BJP विधायक प्रीतम लोधी का यू-टर्न: डकैत रामबाबू को दोस्त बताने वाले विधायक ने जताया खेद, बोले- भावनाएं आहत हुई हों तो क्षमा चाहता हूं
भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने डकैत रामबाबू गडरिया की तस्वीर पर माल्यार्पण कर उसे 'साथी' बताने पर खेद जताया है। गुर्जर समाज की आपत्ति और पार्टी के दबाव के बाद उन्होंने वीडियो जारी कर अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगी।
पिछोर विधायक प्रीतम लोधी ने अपने विवादित बयान पर माफी मांग ली है. गुर्जर समाज के विरोध और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से शिकायत के बाद विधायक ने वीडियो जारी कर खेद जताया
शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान पूर्व डकैत रामबाबू गड़रिया को अपना करीबी मित्र और सुख-दुख का साथी बताने वाले विधायक ने अब अपने बयान पर सफाई देते हुए खेद व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने और विभिन्न समाजों की नाराजगी सामने आने के बाद विधायक ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। यदि उनके शब्दों से किसी को दुख पहुंचा है तो वे उसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं।
31 मई के कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद 31 मई 2026 को आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम से शुरू हुआ। शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र में पाल-बघेल समाज द्वारा लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की जयंती समारोह का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में भाजपा विधायक प्रीतम लोधी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।
कार्यक्रम स्थल पर लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के चित्र के साथ पूर्व डकैत रामबाबू गड़रिया का चित्र भी मंच पर लगाया गया था। कार्यक्रम के दौरान विधायक ने दोनों चित्रों पर माल्यार्पण किया और अपने संबोधन में रामबाबू गड़रिया का उल्लेख करते हुए उन्हें अपना पुराना साथी बताया।
भाषण में कही थी यह बात
अपने संबोधन में विधायक प्रीतम लोधी ने कहा था कि रामबाबू गड़रिया उनके बेहद करीबी रहे हैं और जीवन के कई उतार-चढ़ाव में उन्होंने साथ निभाया है। विधायक ने यह भी कहा था कि सामाजिक परिस्थितियों और दबावों के कारण रामबाबू को डकैत बनना पड़ा, जबकि वे मूल रूप से ऐसे व्यक्ति नहीं थे।
विधायक के इस बयान का वीडियो कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने सवाल उठाया कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा पूर्व डकैत की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करना उचित नहीं है।
गुर्जर समाज ने जताई नाराजगी
विधायक के बयान को लेकर सबसे अधिक नाराजगी गुर्जर समाज में देखने को मिली। समाज के कई संगठनों ने बयान को आपत्तिजनक बताते हुए विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि अपराध की दुनिया से जुड़े व्यक्ति को मंच से महिमामंडित करना गलत संदेश देता है और इससे समाज में गलत परंपराओं को बढ़ावा मिल सकता है।
विवाद बढ़ने के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भाजपा नेतृत्व तक अपनी आपत्ति पहुंचाई। मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया और विपक्षी दलों ने भी भाजपा विधायक के बयान को मुद्दा बनाना शुरू कर दिया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंचा मामला
विवाद लगातार बढ़ता देख अखिल भारतीय गुर्जर महासभा का एक प्रतिनिधिमंडल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने विधायक प्रीतम लोधी के बयान पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मांग की गई कि पार्टी इस मामले का संज्ञान ले और विधायक के खिलाफ उचित कार्रवाई करे। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि सार्वजनिक मंच से इस तरह के बयान समाज में गलत संदेश देते हैं और इससे लोगों की भावनाएं आहत होती हैं।
भाजपा संगठन तक मामला पहुंचने के बाद विधायक पर बयान को लेकर सफाई देने का दबाव बढ़ गया था। राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
वीडियो जारी कर मांगा खेद
विवाद को शांत करने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए विधायक प्रीतम लोधी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया। वीडियो में उन्होंने कहा कि वे बघेल समाज के कार्यक्रम में अतिथि के रूप में शामिल हुए थे और वहां उन्होंने जो भी बातें कहीं, उनका उद्देश्य किसी भी समाज या वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
उन्होंने कहा, “मैं कार्यक्रम में सम्मानपूर्वक शामिल हुआ था। यदि मेरे मुंह से कोई ऐसा शब्द निकल गया हो जिससे किसी समाज, समुदाय या व्यक्ति की भावनाएं आहत हुई हों तो मैं उसके लिए खेद व्यक्त करता हूं।”
विधायक ने आगे कहा कि वे सभी समाजों का सम्मान करते हैं और उनके लिए हर समाज मन का मंदिर है। समाज की सेवा करना ही उनका सबसे बड़ा धर्म है और वे हमेशा सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं।
‘हर समाज मेरे लिए सम्माननीय’
अपने वीडियो संदेश में प्रीतम लोधी ने कहा कि वे किसी भी समाज के खिलाफ नहीं हैं और सभी वर्गों के लोगों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते सभी समाजों का सम्मान करना और उनकी सेवा करना उनकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने दोहराया कि यदि उनके किसी शब्द या बयान से किसी व्यक्ति या समाज को ठेस पहुंची है तो वे उसके लिए क्षमा चाहते हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि उनके बयान को गलत संदर्भ में न लिया जाए।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा जारी
हालांकि विधायक द्वारा खेद व्यक्त किए जाने के बाद विवाद कुछ हद तक शांत होता दिखाई दे रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे की चर्चा अभी भी जारी है। विपक्षी दलों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को अपने शब्दों का चयन बेहद सावधानी से करना चाहिए क्योंकि उनके बयानों का व्यापक प्रभाव पड़ता है।
वहीं भाजपा के स्थानीय नेताओं का कहना है कि विधायक ने अपनी बात स्पष्ट कर दी है और यदि किसी की भावनाएं आहत हुई थीं तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से खेद भी व्यक्त कर दिया है।
फिलहाल प्रीतम लोधी के इस यू-टर्न और माफी वाले बयान के बाद विवाद की तीव्रता कम होती नजर आ रही है, लेकिन यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि सार्वजनिक मंचों पर दिए गए बयान किस तरह राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन सकते हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस