ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया गर्मी से बचने का देसी नुस्खा, बोले -पॉकेट में प्याज ले जाओ कुछ नहीं होगा,वीडियो हुआ वायरल
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भीषण गर्मी और लू से बचने के लिए जेब में प्याज रखने का पारंपरिक नुस्खा बताया, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। उन्होंने कहा कि वे खुद भी इस तरीके को अपनाते हैं और एसी से दूरी बनाकर रखते हैं।
जेब में प्याज रखो, लू नहीं लगेगी? सिंधिया के बयान से छिड़ी बहस, जानिए कितना कारगर है देसी नुस्खा
मध्य प्रदेश के शिवपुरी से एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने भीषण गर्मी के बीच लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लू और गर्मी से बचने के लिए एक पारंपरिक उपाय सुझाया—जेब में प्याज रखने का। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसके साथ ही इस देसी नुस्खे की उपयोगिता पर चर्चा भी तेज हो गई है।
शिवपुरी में दिया बयान, बताया अपना अनुभव
रविवार को शिवपुरी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा कि चंबल क्षेत्र की भीषण गर्मी में खुद को सुरक्षित रखने के लिए वे आधुनिक साधनों की बजाय पारंपरिक तरीकों पर भरोसा करते हैं। उन्होंने बताया कि वे न तो अपनी कार में एसी का इस्तेमाल करते हैं और न ही एयर कंडीशन वाले वातावरण में ज्यादा समय बिताना पसंद करते हैं।
उन्होंने कहा, “मैं थोड़ा जवान दिखता हूं, लेकिन मेरी आत्मा बहुत पुरानी है। अपनी जेब में एक प्याज रखो, तुम्हें कुछ नहीं होगा।” इस दौरान उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह तरीका पुराने समय से चला आ रहा है और आयुर्वेदिक मान्यताओं में इसकी अहमियत रही है।
‘चंबल की त्वचा’ का जिक्र
सिंधिया ने चंबल क्षेत्र की गर्मी का जिक्र करते हुए इसे “चंबल की त्वचा” बताया। उनका कहना था कि यहां के लोग अत्यधिक तापमान के बावजूद खुद को ढाल लेते हैं। उन्होंने दावा किया कि जब लोग उनसे पूछते हैं कि 50 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी में कैसे रहते हैं, तो वे इस तरह के पारंपरिक उपायों का हवाला देते हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
सिंधिया का यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो गया। कुछ लोग इसे दिलचस्प और देसी ज्ञान बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इस पर सवाल भी उठा रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे “दादी-नानी के नुस्खे” से जोड़कर देखा, वहीं कुछ ने इसे वैज्ञानिक आधार पर परखने की बात कही।
क्या सच में काम करता है प्याज वाला नुस्खा?
विशेषज्ञों के अनुसार, प्याज में कुछ ऐसे तत्व जरूर होते हैं जो शरीर को ठंडक देने में मदद कर सकते हैं, खासकर जब इसे खाया जाए। आयुर्वेद में प्याज को शीतल प्रभाव वाला माना गया है। हालांकि, जेब में प्याज रखने से सीधे तौर पर लू से बचाव होता है, इसका कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
डॉक्टरों का कहना है कि लू से बचने के लिए सबसे जरूरी है:
शरीर को हाइड्रेट रखना
धूप में कम से कम निकलना
सिर और शरीर को ढककर रखना
हल्के और ढीले कपड़े पहनना
इसलिए प्याज जेब में रखने को एक परंपरागत मान्यता के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह भरोसेमंद उपाय नहीं माना जा सकता।
देशभर में भीषण गर्मी का कहर
सिंधिया का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्से भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर समेत कई क्षेत्रों में तापमान 44 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है।
राजस्थान के बाड़मेर में हाल ही में 46.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो इस सीजन के सबसे गर्म स्थानों में शामिल रहा। वहीं दिल्ली-एनसीआर में भी लू चलने की चेतावनी जारी की गई है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
लोगों के लिए चेतावनी और सावधानी
मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और हीट स्ट्रोक के लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा गया है।
परंपरा बनाम विज्ञान—कहां है संतुलन?
सिंधिया का बयान एक बार फिर इस बहस को जन्म देता है कि क्या पारंपरिक नुस्खे आज भी उतने ही कारगर हैं जितने पहले हुआ करते थे। आयुर्वेद और लोक मान्यताओं में कई ऐसे उपाय बताए गए हैं, जो समय के साथ लोगों के अनुभव का हिस्सा बने हैं।
हालांकि, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान किसी भी उपाय को अपनाने से पहले उसके प्रमाण और प्रभाव पर जोर देता है। ऐसे में जरूरी है कि लोग पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करते हुए वैज्ञानिक सलाह को प्राथमिकता दें।
ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा दिया गया “जेब में प्याज रखने” का सुझाव भले ही चर्चा का विषय बन गया हो, लेकिन लू से बचाव के लिए केवल इसी पर निर्भर रहना उचित नहीं है। भीषण गर्मी के इस दौर में सही खानपान, पर्याप्त पानी, और जरूरी सावधानियां ही सबसे प्रभावी उपाय हैं।
परंपराएं अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सेहत के मामले में संतुलित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस