BJP विधायक प्रीतम लोधी का विवादित बयान: SDOP को दी खुली धमकी, बोले—‘10 हजार लोग भेजकर बंगले में गोबर भरवा दूंगा’, वीडियो पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं

विधायक ने कहा कि यदि 15 दिन में जवाब नहीं मिला तो वे 10,000 लोगों को लेकर SDOP के बंगले में “गोबर भरवा देंगे”। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए बड़े नेताओं का नाम भी लिया।

BJP विधायक प्रीतम लोधी का विवादित बयान: SDOP को दी खुली धमकी, बोले—‘10 हजार लोग भेजकर बंगले में गोबर भरवा दूंगा’, वीडियो पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं

मध्य प्रदेश में बढ़ा सियासी विवाद: BJP विधायक प्रीतम सिंह लोधी का धमकी भरा बयान, बेटे के एक्सीडेंट के बाद पुलिस पर दबाव के आरोप

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पिछोर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक प्रीतम सिंह लोधी अपने बेटे से जुड़े सड़क हादसे के बाद दिए गए विवादित बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस पूरे मामले ने न केवल राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है, बल्कि कानून व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 हादसा जिसने बढ़ाया विवाद

जानकारी के अनुसार, विधायक के बेटे दिनेश लोधी ने शुक्रवार (17 अप्रैल) को कथित रूप से लापरवाहीपूर्वक थार वाहन चलाते हुए एक बाइक को टक्कर मार दी। इस बाइक पर सवार तीन युवक और पास से गुजर रही दो स्कूली छात्राएं हादसे की चपेट में आ गईं। हादसे में सभी लोग घायल हो गए, हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा गया और पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी। इसी कार्रवाई के दौरान मामला और अधिक तूल पकड़ गया, जब विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई।

 SDOP को दी खुली धमकी

हादसे के बाद पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने से नाराज विधायक ने करैरा के SDOP आयुष जाखर को सीधे तौर पर धमकी दे डाली। उन्होंने कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो वे 10,000 लोगों को लेकर SDOP के बंगले में “गोबर भरवा देंगे”।

विधायक का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। इस बयान को लेकर विपक्ष ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे कानून व्यवस्था के लिए खतरा बताया है।

 बड़े नेताओं का नाम लेकर उठाए सवाल

प्रीतम सिंह लोधी ने अपने बयान में यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन किसके आदेश पर कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर देश के बड़े नेताओं का नाम लेते हुए सवाल उठाया कि क्या यह कार्रवाई नरेंद्र मोदी, अमित शाह या ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देश पर हो रही है।

इस तरह के बयान ने मामले को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के आरोप और बयान पार्टी अनुशासन के खिलाफ जाते हैं और इससे जनता में गलत संदेश जाता है।

 सोशल मीडिया पर बदला रुख

दिलचस्प बात यह है कि हादसे के तुरंत बाद विधायक ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर करते हुए खुद को जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के रूप में पेश किया था। उन्होंने लिखा था कि उनके लिए परिवार से बड़ा जनता का हित है और वे चाहते हैं कि पीड़ितों को न्याय मिले।

लेकिन कुछ ही समय बाद उनका रुख पूरी तरह बदल गया और उन्होंने पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने वाले बयान देने शुरू कर दिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके खिलाफ गलत आरोप लगाए गए या दबाव बनाने की कोशिश की गई, तो वे इसका जवाब देंगे।

 प्रशासन को खुली चुनौती

विधायक ने अपने बयान में SDOP को चुनौती देते हुए कहा कि “क्या करैरा तुम्हारे बाप की है?” उन्होंने आगे कहा कि वे करैरा आएंगे और चुनाव भी लड़ेंगे, अगर किसी में दम है तो उन्हें रोक कर दिखाए। इस दौरान उन्होंने अपने समर्थकों की ताकत का भी जिक्र किया और अप्रत्यक्ष रूप से शक्ति प्रदर्शन की बात कही।

इस तरह के बयान न केवल प्रशासनिक अधिकारियों के लिए चुनौती माने जा रहे हैं, बल्कि यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर भी सवाल उठाते हैं। कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

पूरा मामला सामने आने और वीडियो वायरल होने के बावजूद अब तक पार्टी की अनुशासन समिति की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इस पर विपक्ष और आम जनता दोनों सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इतने गंभीर मामले में चुप्पी क्यों साधी गई है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की धमकी देना गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

यह मामला सिर्फ एक सड़क हादसे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह राजनीतिक विवाद और प्रशासनिक चुनौती का रूप ले चुका है। एक ओर घायल लोगों को न्याय दिलाने की बात है, तो दूसरी ओर जनप्रतिनिधि द्वारा पुलिस अधिकारियों को दी गई धमकी लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गई है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और पार्टी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या इस विवाद का कोई ठोस समाधान निकल पाता है या नहीं।