सिंधिया समर्थक कृष्णा घाड़गे को बीजेपी ने थमाया नोटिस: “बालक बुद्धि” टिप्पणी पर मचा सियासी घमासान
केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia के समर्थक माने जाने वाले कृष्णा घाड़गे को भाजपा ने सोशल मीडिया पोस्ट पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। घाड़गे ने बिना नाम लिए पूर्व सांसद K. P. Yadav को “बालक बुद्धि नेता” कहा था। भाजपा ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए तीन दिन में जवाब मांगा है।
भाजपा ने सिंधिया समर्थक कृष्णा घाड़गे को सोशल मीडिया पोस्ट पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। घाड़गे ने पूर्व सांसद केपी यादव का नाम लिए बिना उन्हें “बालक बुद्धि नेता” कहा था।
मध्य प्रदेश भाजपा में एक बार फिर अंदरूनी बयानबाजी और राजनीतिक खींचतान खुलकर सामने आ गई है। केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia के समर्थक माने जाने वाले कृष्णा घाड़गे को भारतीय जनता पार्टी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी को लेकर दिया गया, जिसमें उन्होंने बिना नाम लिए पूर्व सांसद K. P. Yadav को “बालक बुद्धि नेता” कह दिया था। इस टिप्पणी के बाद भाजपा संगठन हरकत में आया और इसे अनुशासनहीनता मानते हुए कार्रवाई शुरू कर दी।
सोशल मीडिया पोस्ट बनी विवाद की वजह
जानकारी के अनुसार, कृष्णा घाड़गे ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में किसी नेता का सीधा नाम नहीं लिखा गया था, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे पूर्व सांसद केपी यादव पर निशाना माना गया। पोस्ट में “बालक बुद्धि नेता” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था, जिसके बाद भाजपा संगठन ने मामले को गंभीरता से लिया।
भाजपा भोपाल शहर अध्यक्ष रविंद्र यति की ओर से कृष्णा घाड़गे को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में उनसे तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर इस प्रकार की टिप्पणियां संगठन की अनुशासन व्यवस्था के खिलाफ हैं।
केपी यादव के बयान के बाद बढ़ा विवाद
दरअसल, विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभालने के बाद केपी यादव अशोकनगर पहुंचे थे। यहां आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य और क्षेत्रीय राजनीति को लेकर कई बातें कही थीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केपी यादव ने कहा कि प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी है और आने वाले दो वर्षों तक वे हर मंच पर सक्रिय दिखाई देंगे। उन्होंने जनता का आभार जताते हुए कहा कि क्षेत्रवासियों का प्रेम और समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने कहा कि अशोकनगर शांतिप्रिय क्षेत्र है, जहां सभी समाज और वर्ग के लोग भाईचारे के साथ रहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कुछ नेताओं पर निशाना साधा और कहा कि कुछ लोग समाज में फूट डालकर राजनीति करना चाहते हैं।
“फूट डालकर राजनीति करने वालों” पर साधा निशाना
अपने भाषण में केपी यादव ने कहा कि राजनीति विकास और जनसेवा के लिए होनी चाहिए, न कि समाज को बांटने के लिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग क्षेत्र में विभाजन की राजनीति कर माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं, लेकिन जनता अब सब समझती है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में जनता ने उन्हें संसद पहुंचाया और पांच वर्षों तक उन्होंने क्षेत्र, प्रदेश और देश के विकास के लिए लगातार काम किया। यादव ने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान उन पर किसी प्रकार का भ्रष्टाचार या पक्षपात का आरोप नहीं लगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने हर वर्ग और समाज के लोगों के लिए बिना भेदभाव के कार्य किया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केपी यादव के इस बयान को सिंधिया समर्थक खेमे की ओर इशारा माना गया। इसके बाद ही कृष्णा घाड़गे की सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई, जिसने विवाद को और हवा दे दी।
“मंच पर कुछ लोग नहीं आए” बयान भी चर्चा में
कार्यक्रम के दौरान केपी यादव ने यह भी कहा कि वे पूरे शहर की गलियों में घूमे और हर समाज के लोगों ने उन्हें आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मंच पर नहीं आए, लेकिन जनता का समर्थन उनके साथ है।
उन्होंने कहा,
“मैं आज पूरे शहर की एक-एक गली में घूमा। हर समाज के लोग अपने घरों से बाहर निकलकर मुझे आशीर्वाद देने आए। यह अलग बात है कि कुछ लोग मंच पर नहीं आए, लेकिन शहर के हर व्यक्ति का समर्थन मेरे साथ है। यही मेरी ताकत है।”
यादव ने आगे कहा कि वे क्षेत्र के विकास और जनता की सेवा के लिए हमेशा काम करते रहेंगे और किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटेंगे।
भाजपा संगठन ने दिखाई सख्ती
कृष्णा घाड़गे की पोस्ट सामने आने के बाद भाजपा संगठन ने तुरंत संज्ञान लिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा में अनुशासन सर्वोपरि है और किसी भी नेता या कार्यकर्ता को सार्वजनिक रूप से इस प्रकार की टिप्पणी करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
नोटिस में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए घाड़गे से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो संगठनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
भाजपा में अंदरूनी खींचतान फिर आई सामने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा मामला भाजपा के भीतर चल रही गुटबाजी की ओर इशारा करता है। गुना-अशोकनगर क्षेत्र में ज्योतिरादित्य सिंधिया और केपी यादव समर्थकों के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा देखी जाती रही है।
2019 के लोकसभा चुनाव में केपी यादव ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। हालांकि बाद में सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए और केंद्रीय मंत्री बने। इसके बाद से क्षेत्रीय राजनीति में दोनों खेमों के बीच तनातनी समय-समय पर सामने आती रही है।
अब कृष्णा घाड़गे को नोटिस जारी होने के बाद यह विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर भाजपा संगठन का रुख और सख्त हो सकता है।
प्रदेश राजनीति में बढ़ी हलचल
इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष भी भाजपा की अंदरूनी कलह को लेकर सवाल उठा रहा है। वहीं भाजपा नेता फिलहाल इसे संगठन का आंतरिक मामला बता रहे हैं।
अब सबकी नजर कृष्णा घाड़गे के जवाब और भाजपा संगठन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि मामला और बढ़ता है तो इसका असर क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ आगामी चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस