भोपाल में कांग्रेस IT सेल के 3 कार्यकर्ता हिरासत में, ‘वायरल पत्र’ विवाद पर बढ़ा सियासी तनाव ; सांसद विवेक तन्खा बोले- नहीं छोड़ा तो हाईकोर्ट जाएंगे

भोपाल में सोशल मीडिया पर वसुंधरा राजे के नाम से वायरल हुए कथित पत्र को लेकर विवाद बढ़ गया है। इस मामले में कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं को बिना ठोस कारण 27 घंटे से हिरासत में रखा गया है और उन्हें रिहा नहीं किया गया तो हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।

भोपाल में कांग्रेस IT सेल के 3 कार्यकर्ता हिरासत में, ‘वायरल पत्र’ विवाद पर बढ़ा सियासी तनाव ; सांसद विवेक तन्खा बोले- नहीं छोड़ा तो हाईकोर्ट जाएंगे

वसुंधरा राजे ने वायरल पत्र को फर्जी बताते हुए इसे “शुभचिंतकों की कारगुजारी” कहा है। पूरे मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और कानूनी लड़ाई की संभावना बढ़ गई है।

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोशल मीडिया पर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से वायरल हुए एक कथित पत्र को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। इस मामले में कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी है।

27 घंटे से हिरासत में, हाईकोर्ट जाने की तैयारी

विवेक तन्खा ने जानकारी दी कि शुरुआत में पुलिस ने कांग्रेस आईटी सेल के सात कार्यकर्ताओं को उठाया था, जिनमें से चार को बाद में छोड़ दिया गया। हालांकि, तीन कार्यकर्ताओं को करीब 27 घंटों से हिरासत में रखा गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की लीगल टीम इस मामले में दोपहर 1:30 बजे हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगी।

तन्खा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि भोपाल साइबर पुलिस ने बिना ठोस कारण के कार्यकर्ताओं को हिरासत में रखा है। उन्होंने इस कार्रवाई पर आश्चर्य और निराशा जताई है।

‘फर्जी पत्र’ के आधार पर कार्रवाई पर सवाल

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जिस कथित पत्र को लेकर कार्रवाई की गई, वह 15-16 अप्रैल से सोशल मीडिया पर वायरल था और लाखों लोगों द्वारा साझा किया जा चुका था। बाद में 18 अप्रैल को इसे फर्जी बताया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि केवल चुनिंदा लोगों पर ही कार्रवाई क्यों की जा रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता और नेताओं का विरोध

कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पत्र गलत है तो सभी पर FIR दर्ज होनी चाहिए, और यदि सही है तो सच्चाई को सामने लाया जाना चाहिए। उन्होंने खुद पर भी कार्रवाई करने की चुनौती दी।

वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी ने इस कार्रवाई को अवैध बताते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई और निष्पक्ष जांच की मांग की।

वसुंधरा राजे का बयान

इस पूरे विवाद पर वसुंधरा राजे ने प्रतिक्रिया देते हुए वायरल पत्र को फर्जी बताया है। उन्होंने कहा कि यह उनके “शुभचिंतकों की कारगुजारी” है और इसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को समान भागीदारी देने के प्रयासों का समर्थन किया।

वायरल पत्र में क्या था?

वायरल कथित पत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। इसमें आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर संदेह जताया गया था और पारदर्शिता की मांग की गई थी। साथ ही मोहन भागवत के रुख पर भी सवाल खड़े किए गए थे।

पत्र में यह भी आरोप लगाए गए कि पार्टी की पहचान मूल विचारधारा से हटकर सत्ता की राजनीति की ओर झुकती दिख रही है, और महिला सम्मान जैसे मुद्दों पर दिए जाने वाले भाषणों को औपचारिकता बताया गया है।

बढ़ सकता है विवाद

इस मामले ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा बता रही है, जबकि भाजपा इसे फर्जी सामग्री फैलाने से जुड़ा मामला मान रही है। अब सभी की नजर हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।