उमा भारती-दिग्विजय सिंह विवाद फिर गरमाया: 21 साल पुराने मानहानि केस में हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट, 27 अप्रैल को अहम सुनवाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा दायर मानहानि मामले में बड़ा कदम उठाते हुए भाजपा नेता उमा भारती के खिलाफ केस की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि यह मामला वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान लगाए गए आरोपों से जुड़ा है।

उमा भारती-दिग्विजय सिंह विवाद फिर गरमाया: 21 साल पुराने मानहानि केस में हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट, 27 अप्रैल को अहम सुनवाई

हाईकोर्ट ने 2003 के मानहानि केस में निचली अदालत से स्टेटस रिपोर्ट मांगी, अगली सुनवाई 27 अप्रैल को।

यह मामला उमा भारती द्वारा दिग्विजय सिंह पर 2003 के चुनाव में लगाए गए आरोपों से संबंधित है।

दिग्विजय सिंह ने उमा भारती के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था, जो लंबे समय से लंबित है।

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई है, जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल कर रहे हैं सुनवाई।

21 साल पुराना मानहानि विवाद फिर गर्माया: हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट, 27 अप्रैल को अहम सुनवाई

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति के दो दिग्गज नेताओं—दिग्विजय सिंह और उमा भारती—के बीच चल रहा दो दशक पुराना मानहानि मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस केस की वर्तमान स्थिति को लेकर निचली अदालत से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है, जिससे सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।

हाईकोर्ट ने क्यों मांगी रिपोर्ट?

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि इतने पुराने और अहम मामले की मौजूदा स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तारीख तय की है।

यह विवाद साल 2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ था, जब उमा भारती ने दिग्विजय सिंह पर भ्रष्टाचार और करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप लगाए थे। इन आरोपों को लेकर दिग्विजय सिंह ने मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

मामले में 2017 के कुछ आदेश—जो क्रॉस एग्जामिनेशन प्रक्रिया से जुड़े थे—को चुनौती दी गई थी, जिसके बाद से केस लंबित है।

21 साल बाद भी जारी सियासी असर

2003 का चुनाव प्रदेश की राजनीति में टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ था, जब उमा भारती के नेतृत्व में भाजपा ने दिग्विजय सिंह की 10 साल पुरानी सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था। उस चुनाव की सियासी तल्खी आज भी अदालत तक पहुंचती दिख रही है।

आगे क्या?

अब निचली अदालत को हाईकोर्ट में यह बताना होगा कि मामला किस चरण में है और अब तक क्या कार्यवाही हुई है।

27 अप्रैल को होने वाली सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट इस लंबे समय से लंबित मामले के निपटारे को लेकर कोई ठोस दिशा तय कर सकता है।

दो दशकों से जारी यह कानूनी लड़ाई अब एक निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ती नजर आ रही है।