राज्यमंत्री टेटवाल के जाति विवाद में नया ट्विस्ट: एक ही स्कूल के दो अलग सर्टिफिकेट सामने ; वकील ने HC में पेश किया हलफनामा

सारंगपुर विधायक और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल के जाति प्रमाण पत्र विवाद में नया मोड़ सामने आया है। इंदौर हाईकोर्ट में मंत्री पक्ष के वकील ने हलफनामे के साथ नए दस्तावेज पेश किए हैं। इस बीच एक ही स्कूल से जारी दो अलग-अलग प्रमाण पत्र सामने आने से मामले में नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसके चलते फिलहाल सुनवाई टाल दी गई है।

राज्यमंत्री टेटवाल के जाति विवाद में नया ट्विस्ट: एक ही स्कूल के दो अलग सर्टिफिकेट सामने ; वकील ने HC में पेश किया हलफनामा

इंदौर हाईकोर्ट में टेटवाल के जाति प्रमाण पत्र विवाद में नया मोड़: एक ही स्कूल के दो अलग-अलग रिकॉर्ड सामने

सारंगपुर विधायक और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल के जाति प्रमाण पत्र विवाद में इंदौर हाईकोर्ट में नया मोड़ आ गया है। मंत्री पक्ष के वकील ने जस्टिस जयकुमार पिल्लई की बेंच के समक्ष हलफनामे के साथ नए दस्तावेज पेश किए हैं। इस मामले में गुरुवार को प्रस्तावित सुनवाई फिलहाल टाल दी गई है।

एक ही स्कूल से जारी हुए दो अलग-अलग रिकॉर्ड

मामले में अब विरोधाभासी दस्तावेज सामने आए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि मंत्री के स्कूली रिकॉर्ड में उनकी जाति ‘जीनगर’ दर्ज है। वहीं, अब स्कूल प्राचार्य की ओर से एक अन्य प्रमाण पत्र कोर्ट में पेश किया गया है, जिसमें उनकी जाति ‘मोची’ बताई गई है। नगर पालिका के दाखिला रिकॉर्ड में भी उनके दादा की जाति ‘मोची’ दर्ज होने का दावा किया गया है। एक ही स्कूल से दो अलग-अलग प्रमाण पत्र सामने आने से विवाद और गहरा गया है।

कोमलप्रसाद शाक्य की याचिका पर चल रही सुनवाई

यह पूरा मामला गुना निवासी कोमलप्रसाद शाक्य द्वारा दायर रिट याचिका (21875/2024) से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधायक टेटवाल ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा है।

याचिकाकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में पिता की सर्विस बुक, परिवार की वंशावली और आरटीआई के माध्यम से प्राप्त स्कॉलर पंजी समेत कई दस्तावेज हाईकोर्ट में पेश किए हैं।

आरटीआई और स्कॉलर पंजी के रिकॉर्ड पर उठे सवाल

याचिकाकर्ता के अनुसार, वर्ष 2007 और 2013 में आरटीआई के जरिए प्राप्त दस्तावेजों में विधायक की जाति ‘जीनगर’ और वर्ग ‘पिछड़ा’ दर्ज है। इसके विपरीत, बचाव पक्ष ने वर्ष 2011 की तारीख वाला एक प्रमाण पत्र पेश किया है, जिसमें जाति ‘मोची’ लिखी हुई है।

याचिकाकर्ता ने इस नए प्रमाण पत्र की सत्यता पर सवाल उठाते हुए इसे संदिग्ध बताया है। अब हाईकोर्ट में पेश हुए इन नए दस्तावेजों के बाद मामले की सुनवाई आगे और अहम मानी जा रही है।