भोपाल में घटिया निर्माण पर फूटा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग का गुस्सा, औचक निरीक्षण में इंजीनियर को लगाई फटकार—कहा, लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
भोपाल के गौतम नगर (वार्ड-58) में निर्माण कार्यों की खराब गुणवत्ता सामने आने पर मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने औचक निरीक्षण के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने प्रभारी उपयंत्री नितिन खरे सहित नगर निगम के इंजीनियरों को कड़ी चेतावनी देते हुए साफ कहा कि लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री ने गुणवत्ता में तुरंत सुधार के निर्देश दिए और घटिया निर्माण करने वालों पर सख्त कार्रवाई की बात कही।
. गौतम नगर में घटिया निर्माण पर भड़के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग
. औचक निरीक्षण में खुली निर्माण कार्यों की पोल
. मौके पर ही इंजीनियरों की लगाई क्लास
. प्रभारी उपयंत्री नितिन खरे को कड़ी फटकार
भोपाल के गौतमनगर में चल रहे घटिया निर्माण कार्य को लेकर मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब वे अचानक निरीक्षण के दौरान मौके से गुजरे। सड़क किनारे बन रही बाउंड्रीवॉल की खराब गुणवत्ता देखकर उन्होंने न केवल काम रुकवाया, बल्कि मौके पर मौजूद अधिकारियों को जमकर फटकार भी लगाई। मंत्री का यह सख्त रुख अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल भी खड़े कर रहा है।
दरअसल, यह मामला भोपाल के वार्ड-58 स्थित गौतम नगर का है, जहां सड़क किनारे बाउंड्रीवॉल का निर्माण कार्य चल रहा था। बुधवार दोपहर करीब 1:30 बजे मंत्री विश्वास सारंग का काफिला वहां से गुजर रहा था। इसी दौरान उनकी नजर निर्माण कार्य पर पड़ी। जैसे ही उन्होंने काम को ध्यान से देखा, उन्हें निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह हुआ और उन्होंने तुरंत गाड़ी रुकवा दी।
मौके पर पहुंचकर मंत्री ने पाया कि जो बाउंड्रीवॉल बनाई जा रही है, उसका बेस (नींव) मजबूत नहीं था। दीवार को जमीन से कुछ फीट ऊपर तक उठाया जा रहा था, लेकिन उसकी संरचना कमजोर दिखाई दे रही थी। निर्माण में उपयोग किए जा रहे सामग्री और तकनीक को देखकर मंत्री नाराज हो गए। उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए मौके पर मौजूद प्रभारी उप यंत्री नितिन खरे को जमकर फटकार लगाई।
मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह का काम बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने पूछा, “क्या ऐसे काम होता है? क्या यही गुणवत्ता है?” उनकी नाराजगी साफ झलक रही थी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने तत्काल गुणवत्ता सुधारने और कार्य को मानकों के अनुरूप करने के निर्देश दिए।
इस दौरान मंत्री ने यह भी सुनिश्चित किया कि मौके पर मौजूद अन्य जिम्मेदार अधिकारी भी स्थिति को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से होने वाले कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या घटिया निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली सामग्री की जांच की जाए और आवश्यक हो तो काम को दोबारा सही तरीके से किया जाए।
मंत्री विश्वास सारंग का यह अचानक निरीक्षण प्रशासनिक तंत्र के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अब निर्माण कार्यों में ढिलाई नहीं चलेगी और जो भी अधिकारी या ठेकेदार लापरवाही करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, मंत्री ने नरेला विधानसभा क्षेत्र में चल रहे अन्य निर्माण कार्यों को लेकर भी सख्ती दिखाई है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वे अब नियमित रूप से औचक निरीक्षण करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी विकास कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार और पारदर्शिता के साथ पूरे हों।
इस घटना के बाद संबंधित विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच यह संदेश साफ पहुंच गया है कि अब गुणवत्ता से समझौता करना महंगा पड़ सकता है। कई जगहों पर निर्माण कार्यों की समीक्षा शुरू कर दी गई है और तकनीकी टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
स्थानीय लोगों ने भी मंत्री की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अक्सर निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का उपयोग किया जाता है, जिससे कुछ ही समय में सड़कें और संरचनाएं खराब हो जाती हैं। ऐसे में यदि जनप्रतिनिधि खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करें, तो इससे व्यवस्था में सुधार आएगा।
गौतमनगर के निवासियों का कहना है कि लंबे समय से वे इस क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर शिकायत कर रहे थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही थी। मंत्री के अचानक निरीक्षण और सख्त रुख से उन्हें उम्मीद जगी है कि अब काम सही तरीके से होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के औचक निरीक्षण न केवल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारने में मदद करते हैं, बल्कि अधिकारियों और ठेकेदारों में जवाबदेही भी बढ़ाते हैं। इससे भ्रष्टाचार और लापरवाही पर भी अंकुश लगाया जा सकता है।
मंत्री विश्वास सारंग ने अंत में स्पष्ट किया कि वे जनता के हितों के साथ कोई समझौता नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने संबंधित विभाग को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने और सभी कार्य तय मानकों के अनुसार ही किए जाएं।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि जनप्रतिनिधि सक्रिय और सतर्क रहें, तो जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव संभव हैं। अब देखना होगा कि मंत्री की इस सख्ती का असर अन्य निर्माण कार्यों पर कितना पड़ता है और क्या वाकई गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलता है या नहीं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस