जीतू पटवारी की बढ़ी मुश्किलें: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं पर FIR, शासकीय कार्य में बाधा डालने का आरोप
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं. दरअसल, जीतू पटवारी समेत दर्जनों कांग्रेसी कार्यकर्ताओं पर FIR दर्ज की गई है
जीतू पटवारी समेत दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर FIR
ढोडन बांध क्षेत्र में बैरिकेड तोड़ने का आरोप
शासकीय कार्य में बाधा डालने पर वन विभाग सख्त
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष Jeetu Patwari की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। छतरपुर जिले के ढोडन बांध क्षेत्र में विस्थापित आदिवासी किसानों से मुलाकात करने पहुंचे जीतू पटवारी और उनके साथ मौजूद दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वन विभाग ने उन पर प्रतिबंधित क्षेत्र में जबरन प्रवेश करने, बैरिकेड तोड़ने और शासकीय कार्य में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
यह मामला उस समय सामने आया जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ढोडन बांध क्षेत्र में केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों की समस्याएं सुनने पहुंचे थे। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण भी उनके साथ मौजूद थे। वन विभाग का कहना है कि जिस क्षेत्र में प्रवेश किया गया, वह कोर एरिया घोषित है और वहां बिना अनुमति किसी भी व्यक्ति के जाने पर रोक है। सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन आरोप है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड के पास से अंदर प्रवेश किया और अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी की।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा इलाका संवेदनशील वन क्षेत्र में आता है। विभाग का कहना है कि बिना अनुमति प्रवेश से वन्यजीव संरक्षण नियमों का उल्लंघन हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 27 और 30 सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। विभाग द्वारा मौके की वीडियोग्राफी भी कराई गई थी और अब उसी के आधार पर लोगों की पहचान की जा रही है।
वन विभाग के एडी देवेंद्र अहिरवार सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह कोर एरिया है, जहां आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से स्पष्ट बैरिकेडिंग की गई थी और चेतावनी भी दी गई थी, इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन किया गया। उन्होंने बताया कि जीतू पटवारी और उनके साथ मौजूद अन्य लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर कांग्रेस इस पूरे मामले को राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी केवल विस्थापित आदिवासी किसानों की समस्याएं सुनने और उनकी आवाज उठाने के लिए वहां पहुंची थी। उनका आरोप है कि सरकार आदिवासियों की समस्याओं को दबाने के लिए विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई कर रही है।
दरअसल, केन-बेतवा परियोजना और उससे जुड़ी बांध योजनाओं को लेकर लंबे समय से स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय में नाराजगी देखी जा रही है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला और विस्थापन की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। कई गांवों के लोग लगातार पुनर्वास और मुआवजे को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
इससे पहले सोमवार को पन्ना जिले में भी जीतू पटवारी ने रूंज डैम परियोजना और मजगवां डैम परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों के साथ मुआवजे के नाम पर छलावा किया गया है और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है।
जीतू पटवारी ने कहा कि आदिवासी परिवार वर्षों से अपनी जमीन और आजीविका बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कई परिवारों को अभी तक उचित पुनर्वास नहीं मिला और प्रशासन केवल कागजों में योजनाओं को सफल बताने में लगा हुआ है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आदिवासी समुदाय को भरोसा दिलाया कि पार्टी उनकी लड़ाई हर स्तर पर लड़ेगी और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती रहेगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। एक ओर कांग्रेस इसे आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और वन विभाग नियमों के उल्लंघन को लेकर सख्त कार्रवाई की बात कर रहे हैं। ऐसे में यह विवाद अब राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है।
मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी मुद्दे हमेशा से अहम रहे हैं। खासतौर पर बुंदेलखंड और वन क्षेत्रों में विस्थापन, वन अधिकार और मुआवजा जैसे मुद्दों पर राजनीतिक दल लगातार सक्रिय रहते हैं। ऐसे समय में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पर एफआईआर दर्ज होने से राजनीतिक माहौल और गर्माने की संभावना है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि वन विभाग की कार्रवाई आगे किस स्तर तक पहुंचती है और कांग्रेस इस मुद्दे को किस तरह राजनीतिक आंदोलन का रूप देती है। फिलहाल वीडियो फुटेज के आधार पर लोगों की पहचान की जा रही है और आने वाले दिनों में मामले में और नाम सामने आ सकते हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस