निगम-मंडलों में नियुक्तियों का सिलसिला जारी,पूर्व वन मंत्री रामनिवास रावत को मिली बड़ी जिम्मेदारी, वन विकास निगम के बनाए गए अध्यक्ष

मध्य प्रदेश सरकार ने पूर्व वन मंत्री और वरिष्ठ नेता रामनिवास रावत को मध्य प्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड का अध्यक्ष नियुक्त किया है। राज्य शासन ने आर्टिकल 94 के तहत यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से की है। रावत लंबे समय तक कांग्रेस में सक्रिय रहे हैं और छह बार विजयपुर से विधायक रह चुके हैं।

निगम-मंडलों में नियुक्तियों का सिलसिला जारी,पूर्व वन मंत्री रामनिवास रावत को मिली बड़ी जिम्मेदारी, वन विकास निगम के बनाए गए अध्यक्ष

पूर्व वन मंत्री रामनिवास रावत को मिली बड़ी जिम्मेदारी

वन विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष बनाए गए

राज्य शासन ने जारी किया आधिकारिक आदेश

आर्टिकल 94 के तहत की गई नियुक्ति

ओबीसी वर्ग के प्रमुख नेता हैं रावत

श्योपुर: मध्य प्रदेश में निगम-मंडलों में राजनीतिक नियुक्तियों का दौर लगातार जारी है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने पूर्व वन मंत्री और श्योपुर जिले के विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ नेता रामनिवास रावत को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें मध्य प्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति को प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राज्य शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मध्य प्रदेश राज्य वन विकास लिमिटेड के आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन के आर्टिकल 94 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए रामनिवास रावत को तत्काल प्रभाव से, आगामी आदेश तक, निगम के संचालक मंडल का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। यह नियुक्ति अस्थायी रूप से की गई है, लेकिन इसे सरकार की रणनीतिक राजनीतिक और प्रशासनिक सोच से जोड़कर देखा जा रहा है।

रामनिवास रावत का नाम मध्य प्रदेश की राजनीति में एक मजबूत ओबीसी नेता के रूप में लिया जाता है। वे लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे और पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं, जिसमें कार्यकारी अध्यक्ष का पद भी शामिल है। दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में वे कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और वन विभाग जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। हाल के वर्षों में वे राज्य की सियासत में सक्रिय बने हुए हैं और वर्तमान मोहन सरकार में भी उन्हें कैबिनेट स्तर का महत्व मिला है।

उनका राजनीतिक सफर काफी लंबा और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने पहली बार 1990 में विजयपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद 1993 में वे दोबारा विधायक बने। अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान ही उन्हें मंत्री पद मिला, जिससे उनकी राजनीतिक पकड़ और मजबूत हुई। वर्ष 2003 में जब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी, तब भी विजयपुर क्षेत्र की जनता ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें विधायक चुना।

इसके बाद 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने जीत हासिल की और अपनी पकड़ बनाए रखी। हालांकि 2018 के चुनाव में उन्हें पहली बार हार का सामना करना पड़ा, जो उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इसके बावजूद उन्होंने वापसी की और 2023 के विधानसभा चुनाव में फिर से जीत हासिल कर अपनी लोकप्रियता साबित की। हालांकि उपचुनाव के दौरान उन्हें फिर झटका लगा और हार का सामना करना पड़ा।

विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में रामनिवास रावत का प्रभाव लंबे समय से कायम रहा है। क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार माना जाता है और स्थानीय राजनीति में उनका वर्चस्व साफ दिखाई देता है। यही कारण है कि उन्हें अक्सर एक प्रभावशाली और जमीनी नेता के रूप में देखा जाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वन विकास निगम के अध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्ति न केवल उनके अनुभव का उपयोग करने का प्रयास है, बल्कि ओबीसी वर्ग और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति का भी हिस्सा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे इस नई जिम्मेदारी को किस तरह निभाते हैं और वन विकास से जुड़े कार्यों में क्या नए आयाम जोड़ते हैं।