पंचायत सचिवों के तबादले के नए नियम: गृहग्राम और ससुराल में नहीं मिलेगी पोस्टिंग, 15 जून तक पूरी होगी प्रक्रिया

मध्य प्रदेश में पंचायत सचिवों के तबादलों के लिए नए नियम लागू कर दिए गए हैं। अब सचिव अपने गृहग्राम, ससुराल या रिश्तेदार सरपंच-उपसरपंच वाली पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेंगे।

पंचायत सचिवों के तबादले के नए नियम: गृहग्राम और ससुराल में नहीं मिलेगी पोस्टिंग, 15 जून तक पूरी होगी प्रक्रिया

भोपाल। मध्यप्रदेश में तबादला सीजन के बीच पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने ग्राम पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। राज्य सरकार ने पंचायत प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़े हैं। नई व्यवस्था के तहत अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृहग्राम या ससुराल की ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। इसके अलावा जिस ग्राम पंचायत में सचिव का कोई रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच निर्वाचित होगा, वहां से भी उसका स्थानांतरण अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) को निर्धारित समय-सीमा के भीतर स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में प्रदेशभर में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिव कार्यरत हैं, जिन पर यह नई नीति लागू होगी।

15 जून तक पूरे होंगे जिला स्तरीय तबादले

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 9 जून को जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि पंचायत सचिवों के जिला स्तरीय स्थानांतरण 15 जून तक किए जा सकेंगे। स्थानांतरण प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा और जिले के प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद प्रभावी होंगे। हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था को एक जून से प्रभावी माना जाएगा।

स्थानांतरण आदेश जारी करने की जिम्मेदारी जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दी गई है। नई गाइडलाइन में जिला और अंतरजिला स्तर पर स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित की गई है ताकि किसी प्रकार की प्रशासनिक अस्पष्टता न रहे।

सरकार ने क्यों बदली नीति

विभाग के अनुसार पंचायत सचिवों की नियुक्तियों का इतिहास इस निर्णय की मुख्य वजह है। वर्ष 1994 से 1996 के बीच बड़ी संख्या में पंचायत कर्मियों की नियुक्तियां ग्राम सभाओं की अनुशंसा के आधार पर की गई थीं। उस समय कई स्थानों पर सरपंच, उपसरपंच, पंच या गांव के प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को पंचायत सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था।

पिछले कई वर्षों में सामने आए मामलों की जांच के दौरान पाया गया कि कुछ पंचायतों में जनप्रतिनिधियों और पंचायत सचिवों के बीच रिश्तेदारी होने के कारण प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताएं हुईं। कई मामलों में लोकायुक्त, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) और अन्य जांच एजेंसियों ने सरपंच, उपसरपंच और सचिव की मिलीभगत से सरकारी योजनाओं में गड़बड़ियों की पुष्टि की थी।

सरकार का मानना है कि यदि सचिव अपने गांव या रिश्तेदारी वाले क्षेत्र में पदस्थ रहेगा तो निष्पक्ष प्रशासन प्रभावित हो सकता है। इसी कारण नई तबादला नीति में इन प्रावधानों को शामिल किया गया है।

इन परिस्थितियों में होगा अनिवार्य स्थानांतरण

नई गाइडलाइन में कुछ परिस्थितियों को स्पष्ट रूप से अनिवार्य तबादले की श्रेणी में रखा गया है।

यदि किसी पंचायत सचिव का कोई रिश्तेदार उसी ग्राम पंचायत का सरपंच या उपसरपंच निर्वाचित हो जाता है तो सचिव का स्थानांतरण करना अनिवार्य होगा। इसी प्रकार सचिव को उसके पैतृक गांव या ससुराल की ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं रखा जाएगा।

इसके अलावा जो पंचायत सचिव किसी एक ग्राम पंचायत में लगातार 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत हैं, उन्हें भी प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाएगा। यदि ऐसी स्थिति में एक से अधिक सचिव पात्र होंगे तो सबसे अधिक समय से पदस्थ सचिव का पहले तबादला किया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के कारण बनने वाले स्थानीय प्रभाव को समाप्त करना है।

प्रतिबंध अवधि में भी हो सकेंगे तबादले

आमतौर पर सरकार द्वारा स्थानांतरण पर प्रतिबंध लगाए जाने की अवधि में तबादले नहीं किए जाते, लेकिन नई नीति में कुछ विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंध अवधि के दौरान भी पंचायत सचिवों के स्थानांतरण की अनुमति दी गई है।

यदि किसी सचिव के खिलाफ भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, गंभीर शिकायत, अनुशासनात्मक कार्रवाई, लोकायुक्त जांच या आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जांच चल रही है, तो ऐसे मामलों में प्रतिबंध अवधि के बावजूद स्थानांतरण किया जा सकेगा।

इसके अतिरिक्त शासन स्तर पर विशेष प्रशासनिक आवश्यकता होने पर भी तबादले किए जा सकेंगे। ऐसे मामलों में विभागीय मंत्री की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद पंचायत राज संचालनालय द्वारा स्थानांतरण आदेश जारी किए जाएंगे।

अंतरजिला संविलियन केवल स्वैच्छिक आधार पर

नई नीति में अंतरजिला संविलियन (एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण) को लेकर भी स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं। विभाग ने कहा है कि अंतरजिला संविलियन केवल स्वैच्छिक आधार पर ही किया जाएगा।

विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिला पंचायत सचिवों को विशेष सुविधा प्रदान की गई है। वे अपने पति के निवास वाले जिले, ससुराल अथवा माता-पिता के निवास वाले जिले में संविलियन के लिए आवेदन कर सकेंगी।

इसी प्रकार अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त पंचायत सचिवों को भी अपने मूल जिले में संविलियन का अवसर दिया गया है। इसके लिए संबंधित सचिव को जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के माध्यम से आवेदन करना होगा।

रिक्त पद होने पर ही मिलेगी मंजूरी

विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंतरजिला संविलियन केवल रिक्त पद उपलब्ध होने की स्थिति में ही संभव होगा। संबंधित जिले का मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रस्ताव तैयार कर पंचायत राज संचालनालय भोपाल को भेजेगा। संचालनालय की प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद ही संविलियन आदेश जारी किए जाएंगे।

नई व्यवस्था में यह भी तय किया गया है कि संविलियन के बाद संबंधित पंचायत सचिव का नाम नए जिले की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा। इसके अलावा अंतरजिला संविलियन की सुविधा पूरे सेवा काल में केवल एक बार ही उपलब्ध होगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का मानना है कि नई तबादला नीति पंचायत प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करेगी। गृहग्राम, ससुराल और रिश्तेदारी वाले क्षेत्रों में पदस्थापन पर रोक लगने से हितों के टकराव की स्थिति कम होगी और पंचायतों में प्रशासनिक कार्य अधिक निष्पक्ष तरीके से संचालित हो सकेंगे।

सरकार को उम्मीद है कि इन नए नियमों से पंचायत स्तर पर होने वाली वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा तथा ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी। 15 जून तक स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रदेश की पंचायत व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।