500 करोड़ की जमीन 1 रुपये में देने का आरोप: जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से पूछे 5 सवाल, बीजेपी ने किया पलटवार

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव पर बड़ा आरोप लगाया है। पटवारी ने कहा कि सीएम ने अपने सलाहकार के ट्रस्ट को 500 करोड़ की जमीन 1 रुपये में दी

500 करोड़ की जमीन 1 रुपये में देने का आरोप: जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से पूछे 5 सवाल, बीजेपी ने किया पलटवार

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश सरकार के संरक्षण में उज्जैन में जमीन खरीद घोटाले को अंजाम दिया गया है। कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा और पार्टी के मध्य प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये बात कही।

500 करोड़ की जमीन 1 रुपये में देने का आरोप: जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से पूछे 5 सवाल, बीजेपी ने किया पलटवार

मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री Mohan Yadav से जुड़े कथित जमीन विवाद को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने मुख्यमंत्री और भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि उज्जैन में करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन एक ट्रस्ट को मात्र 1 रुपये की टोकन राशि पर दे दी गई। कांग्रेस ने इस मामले में पारदर्शिता और जांच की मांग की है, जबकि भाजपा ने सभी आरोपों को निराधार और राजनीतिक साजिश बताया है।

कांग्रेस का दावा: 1 रुपये में दी गई 500 करोड़ की जमीन

भोपाल में आयोजित प्रेस वार्ता में जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि उज्जैन स्थित ‘वीर भारत न्यास’ नामक ट्रस्ट को लगभग 500 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन सिर्फ 1 रुपये में आवंटित कर दी गई। उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट के ट्रस्टी श्रीराम तिवारी हैं, जो मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार बताए जाते हैं। पटवारी ने सवाल उठाया कि इतनी मूल्यवान जमीन किस आधार पर और किन नियमों के तहत ट्रस्ट को दी गई।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार द्वारा खरीदी गई जमीनों और संपत्तियों की भी जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि इन खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता नहीं बरती गई और जनता को वास्तविक जानकारी नहीं दी गई।

जीतू पटवारी ने पूछे पांच बड़े सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री और भाजपा सरकार से पांच प्रमुख सवाल पूछे—

500 करोड़ रुपये की जमीन केवल 1 रुपये में क्यों दी गई और इसका आधार क्या था?

यदि मीडिया रिपोर्टें गलत हैं तो संबंधित समाचार संस्थान के खिलाफ एफआईआर या मानहानि का मुकदमा क्यों नहीं किया गया?

जमीन के सवाल पर भाजपा द्वारा जातिगत मुद्दा उठाने की जरूरत क्यों पड़ी?

यदि आरोप गलत हैं तो सरकार पूरी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं करती?

मुख्यमंत्री बनने के बाद परिवार की जमीन खरीद में अचानक तेजी कैसे आई और उसकी जांच क्यों नहीं कराई जा रही?

पटवारी ने कहा कि सरकार को सभी तथ्यों को सार्वजनिक करते हुए श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।

पवन खेड़ा का हमला, ‘इंसाइडर ट्रेडिंग’ से की तुलना

कांग्रेस नेता Pawan Khera ने भी इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को विकास योजनाओं और मास्टर प्लान से जुड़ी अंदरूनी जानकारी पहले से उपलब्ध थी।

खेड़ा ने दावा किया कि उज्जैन के मास्टर प्लान 2035 और सिंहस्थ क्षेत्र के विकास से जुड़ी जानकारी का लाभ उठाकर मुख्यमंत्री के परिवार ने दिसंबर 2023 में उसी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी। उन्होंने इसकी तुलना शेयर बाजार में होने वाली ‘इंसाइडर ट्रेडिंग’ से करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की।

भाजपा का जवाब: सरकारी ट्रस्ट को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम

मध्य प्रदेश सरकार और भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। राज्य के एमएसएमई मंत्री Chaitanya Kashyap ने कहा कि जिस ‘वीर भारत न्यास’ ट्रस्ट की बात की जा रही है, वह कोई निजी संस्था नहीं बल्कि एक सरकारी ट्रस्ट है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बिना तथ्यों के मुख्यमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है। काश्यप ने कहा कि विपक्ष पहले अपने नेताओं पर लगे आरोपों का जवाब दे और उसके बाद दूसरों पर सवाल उठाए।

ऊर्जा मंत्री का बचाव

ऊर्जा मंत्री Pradyuman Singh Tomar ने भी मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई जमीन नहीं खरीदी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्य स्वतंत्र रूप से व्यापार कर सकते हैं और इसमें कोई गलत बात नहीं है।

तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री की संपत्तियों को लेकर गलत और भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। सरकार का दावा है कि सभी संपत्तियां और लेन-देन कानून के दायरे में हैं तथा विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।

राजनीतिक विवाद गहराया

जमीन विवाद को लेकर कांग्रेस लगातार हमलावर है और स्वतंत्र जांच, श्वेत पत्र तथा जमीन आवंटन से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग कर रही है। दूसरी ओर भाजपा इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए मुख्यमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश करार दे रही है।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दौर में है। आरोपों और जवाबों के बीच सच्चाई क्या है, यह किसी आधिकारिक जांच या संबंधित दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और आने वाले दिनों में यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।