बरगी क्रूज हादसे में बड़ी कार्रवाई: घायल महिला से इलाज का पैसा लेने वाले नोबल मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित

बरगी क्रूज हादसे में घायल महिला से प्राथमिक इलाज के नाम पर 4700 रुपये वसूलने के मामले में जबलपुर प्रशासन ने नोबल मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल का लाइसेंस एक महीने के लिए निलंबित कर दिया है। अस्पताल को नए मरीज भर्ती करने से भी रोका गया है और 7 दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है। साथ ही वसूली गई राशि वापस करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के उल्लंघन के तहत की गई है।

बरगी क्रूज हादसे में बड़ी कार्रवाई: घायल महिला से इलाज का पैसा लेने वाले नोबल मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित

बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे की पीड़िता से इलाज के नाम पर निजी अस्पताल में शुल्क लेने पर स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है।

मध्यप्रदेश के जबलपुर में हुए बरगी बांध क्रूज हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए एक निजी अस्पताल पर बड़ी कार्रवाई की है। हादसे में घायल महिला से प्राथमिक उपचार के नाम पर पैसे वसूलने के मामले में गौर चौराहा स्थित नोबल मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल का लाइसेंस एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है। साथ ही अस्पताल को नए मरीज भर्ती करने पर भी रोक लगा दी गई है। इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की तत्परता चर्चा में है।

हादसे के बाद अस्पताल पर गंभीर आरोप

जानकारी के अनुसार, वाराणसी निवासी सविता वर्मा बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे के दौरान घायल हो गई थीं। बचाव दल ने उन्हें सुरक्षित निकालकर नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया। आरोप है कि अस्पताल ने प्राथमिक उपचार के नाम पर उनसे 4700 रुपये वसूल लिए, जबकि आपदा की स्थिति में ऐसे मरीजों से शुल्क लेना नियमों के विरुद्ध है।

सविता वर्मा ने इंटरनेट मीडिया पर अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उन्हें केवल दर्द निवारक इंजेक्शन और टिटनेस का टीका लगाया गया, लेकिन इसके बदले अस्पताल ने भारी रकम वसूल ली। उनका कहना था कि परिवार को मजबूरी में यह राशि चुकानी पड़ी।

कलेक्टर के निर्देश पर हुई कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने तुरंत संज्ञान लिया और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को जांच के निर्देश दिए। जांच में आरोप सही पाए जाने पर सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी ने सख्त कदम उठाते हुए अस्पताल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से एक महीने के लिए निलंबित कर दिया।

इसके साथ ही अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

आपदा प्रबंधन कानून का उल्लंघन

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आपदा की स्थिति में किसी भी घायल व्यक्ति से प्राथमिक उपचार के लिए शुल्क लेना पूरी तरह से अवैध है। यह आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।

डॉ. नवीन कोठारी ने बताया कि आपदा प्रबंधन समिति के दिशा-निर्देशों के अनुसार ऐसे मामलों में अस्पतालों को निःशुल्क प्राथमिक उपचार देना अनिवार्य होता है। नोबल मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल द्वारा इस नियम की अनदेखी करना गंभीर लापरवाही मानी गई है।

वसूली गई राशि लौटाने के निर्देश

प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि सविता वर्मा से वसूली गई 4700 रुपये की राशि तत्काल उनके परिवार को वापस की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी कोई शिकायत सामने न आए।

इसके अलावा अस्पताल को यह आदेश भी दिया गया है कि वर्तमान में भर्ती सभी मरीजों का उचित इलाज जारी रखा जाए और उनकी स्थिति के अनुसार विधिवत डिस्चार्ज किया जाए। लेकिन अगले एक महीने तक अस्पताल किसी भी नए मरीज को भर्ती नहीं कर सकेगा।

स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल

इस घटना ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आपदा जैसी गंभीर परिस्थितियों में जहां मानवता और सेवा भाव की अपेक्षा की जाती है, वहां मरीजों से पैसे वसूलना न केवल अनैतिक है बल्कि कानूनन अपराध भी है।

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है और मांग की है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों पर सख्ती बरती जाए ताकि मरीजों का शोषण न हो।

प्रशासन की सख्ती का संदेश

बरगी क्रूज हादसे के बाद की गई यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश देती है कि आपदा के समय नियमों की अनदेखी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि सभी निजी और सरकारी अस्पतालों को निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

बरगी बांध क्रूज हादसे के बाद सामने आया यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता और जवाबदेही दोनों को उजागर करता है। एक ओर जहां हादसे में घायल लोगों को तत्काल मदद की जरूरत थी, वहीं दूसरी ओर कुछ संस्थानों द्वारा नियमों की अनदेखी सामने आई।

हालांकि, प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने यह भरोसा जरूर दिलाया है कि ऐसी लापरवाही पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन अपने जवाब में क्या सफाई देता है और आगे इस मामले में क्या अंतिम निर्णय लिया जाता है।