राज्यसभा विवाद में कांग्रेस की अंदरूनी कलह आई सामने, नेताओं की तकरार ने बढ़ाई पार्टी की मुश्किलें

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिग्विजय सिंह से मीडिया को संबोधित करने का आग्रह किया, लेकिन दिग्विजय सिंह ने बोलने से इनकार कर दिया। कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद वे बोलने के लिए तैयार नहीं हुए।

राज्यसभा विवाद में कांग्रेस की अंदरूनी कलह आई सामने, नेताओं की तकरार ने बढ़ाई पार्टी की मुश्किलें

मध्य प्रदेश में जहां कांग्रेस पार्टी राज्यसभा चुनाव के फेर में फंसी हुई है. राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस संगठन के भीतर असंतोष उभरकर सामने आ रहा है. एक तरफ कांग्रेस पार्टी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लेकर गई है, तो वहीं कई नेताओं की सोशल मीडिया पोस्ट से यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है.

भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर मचा सियासी घमासान अब कांग्रेस के लिए केवल कानूनी और राजनीतिक लड़ाई तक सीमित नहीं रह गया है। पार्टी प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस जहां चुनाव आयोग और भाजपा पर लगातार हमलावर है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच सामने आए मतभेदों ने संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस से लेकर धरना स्थल तक कांग्रेस नेताओं के बीच हुई नोकझोंक के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखी असहज स्थिति

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित की गई थी। इस दौरान कांग्रेस नेतृत्व चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने और अपनी कानूनी रणनीति को सामने रखने की तैयारी में था। लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने पार्टी की अंदरूनी स्थिति को उजागर कर दिया।

बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने कानूनी पहलुओं पर जानकारी देने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता को बोलने का संकेत दिया। इसी दौरान प्रदेश कांग्रेस प्रभारी Harish Chaudhary ने कार्यक्रम संचालन को लेकर आपत्ति जताई और कहा कि प्रेस वार्ता तय प्रक्रिया के अनुसार चलेगी। दोनों नेताओं के बीच हुई इस स्थिति ने कार्यक्रम में मौजूद नेताओं और मीडिया को असहज कर दिया।

घटना के बाद दिग्विजय सिंह ने हाथ जोड़कर प्रतिक्रिया दी और मीडिया से दूरी बना ली। कार्यक्रम के दौरान कई नेताओं ने उनसे अपनी बात रखने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने बोलने से इनकार कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और कांग्रेस के भीतर मतभेदों की चर्चा शुरू हो गई।

धरना स्थल पर भी दिखी नेताओं की अलग-अलग सोच

राज्यसभा नामांकन विवाद को लेकर कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर देर रात तक धरना दिया। पार्टी नेताओं ने चुनाव आयोग के फैसले को पक्षपातपूर्ण बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

धरना समाप्त होने के बाद जब पत्रकारों ने आगे की रणनीति के बारे में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari से सवाल किया तो उन्होंने नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar की ओर इशारा करते हुए कहा कि आगे की रणनीति उमंग सिंघार बताएंगे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “उमंग बताएगा, उमंग से पूछो, कहां है उमंग?”

इस पर उमंग सिंघार ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “तू ही बता दे।” हालांकि बाद में उन्होंने मीडिया को पार्टी की रणनीति और आगामी कदमों की जानकारी दी, लेकिन नेताओं के बीच हुई यह बातचीत कैमरों में रिकॉर्ड हो गई और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही यह बातचीत हल्के-फुल्के अंदाज में हुई हो, लेकिन ऐसे समय में जब पार्टी एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का सामना कर रही है, इस तरह के दृश्य विपक्ष को हमला करने का अवसर दे सकते हैं।

नामांकन निरस्त होने से बढ़ा विवाद

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होना पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है। कांग्रेस का आरोप है कि उसके प्रत्याशी के नामांकन पर तकनीकी आधारों का सहारा लेकर कार्रवाई की गई, जबकि उसकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया।

पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं बरती गई और भाजपा को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने न्यायिक लड़ाई का रास्ता भी चुना है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। पार्टी को उम्मीद है कि अदालत में उसे राहत मिल सकती है।

भाजपा ने घेरा कांग्रेस को

कांग्रेस नेताओं के बीच सामने आए मतभेदों के वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा ने इस मुद्दे को हाथोंहाथ लिया है। भाजपा नेताओं और समर्थक सोशल मीडिया हैंडल्स पर इन वीडियो को साझा कर कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं।

भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस और गुटबाजी चरम पर पहुंच चुकी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्यसभा चुनाव ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है और पार्टी के विभिन्न गुट अब खुलकर सामने आने लगे हैं।

सत्तारूढ़ दल का यह भी दावा है कि कांग्रेस पहले अपने संगठन को संभाले, उसके बाद चुनाव आयोग और अन्य संस्थाओं पर सवाल उठाए।

कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस इस समय दो मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। पहला मोर्चा कानूनी और राजनीतिक है, जहां पार्टी चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दे रही है। दूसरा मोर्चा संगठनात्मक है, जहां नेताओं के बीच समन्वय और एकजुटता बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।

विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस भाजपा के खिलाफ मजबूत राजनीतिक संदेश देना चाहती है, लेकिन नेताओं के बीच सामने आ रही असहमति उस प्रयास को कमजोर कर सकती है। पार्टी के लिए यह जरूरी होगा कि वह सार्वजनिक मंचों पर एकजुटता का प्रदर्शन करे और संगठन के भीतर मौजूद मतभेदों को नियंत्रित करे।

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और राज्यसभा चुनाव से जुड़े घटनाक्रम पर अब सबकी नजरें टिकी हुई हैं। यदि कांग्रेस को कानूनी राहत मिलती है तो राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। वहीं यदि राहत नहीं मिलती है तो पार्टी को राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर नुकसान झेलना पड़ सकता है।

फिलहाल राज्यसभा चुनाव का विवाद कांग्रेस के लिए केवल एक चुनावी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह उसके संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व क्षमता और आंतरिक समन्वय की भी परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस चुनौती से कैसे निपटती है और क्या वह अपने नेताओं के बीच दिखाई दे रहे मतभेदों को दूर कर पाती है या नहीं।

दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के बीच थी ठनी!

जब रिटर्निंग ऑफिसर की तरफ से मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया था, तो कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के बीच तनातनी दिखी. इस दौरान दिग्विजय हाथ के इशारे से किसी को माइक देने की बात कहना चाह रहे थे, तो प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने उन्हें रोक दिया. इसके बाद दिग्विजय हाथ जोड़ते हुए नजर आए. बाद में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिग्विजय को बोलने के लिए माइक देना चाहा, तो उन्होंने साफ मना कर दिया. बाद में वह पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में खामोश ही रहे. इस तनाव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था.