति नहीं होगी, कैसे कोई नया नाम जोड़ सकता है. यदि मकान नंबर गलत है तो उसे सुधार किया जाए, या फिर फर्जी नाम हटाए जाएं.”

1980 से रहने वाले मतदाता का नाम काटा

कांग्रेस प्रतिनिधि भोपाल की दक्षिण पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के सूरज नगर में रहने वाले काजिद भाई को साथ लेकर पहुंचे. पूर्व कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि “इनका पूरा परिवार 1980 से सूरज नगर में रह रहा है, लेकिन इनका नाम काटने के लिए बीजेपी के पदाधिकारियों ने शिकायत की थी. इसकी थाने में शिकायत दर्ज कराई. संबंधित एडीएम को भी शिकायत की है, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

फार्म नंबर 7 के जरिए शिकायतें कर नाम काटे गए. जिनके नाम काटे गए उनमें अधिकतर अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदाय के मतदाता ही हैं. प्रिंटेड फॉर्म बीजेपी से छपवाकर आपत्तियां दी गई. यह पूरे भोपाल ही नहीं, मध्य प्रदेश में हुआ है.”