कोटा अपहरण मामला : इंदौर में मिली शिवपुरी की छात्रा, दोस्त के साथ भागी थी, अपहरण की झूठी कहानी रची

 



इंदौर। विदेश जाने के लिए किडनैपिंग की झूठी कहानी रचने वाली शिवपुरी की छात्रा को इंदौर क्राइम ब्रांच ने बरामद कर लिया है। युवती ने 5 दिन पहले ही लिया अपने युवक मित्र के साथ कमरा किराए पर लिया था। पुलिस को मुखबिर से इसकी सूचना मिली थी जिसके बाद फौरन कार्रवाई करते क्राइम ब्रांच की टीम ने छात्रा और उसके मित्र हर्ष को शिवाजी वाटिका खुड़ैल थाना से पकड़ा। पुलिस ने बताया कि कहानी का खुलासा होते ही छात्रा और उसका मित्र अमृतसर भाग गए थे। क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि पुलिस टीम ने काव्या धाकड़ (20) और उसके दोस्त हर्षित को ढूंढ लिया है। छात्रा और उसके दोस्त देवगुराड़िया (खुड़ैल) के आगे इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के समीप छात्रा की सहेली के रूम पर रह रहे थे। एसआई बलराम तोमर की टीम ने दोनों को वहां से पकड़ा। छात्रा की सहेली इंडेक्स कॉलेज से नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है।

छात्रा पहले इंदौर में पढ़ती थी और बाद में कोटा एक कोचिंग में एडमिशन लेने के लिए गई थी। वहां से छात्रा फिर इंदौर अपने दोस्त हर्षित के पास आ गई और इंदौर से पिता को अपहरण के फोटो वीडियो बनाकर भेज दिए। पिता को लगा कि वह कोटा से अपहरण हुई है और इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। बाद में पुलिस को इंदौर में छात्रा और उसके मित्र के सीसीटीवी फुटेज मिले और अब उसे पकड़ने में सफलता मिली.

रची थी अपहरण की फर्जी कहानी

अधिकारियों के मुताबिक, कोटा पुलिस ने काव्या के कथित अपहरण को लेकर मामला दर्ज किया था, लेकिन जांच में अपहरण की कहानी फर्जी पाई गई थी. उन्होंने जांच के हवाले से बताया कि काव्या और उसका मित्र हर्षित विदेश जाना चाहते थे, लेकिन उनके पास पर्याप्त रकम नहीं थी, इसलिए उन्होंने फिरौती के लिए अपहरण की झूठी कहानी गढ़ी.

पुलिस के अनुसार, अपहरण की कहानी गढ़े जाने के दौरान काव्या अपने माता-पिता को तस्वीरें और संदेश भेजकर विश्वास दिला रही थी कि वह कोटा में है, जबकि कुछ सीसीटीवी फुटेज से सुराग मिला कि इस घटनाक्रम के दौरान युवती अपने दोस्त के साथ इंदौर में थी.

राजस्थान पुलिस के मुताबिक, काव्या की मां उसे पिछले साल कोटा के एक छात्रावास में पढ़ने के लिए छोड़कर गई थी, लेकिन वह महज तीन दिन कोटा में रही थी. पुलिस का दावा है कि कोटा में अपनी मां द्वारा छात्रावास में छोड़े जाने के बाद काव्या इंदौर चली गई थी और मध्यप्रदेश के इस शहर में अपने दो पुरुष मित्रों के साथ रह रही थी.

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