CM की घोषणा के 48 घंटे बाद तीसरी संतान वाले अफसर बर्खास्त, मध्य प्रदेश में नियमों को लेकर नया विवाद

मध्यप्रदेश में तीसरी संतान के आधार पर एक अफसर की नौकरी चली गई। आईजी पंजीयन अमित तोमर ने गुरुवार को सिंगरौली के सब रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया।

CM की घोषणा के 48 घंटे बाद तीसरी संतान वाले अफसर बर्खास्त, मध्य प्रदेश में नियमों को लेकर नया विवाद

सिंगरौली के पंजीयन कार्यालय में तैनात उप पंजीयक अशोक परिहार को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश भोपाल से जारी.

सिंगरौली/भोपाल। मध्य प्रदेश में दो से अधिक संतान वाले शासकीय कर्मचारियों और अभ्यर्थियों से जुड़े नियमों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। सिंगरौली जिले में पदस्थ उप पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) अशोक सिंह परिहार को तीसरी संतान होने के आधार पर शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब कुछ ही दिन पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दो से अधिक संतान वाले व्यक्तियों को सरकारी सेवा से अपात्र ठहराने संबंधी प्रस्ताव को निरस्त करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री की घोषणा और विभागीय कार्रवाई के बीच आए इस विरोधाभास ने प्रशासनिक और कानूनी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।

जानकारी के अनुसार, सिंगरौली जिला पंजीयन कार्यालय में पदस्थ उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शासकीय सेवा में रहते हुए उनकी तीसरी संतान का जन्म वर्ष 2003 में हुआ था। यह जन्म उस अवधि में हुआ, जब राज्य में दो से अधिक जीवित संतान वाले कर्मचारियों और अभ्यर्थियों के संबंध में विशेष नियम लागू थे।

शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन की ओर से एक समिति गठित की गई। समिति ने दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच की तथा पाया कि अशोक परिहार की तीसरी संतान का जन्म वास्तव में वर्ष 2003 में हुआ था। जांच रिपोर्ट में इस तथ्य की पुष्टि होने के बाद मामला पंजीयन विभाग और महानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय भोपाल को भेजा गया।

जांच रिपोर्ट के आधार पर महानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए अशोक परिहार की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। यह आदेश गुरुवार को जारी हुआ और शुक्रवार को सार्वजनिक रूप से सामने आया। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार का मामला दुर्लभ है और संभवतः किसी अधिकारी के खिलाफ इस आधार पर की गई पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

जांच के दौरान उप पंजीयक अशोक परिहार ने अपना पक्ष भी रखा। उन्होंने विभाग को दिए गए जवाब में कहा कि उन्हें दो से अधिक संतान संबंधी नियम की जानकारी नहीं थी। उनका यह भी कहना था कि विभाग की ओर से इस नियम के बारे में कोई विशेष जानकारी या मार्गदर्शन नहीं दिया गया था। हालांकि विभाग ने उनके इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया कि अशोक परिहार वर्ष 1992 से नियमित शासकीय सेवा में कार्यरत थे। इतने लंबे समय तक सरकारी सेवा में रहने वाले कर्मचारी द्वारा सेवा नियमों की जानकारी न होने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। विभाग का मानना है कि शासकीय सेवक होने के नाते उन्हें सेवा संबंधी नियमों और अधिसूचनाओं की जानकारी होना आवश्यक था।

इस पूरे मामले को और अधिक चर्चित बनाने वाली बात यह है कि कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की हालिया घोषणा के ठीक बाद हुई है। मुख्यमंत्री ने 9 जून को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के उस मसौदा प्रावधान को निरस्त करने के निर्देश दिए थे, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को शासकीय सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रस्ताव शामिल था।

मुख्यमंत्री ने न केवल उक्त ड्राफ्ट को निरस्त करने के निर्देश दिए, बल्कि उसे संबंधित पोर्टल से हटाने और संशोधित प्रस्ताव तैयार करने को भी कहा था। इस घोषणा के बाद व्यापक रूप से यह माना जा रहा था कि दो से अधिक संतान से जुड़े मामलों में सरकार नरम रुख अपना सकती है और कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। लेकिन इसके कुछ ही दिनों बाद सिंगरौली के उप पंजीयक के खिलाफ हुई कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

पंजीयन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद अभी तक इस विषय में कोई संशोधित शासकीय आदेश जारी नहीं हुआ है। जब तक सरकार की ओर से औपचारिक अधिसूचना या संशोधित नियम लागू नहीं किए जाते, तब तक विभागों को वर्तमान में प्रभावी नियमों का पालन करना होगा। इसी आधार पर अशोक परिहार के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

जिला पंजीयक अधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि बर्खास्तगी का आदेश महानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय भोपाल से जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि नए नियमों के संबंध में विभाग को अब तक कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। यदि शासन की ओर से भविष्य में कोई नया आदेश जारी किया जाता है, तो उसका पालन किया जाएगा।

इस मामले में लागू नियम की बात करें तो 10 मार्च 2000 को जारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे व्यक्ति, जिनकी दो से अधिक जीवित संतान हैं और जिनमें से किसी एक संतान का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है, वे शासकीय सेवा के लिए पात्र नहीं माने जाते। जांच में पाया गया कि अशोक परिहार की तीसरी संतान का जन्म वर्ष 2003 में हुआ था, जो इस अधिसूचना के दायरे में आता है। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आगे और जटिल हो सकता है। एक ओर मुख्यमंत्री की सार्वजनिक घोषणा है, वहीं दूसरी ओर पुराने नियमों के आधार पर की गई विभागीय कार्रवाई है। यदि भविष्य में सरकार इस नियम को औपचारिक रूप से समाप्त या संशोधित करती है, तो अशोक परिहार जैसे मामलों में कानूनी पुनर्विचार की संभावना बन सकती है।

फिलहाल अशोक परिहार के पास विभागीय अपील का अधिकार उपलब्ध है। वे शासन स्तर पर बर्खास्तगी आदेश को चुनौती दे सकते हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर राहत की मांग कर सकते हैं। यदि अदालत में मामला पहुंचता है तो मुख्यमंत्री की घोषणा, वर्तमान नियमों की स्थिति और विभागीय कार्रवाई के आधार पर विस्तृत कानूनी बहस देखने को मिल सकती है।

यह मामला केवल एक अधिकारी की बर्खास्तगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक निर्णयों, सेवा नियमों और सरकारी घोषणाओं के बीच सामंजस्य के सवाल को भी सामने लाता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार इस विषय में कब और क्या नया आदेश जारी करती है तथा अशोक परिहार की ओर से आगे क्या कानूनी कदम उठाए जायँगे