MP राज्यसभा चुनाव: तीसरी सीट के लिए BJP की बड़ी तैयारी, पूर्व मंत्री समेत कई दिग्गज नेताओं की दावेदारी
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा की दो सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं, लेकिन पार्टी तीसरी सीट पर भी दांव लगाने की रणनीति बना रही है। इस बीच पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, नरोत्तम मिश्रा और प्रदेश उपाध्यक्ष कांतदेव सिंह जैसे नेताओं के नाम संभावित उम्मीदवारों में चर्चा में हैं। वहीं जॉर्ज कुरियन, लाल सिंह आर्य और सुमेर सिंह सोलंकी को दोबारा मौका मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
MP राज्यसभा चुनाव: तीसरी सीट पर भी BJP की नजर, सवर्ण चेहरे और कांग्रेस सेंधमारी की रणनीति
मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं और राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए दो सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं, लेकिन अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तीसरी सीट को लेकर तेज हो गई है। माना जा रहा है कि भाजपा सिर्फ दो सीटों तक सीमित रहने के बजाय तीसरी सीट पर भी दांव खेलने की तैयारी में है।
इस बीच संभावित उम्मीदवारों के नाम भी चर्चा में आ गए हैं। भाजपा इस बार किसी सवर्ण चेहरे को मौका दे सकती है। पूर्व मंत्री, वरिष्ठ संगठन पदाधिकारी और लंबे समय से पार्टी से जुड़े नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। वहीं कांग्रेस भी इस संभावित रणनीति को देखते हुए अपनी तैयारी मजबूत कर रही है।
तीसरी सीट पर BJP की रणनीति
मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा के पास मजबूत बहुमत है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पार्टी के पास दो सीटें जीतने के बाद भी कुछ वोट बच सकते हैं। यही वजह है कि भाजपा तीसरी सीट पर भी राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है।
राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा ऐसा उम्मीदवार उतार सकती है जो कांग्रेस में भी प्रभाव रखता हो और क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक समर्थन जुटाने की क्षमता रखता हो। इसी संदर्भ में पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस से भाजपा में आए नेता सुरेश पचौरी का नाम चर्चा में सामने आया है।
सुरेश पचौरी लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और मध्य प्रदेश कांग्रेस में उनका प्रभाव रहा है। भाजपा यदि तीसरी सीट पर दांव लगाती है तो उनके अनुभव और राजनीतिक संपर्कों को अहम माना जा सकता है।
अरविंद भदौरिया की मजबूत दावेदारी
राज्यसभा की संभावित सूची में पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। चंबल क्षेत्र से आने वाले भदौरिया भाजपा संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं।
2023 विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद उनका राजनीतिक प्रभाव कम नहीं माना जाता। 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने और भाजपा सरकार बनने के दौरान हुई राजनीतिक उठापटक में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई थी।
अरविंद भदौरिया दो बार विधायक रह चुके हैं और मंत्री पद भी संभाल चुके हैं। पार्टी संगठन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पृष्ठभूमि से जुड़ाव उनकी दावेदारी को मजबूत बनाता है। भाजपा यदि सवर्ण चेहरे पर भरोसा करती है तो उनका नाम सबसे आगे माना जा सकता है।
कांतदेव सिंह भी रेस में
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष कांतदेव सिंह भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल बताए जा रहे हैं। विंध्य क्षेत्र से आने वाले कांतदेव सिंह को संगठन का जमीनी नेता माना जाता है।
वे लंबे समय से संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय हैं और क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर भी फैसला कर सकती है।
कांतदेव सिंह क्षत्रिय समाज के प्रभावशाली चेहरे के रूप में देखे जाते हैं। साथ ही उनका संघ से जुड़ाव भी उनकी दावेदारी को मजबूत बना सकता है।
नरोत्तम मिश्रा पर भी नजर
पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा का नाम भी राज्यसभा उम्मीदवारों की चर्चा में लगातार बना हुआ है।
नरोत्तम मिश्रा लंबे समय तक प्रदेश राजनीति में सक्रिय रहे हैं और संगठन व सरकार दोनों स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पिछले कुछ समय से उन्हें नई जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा भी चल रही है।
हालांकि राजनीतिक समीकरणों में दतिया सीट पर संभावित उपचुनाव और उनकी भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि उपचुनाव की स्थिति बनती है तो पार्टी उन्हें प्रदेश राजनीति में ही सक्रिय रख सकती है।
दूसरी ओर यह संभावना भी जताई जा रही है कि भविष्य में मोहन यादव सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। ऐसी स्थिति में भाजपा किसी वरिष्ठ नेता को राज्यसभा भेजकर मंत्रिमंडल में नई जगह बनाने की रणनीति भी अपना सकती है।
जॉर्ज कुरियन की रिपीटिंग पर भी चर्चा
केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल बताया जा रहा है। वे केंद्र सरकार में मत्स्य पालन, पशुपालन और अल्पसंख्यक मामलों से जुड़े विभागों में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
भाजपा उन्हें दोबारा राज्यसभा भेज सकती है क्योंकि दक्षिण भारत विशेषकर केरल में पार्टी विस्तार की रणनीति में उन्हें महत्वपूर्ण चेहरा माना जाता है।
इसके अलावा पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य और वर्तमान सांसद सुमेर सिंह सोलंकी के नाम पर भी चर्चा बनी हुई है। पार्टी सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक समीकरणों को देखते हुए इनमें से किसी चेहरे को आगे कर सकती है।
कांग्रेस की रणनीति और कमलनाथ फैक्टर
भाजपा की सक्रियता को देखते हुए कांग्रेस भी राज्यसभा चुनाव को लेकर सतर्क दिखाई दे रही है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को मैदान में उतार सकती है।
यदि कमलनाथ राज्यसभा उम्मीदवार बनते हैं तो चुनाव काफी दिलचस्प हो सकता है। लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहने वाले कमलनाथ की दिल्ली में मजबूत पकड़ मानी जाती है।
राज्यसभा जाने की स्थिति में उनकी राष्ट्रीय राजनीति में वापसी भी संभव मानी जा रही है। साथ ही कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने और संगठन को मजबूत संदेश देने की कोशिश कर सकती है।
दिलचस्प हो सकता है मुकाबला
मध्य प्रदेश का राज्यसभा चुनाव इस बार केवल सीटों की गणित तक सीमित नहीं दिख रहा। भाजपा जहां दो सीटों के बाद तीसरी सीट पर भी राजनीतिक संभावना तलाश रही है, वहीं कांग्रेस अपनी रणनीति तैयार कर रही है।
सवर्ण चेहरे, क्षेत्रीय संतुलन, संगठनात्मक पकड़ और कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं की भूमिका इस चुनाव को और रोचक बना सकती है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा के साथ प्रदेश की राजनीति और गर्म होने की संभावना है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस