उरई में अमृत योजना 2.0 बनी 'अमृत जहर': सुशील नगर में लाइन डालने के नाम पर तोड़ीं घरों की पाइप, पानी को तरसे लोग
उरई के सुशील नगर वार्ड-17 में अमृत योजना 2.0 के तहत चल रहे पाइपलाइन कार्य में ठेकेदार की लापरवाही से कई घरों की पुरानी पेयजल पाइपलाइनें टूट गईं, जिससे इलाके में गंभीर जलसंकट पैदा हो गया है। भीषण गर्मी में दो दिनों से लोगों को पानी नहीं मिल रहा है और उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद जल निगम के अधिकारी और ठेकेदार कोई समाधान नहीं कर रहे। नाराज नागरिकों ने जिलाधिकारी से जांच, दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और जल्द जल आपूर्ति बहाल कराने की मांग की है।
- वार्ड-17 में ठेकेदार की लापरवाही से भीषण गर्मी में जलसंकट! जल निगम के अधिकारी सुनने को तैयार नहीं, DM से कार्रवाई की मांग
उरई/जालौन। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत योजना 2.0 के तहत 24×7 पेयजल आपूर्ति का सपना उरई के सुशील नगर वार्ड-17 में लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। आरोप है कि योजना का क्रियान्वयन कर रही कार्यदायी संस्था 'निर्माण खंड, उत्तर प्रदेश जल निगम नगरीय, उरई' के ठेकेदारों द्वारा रात्रि में बेहद गैर-जिम्मेदाराना तरीके से सड़क खुदाई की जा रही है, जिससे मोहल्ले के लोगों की घरेलू पेयजल पाइपलाइनें तोड़ दी गई हैं। अमृत योजना 2.0 के तहत सुशील नगर में नई पेयजल लाइन डालने का काम चल रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ठेकेदार के मजदूर बिना किसी नक्शे और सावधानी के जेसीबी से खुदाई कर रहे हैं। इस दौरान दर्जनों घरों की पुरानी पेयजल कनेक्शन की पाइपलाइनें तोड़ दी गई। मरम्मत तो दूर, ठेकेदार के लोग टूटी पाइपों को खुला छोड़कर आगे बढ़ रहे हैं। इस 45 डिग्री तापमान में जब पूरे शहर में पानी की मांग चरम पर है, तब सुशील नगर के सैकड़ों परिवार बूंद-बूंद पानी को मोहताज हो गए हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया, "दो दिन से घर में नल से पानी नहीं आ रहा। टैंकर भी नहीं आ रहा। बच्चों को स्कूल भेजने के लिए पड़ोसियों से पानी मांगना पड़ रहा है। नाराज मोहल्लेवासियों का आरोप है कि शिकायत करने पर जल निगम के अधिशासी अभियंता निर्माण खंड उरई कार्यालय का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी सुनने को तैयार नहीं है। लोगों ने बताया कि जेई से बात करो तो कहता है कि ठेकेदार से बात करो और एई के नंबर या तो बंद रहता या वो फोन रिसीव नहीं करते। ठेकेदार से बात करो तो वो 'ऊपर से आदेश है' कहकर टाल देता है। अमृत योजना की गाइडलाइन के अनुसार, खुदाई से पहले हर घर का सर्वे कर पुरानी लाइनों को चिह्नित करना और नई लाइन डालने के तुरंत बाद सड़क रेस्टोरेशन व टूटी पाइप जोड़ना ठेकेदार की जिम्मेदारी है। आरोप है कि सुशील नगर में एक भी नियम का पालन नहीं हो रहा। न साइन बोर्ड, न बैरिकेडिंग, न ही मलबा हटाने की व्यवस्था। जगह-जगह खुले गड्ढों से हादसे का खतरा भी बना हुआ है। जल निगम के अनुबंध शर्तों के अनुसार, लापरवाही से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और तय समय में रेस्टोरेशन न करने पर ठेकेदार पर प्रतिदिन के हिसाब से पेनल्टी और ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान है। सवाल यही है कि अधिशासी अभियंता निर्माण खंड द्वारा ठेकेदार पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
जनता की मांग :
आक्रोशित लोगों ने जिलाधिकारी जालौन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कराकर दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए और उसकी पेनल्टी से लोगों की टूटी पाइप लाइनें तुरंत जुड़वाई जाएं। साथ ही लापरवाह अधिशासी अभियंता और जेई के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाए। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर 2 दिन में पानी बहाल नहीं हुआ तो वे जल निगम कार्यालय का घेराव करेंगे।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस